Tuesday, Oct 04, 2022
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political crisis deepens in bihar, bjp told only speculation

बिहार में गहराया सियासी संकट, BJP ने बताया सिर्फ कयासबाजी

  • Updated on 8/9/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बिहार में राजनीतिक संकट के बीच राजद के नेतृत्व में विपक्ष ने सोमवार को कहा कि वह नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू को ‘गले लगाने’ को तैयार है, बशर्ते वह भाजपा का साथ छोड़ दे। कांग्रेस और वामदलों ने भी संकेत दिया कि अगर ऐसा होता है तो वे समर्थन करेंगे। इसके साथ ही कयास लगाए जा रहे हैं कि कुमार की जदयू और भाजपा के बीच कुछ समय से चल रही खींचतान अब अंतिम पड़ाव के करीब पहुंच चुकी है।

जदयू और लालू प्रसाद यादव नीत राजद के विधायकों की कल एक साथ बैठक करने की घोषणा से पहले से ही राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य का सियासी पारा और चढ़ेगा।  कुमार ने जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के पार्टी छोडऩे के बाद उत्पन्न हालात पर चर्चा के लिए मंगलवार को पार्टी के विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई है।

अहम बैठक से एक दिन पहले जदयू प्रवक्ता के.सी.त्यागी ने कहा, ‘नीतीश कुमार जदयू के निॢववाद नेता हैं। उनका पार्टी के सभी नेता व कार्यकर्ता सम्मान करते हैं। इसलिए पार्टी में किसी विभाजन का सवाल ही नहीं है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी जो भी फैसला लेगी, वह सभी को स्वीकार्य होगा।’

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मंगलवार को दोनों दलों द्वारा विधायकों की बैठक बुलाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि स्थिति असाधारण है। उन्होंने कहा, ‘मुझे मौजूदा घटनाक्रम के बारे में व्यक्तिगत रूप से कुछ पता नहीं है। 

लेकिन, हम इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं कि दोनों दलों (जिनके पास बहुमत हासिल करने के लिए पर्याप्त संख्या है) ने उस समय ऐसी बैठकें बुलाई हैं, जब विधानसभा का सत्र संचालन में नहीं है।’ तिवारी ने कहा, ‘अगर नीतीश राजग को छोडऩे का फैसला लेते हैं तो हमारे पास उन्हें गले लगाने के अलावा और क्या विकल्प है। राजद भाजपा से लडऩे के लिए प्रतिबद्ध है। अगर मुख्यमंत्री इस लड़ाई में शामिल होने का फैसला करते हैं तो हमें उन्हें अपने साथ लेना ही होगा।’

तिवारी से पूछा गया कि क्या राजद पूर्व के कड़वे अनुभवों को भुलाने को इच्छुक है, तो उन्होंने कहा, ‘राजनीति में हम इतिहास के बंधक बने नहीं रह सकते। हम समाजवादी हैं और शुरुआत कांग्रेस के विरोध से की थी जो उस समय सत्ता में थी।’ प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने पार्टी के सभी प्रवक्ताओं को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। अब राजद में फिर नए प्रवक्ता की सूची जल्द बनाई जाएगी। 

भाकपा- माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, ‘यदि जदयू भाजपा से गठजोड़ तोड़ता है और नई सरकार बनती है तो हम मदद का हाथ बढ़ाएंगे।’ कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान ने कहा कि बैठक विधानमंडल में दल के नेता अजीत शर्मा के आवास पर होगी और इसमें बिहार के पार्टी प्रभारी भक्त चरण दास भी शामिल होने की संभावना है। खान ने कहा, ‘हम हमेशा मानते हैं कि समान विचारधारा वाले दलों को एक साथ आना चाहिए।  समाजवादी विचारधारा में विश्वास रखने वाली मुख्यमंत्री की पार्टी जदयू अगर भाजपा का साथ छोड़ती है तो हम निश्चित रूप से इसका स्वागत करेंगे।’

उधर, प्रदेश भाजपा ने निश्चिंतता जताते हुए कहा कि राज्य में सरकार पूरी तरह से स्थिर है और सत्ता परिवर्तन की बातें सिर्फ कयासबाजी हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद संजय जायसवाल ने सोमवार को कहा कि बिहार में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। उधर, सूत्रों के अनुसार, राजद व जदयू में सरकार बनाने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

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