Monday, Jan 27, 2020
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इस तरह मनाया जाता है दक्षिण का प्रसिद्ध त्योहार पोंगल

  • Updated on 1/14/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत (India) एक विविध संस्कृति (Diverse culture) का देश है। हम यह भी जानते हैं की विभिन्न संस्कृतियों के साथ कैलेंडर में कई त्योहार आते हैं। इससे पहले कि हम एक का त्योहार  मनाते हैं की तो दूसरा त्योहार  (Festival) आ जाता है।

जैसे ही हमने कल ही लोहड़ी का त्योहार मनाया था और आज पोंगल आ गया है। लेकिन उत्तर भारत में, हम में से कुछ लोग इस उत्सव और इस त्योहार कि कुछ अद्भुत परंपराओं के बारे में जानते होंगे हैं।

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पोंगल क्या है?
पोंगल तमिलनाडु (Tamil nadu) में मनाया जाने वाला चार दिवस का फसल उत्सव है, जो थाई (यानी जनवरी-फरवरी के मौसम) में आता है जब चावल, गन्ना, हल्दी आदि की फसल काटी जाती है।

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Pongal Festival

क्या मतलब है पोंगल का
तमिल में 'पोंगल' शब्द का अर्थ 'उबालना' है, और इस त्योहार को साल की फसल कटने के समारोह के रूप में मनाया जाता है। पोंगल हिंदू के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो हर साल लोहड़ी के साथ या एक दिन बाद मे आता है। जो जनवरी के मध्य में मनाया जाता है।

पोंगल का पहला दिन को कहते है भोगी
पोंगल के पहले दिन को भोगी त्योहार कहते है जो भगवान इंद्र के सम्मान में मनाया जाता है, जो बारिश के देवता हैं, और देवताओं के स्वामी हैं। भोगी मंटालू का अनुष्ठान भी इस दिन किया जाता है, जिसके दौरान घर के बेकार सामानों को पारंपरिक रूप से गोबर के उपले और लकड़ी से बने अलाव में फेंक दिया जाता है।

 

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