Monday, Dec 09, 2019
pollution punjab stubble burning increased 25 percent haryana slight decline

पराली जलाने के मामले में पंजाब में 25 फीसदी बढ़ोतरी, हरियाणा में भी हवा जहरीली

  • Updated on 11/1/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पंजाब में धान कटाई के मौसम में अभी तक पराली जलाने की घटनाओं में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि इसके पड़ोसी राज्य हरियाणा में मामूली गिरावट देखी गई है। कृषि प्रधान राज्यों में किसानों द्वारा पराली जलाना जारी है जबकि इस पर रोक लगी हुई है। पराली जलाने वाले ऐसे लोगों में से कई पर जुर्माना लगाया गया है जबकि अन्य पर मामले दर्ज किये गए हैं। 

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यद्यपि कृषि और प्रदूषण नियंत्रण विभागों के अधिकारी इस मौसम में पराली जलाने की संख्या में कमी होने को लेकर आशांवित हैं।      सरकारी एजेंसी ‘सफर’ ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की हिस्सेदारी शुक्रवार को बढ़कर 46 प्रतिशत हो गई। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि पंजाब में अभी तक पराली जलाने के कुल 22,137 मामले सामने आये हैं। तरण तारण जिले में 2,614 मामले सामने आये हैं। 

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अधिकारी ने बताया कि फिरोजपुर, पटियाला और संगरूर में 31 अक्टूबर तक दो..दो हजार से अधिक मामले सामने आये। नवीनतम आंकड़े के अनुसार छह जिलों अमृतसर, बङ्क्षठडा, गुरदासपुर, कपूरथला, मनसा और मुक्तसर में पराली जलाने के एक..एक हजार से अधिक मामले सामने आये हैं। पठानकोट में पराली जलाने की मात्र दो घटनाएं सामने आयी हैं और यह एकमात्र ऐसा जिला है जहां पराली जलाने के मामले 10 से कम सामने आए। एक अधिकारी ने बताया कि गत वर्ष 31 अक्टूबर तक राज्य में पराली जलाने के कुल 17,646 मामले सामने आये थे। 

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पंजाब कृषि विभाग के एक अधिकारी ने ऐसे मामलों में वृद्धि का कारण फसल जल्दी पकने को बताया क्योंकि बुवाई तारीख 20 जून से बदलकर 13 जून हो गई थी। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि हरियाणा में पराली जलाने के 4288 मामले सामने आये हैं जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले कुछ कम हैं। अधिकारी ने बताया कि 31 अक्टूबर, 2018 तक राज्य में पराली जलाने के कुल 4589 मामले सामने आये थे। हरियाणा कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पराली जलाने के लिए किसानों के खिलाफ पुलिस में कुल 324 शिकायतें दी गई हैं। 

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पराली जलाने की समस्या फतेहाबाद, सिरसा और कुरुक्षेत्र में सबसे अधिक थी। पंजाब में पराली जलाने पर रोक का उल्लंघन करने के लिए किसानों पर 43 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया जबकि 26 कंबाइन हार्वेस्टर आपरेटरों पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट प्रणाली (एसएमएस) नहीं लगाने के लिए 52 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। कंबाइंड हार्वेस्टरों से जुड़ा एसएमएस पुआल को छोटे छोटे टुकड़ों में काटकर खेतों में बिखेर देता है। इसके परिणाम स्वरूप किसानों को अगली फसल की बुवाई से पहले पराली जलानी नहीं पड़ती।

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