Friday, Jun 25, 2021
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Politics heated over Arnab Gauswami arrest accusations begin in BJP and Congress rkdsnt

अर्नब की गिरफ्तारी को लेकर सियासत गर्म, भाजपा और कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप शुरू

  • Updated on 11/4/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को एक शख्स को खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस में जुबानी जंग छिड़ गई है। भगवा दल ने उनकी गिरफ्तारी को प्रेस की आजादी पर हमला बताया है जो आपातकाल की याद दिलाता है, तो विपक्षी पार्टी ने Þचयनात्मक आक्रोशÞ की आलोचना की। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि 53 वर्षीय एक इंटीरियर डिजाइनर को आत्महत्या के लिए कथित तौर पर उकसाने के मामले में गोस्वामी को बुधवार सुबह उनके मुंबई स्थित घर से गिरफ्तार किया गया। 

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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने 47 वर्षीय गोस्वामी की ‘अचानक’ गिरफ्तारी की ङ्क्षनदा की और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मांग की कि उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार किया जाए और मीडिया की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के खिलाफ सरकारी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया जाए।     भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने गोस्वामी की गिरफ्तारी की ङ्क्षनदा की तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे सत्ता का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग बताया जो आपातकाल की याद दिलाता है। 

नड्डा ने ट्वीट में कहा कि भारत ने आपातकाल के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को माफ नहीं किया, प्रेस की आजादी पर हमले के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी कभी माफ नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘‘और अब पत्रकारों के खिलाफ राज्य की सत्ता का इस्तेमाल किए जाने के लिए भारत, सोनिया और राहुल गांधी को फिर दंडित करेगा।’’ शाह ने ट्वीट कर आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर लोकतंत्र को कलंकित किया है। रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ सत्ता का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग व्यक्तिगत आजादी और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है।’’ 

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उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह घटना आपातकाल की याद दिलाती है। प्रेस की आजादी पर इस हमले का विरोध जरूर होना चाहिए और विरोध किया जाएगा।’’  महाराष्ट्र में शिवसेना-राकांपा- कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। भाजपा की आलोचना पर पटलवार करते हुए कांग्रेस ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता पर भगवा दल का चयनात्मक आक्रोश, शर्मनाक है और रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक के खिलाफ मामले में कानून अपना काम करेगा। 

कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ‘‘मैं हैरान हूं कि सरकार में बैठे लोगों का आक्रोश बहुत चयनात्मक है। जब उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में बच्चों के नमक-रोटी खाने की खबर प्रकाशित करने पर एक पत्रकार को महीनों जेल में डाल दिया जाता है, जब पत्रकारों को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है तो यह आक्रोश क्यों नहीं दिखता?’’ उन्होंने कहा, 'वाराणसी के एक गांव में दयनीय स्थिति का खुलासा करने वाली (स्क्रोल की) पत्रकार सुप्रिया शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया जाता है, जब पत्रकारों के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में मामला दर्ज किया जाता है तो भाजपा क्यों चयनात्मक रूप से चुप रहती है?'

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उन्होंने कहा, 'उत्तर प्रदेश में पीपीई किट घोटाले का पर्दाफाश करने वाले रिपोर्टर को जेल में डाल दिया जाता है और वह राजद्रोह के गंभीर आरोप का सामना करते हैं, न कि घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है।' श्रीनेत ने पत्रकारों से कहा, यह चयनात्मक आक्रोश अवांछित है, शर्मनाक है और उन्हें (भाजपा को) कुछ भी कहने में शर्म आनी चाहिए।' उन्होंने गोस्वामी पर हमला करते हुए कहा कि वह खुद दो दशक तक पत्रकार रही हैं और आरोप लगाया कि गोस्वामी ने पत्रकारिता का अपमान किया है और शर्मिंदा किया है। 

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कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया, ‘‘ भाजपा प्रेस की स्वतंत्रता के बारे में बात करने वाली देश में आखिरी पार्टी होनी चाहिए।’’ श्रीनेत ने आरोप लगाया कि भगवा दल मीडिया को विज्ञापन और डराने-धमकाने के जरिए नियंत्रित कर रही है। उन्होंने कहा, 'जहां भी कांग्रेस की सरकार है या हम गठबंधन में हैं, वहां अगर लोग पूरी तरह से बेगुनाह हैं तो उन्हें दंडित नहीं किया जाएगा। मेरा मानना है कि इस मामले में भी कानून अपना काम करेगा।' सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने गोस्वामी की गिरफ्तारी की ङ्क्षनदा की और इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया। 

 

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