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उत्तराखंड में स्वरोजगार बढ़ा रही है प्रसाद योजना

  • Updated on 4/20/2019

देहरादून/ब्यूरो। केदारनाथ और बदरीनाथ समेत उत्तराखंड के मंदिरों में स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद उपलब्ध कराने की योजना से सरकार को बड़ी राहत मिली है। इससे जहां स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन बने हैं, वहीं स्थानीय उत्पादों का भी बाजार भाव बढ़ा है।

वर्ष 2017 की चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ मंदिर से यह पहल शुरू हुई थी। इसमें महिला स्वयं सहायता समूह ने चौलाई के लड्डू बनाकर और स्थानीय स्तर पर निर्मित धूप व अगरबत्ती को प्रसाद के रूप में बेचना शुरू किया था। दो महीने में ही इस योजना के तहत 19 लाख रुपये के प्रसाद बिके थे, जिसमें महिला स्वयं सहायता समूहों को दस लाख का मुनाफा हुआ था।

लाभ की इस दर को देखते हुए वर्ष 2018 में प्रदेश सरकार ने इस योजना को संस्थागत रूप देने का प्रयास किया। इसके तहत बदरीनाथ और केदारनाथ में प्रसाद संघ का निर्माण किया गया और इन संघों को मंदिर के प्रागण में दुकानें उपलब्ध कराई गईं।

सरकारी सहायता मिलने से इस योजना को और भी गति मिली और दोनों मंदिरों में पचास लाख से अधिक के प्रसाद की बिक्री हुई। मौजूदा सीजन में इस योजना को प्रदेश के 625 मंदिरों में लागू की जाएगी, जहां श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है।

सीएम त्रिवेंद्र का कहना है कि उत्तराखंड के मंदिरों में हर वर्ष लगभग तीन करोड़ श्रद्धालु आते हैं। यदि एक करोड़ श्रद्धालुओं तक भी इस प्रसाद को पहुंचा दिया गया और सौ रुपये की दर से भी इसे बेच जाए, तो महिला समूहों को एक अरब की बिक्री होगी। प्रदेश सरकार इस योजना को पलायन रोकने के विकल्प के तौर पर आजमाना चाहती है। 

 
 
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