Saturday, May 08, 2021
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Prashant Bhushan case Judges lawyers advocate amicable relationship bar and bench rkdsnt

प्रशांत भूषण मामला : जजों, वकीलों ने बार और पीठ के बीच सौहार्दपूर्ण रिश्तों की वकालत की

  • Updated on 8/16/2020


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय द्वारा वकील प्रशांत भूषण को न्यायपालिका के खिलाफ किए गए अपने दो ट्वीट के लिए अदालत की आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराए जाने के कुछ ही दिन बाद जम्मू-कश्मीर के प्रख्यात कानूनी विद्वानों ने रविवार को ‘‘बार और पीठ‘’ के बीच बढ़ती दरार पर चिंता व्यक्त की और न्याय हित के लिए दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों की वकालत की। 

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जम्मू के इपिलॉग न्यूज नेटवर्क की ओर से ‘‘बार एंड बेंच- द रिलेशनशिप‘’ विषय पर आयोजित वेबिनार के दौरान तीन पूर्व न्यायाधीशों और कई वरिष्ठ वकीलों ने अपने विचार साझा किए। जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में सीबीआई की वकील मोनिका कोहली ने चर्चा के दौरान कहा कि न्यायाधीश और वकील एक- दूसरे के पूरक हैं और बार एवं पीठ न्याय दिलाने वाले रथ के दो पहिए हैं। 

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सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली ने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने कहा,‘‘बार और पीठ के बीच संबंध सौहार्दपूर्ण होने चाहिए। मेरा विश्वास है कि ये दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं।‘‘ 

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वेबिनार के दौरान मेघालय उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद याकूब मीर ने कहा कि कानून की गरिमा को बनाए रखने के लिए दोनों के महत्वपूर्ण कर्तव्य हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे पी सिंह ने भी कहा कि देश में न्याय मुख्य रूप से न्यायाधीश द्वारा किया जाता है, जिसमें विद्वान वकील सहायता प्रदान करते हैं।

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