Saturday, Oct 01, 2022
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प्रशांत भूषण के समर्थन में आए SC-HC के रिटायर्ड जज और ब्यूरोक्रेट्स समेत 3000 से ज्यादा लोग

  • Updated on 8/18/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को अवमानना केस में दोषी करार दिए जाने के बाद उनके समर्थन में 3 हजार से ज्यादा लोग सामने आये हैं। इन लोगों में सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस, रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट, शिक्षाविद और वकील सभी शामिल हैं। 

इन सभी ने अपने बयान जारी किये हैं, साथ ही सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के 13 रिटायर्ड जस्टिस ने अपने साइन भी किए हैं। 

तीन हजार से ज्यादा लोगों के इस बयान में प्रशांत भूषण के खिलाफ 14 अगस्त आए सुप्रीमकोर्ट के फैसले को खारिज करने की अपील की गई है। 

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बयान में लिखा गया है कि जज और वकील दोनों, एक स्वतंत्र न्यायपालिका में शामिल हैं जो संवैधानिक लोकतंत्र में कानून के शासन का आधार है और जो पारस्परिक सम्मान और जजों और बेंच के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध की पहचान है।

इस पत्र में आगे लिखा गया है कि 'दोनों के बीच में संतुलन का कोई भी झुकाव एक तरफा होना हानिकारक है। न्यायपालिका को किसी तरह की पूरी छूट नहीं है कि उसकी आलोचना नहीं हो सकती। इस केस में अटॉर्नी जनरल की राय नहीं ली गई है जो कि कानूनसंगत नहीं है।

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इस बयान पर रिटायर्ड जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी, रिटायर्ड जस्टिस मदन बी लोकुर, रिटायर्ड जस्टिस जीएस सिंघवी, रिटायर्ड जस्टिस रूमा पाल, रिटायर्ड जस्टिस आफताब आलम, रिटायर्ड जस्टिस गोपाला गौड़ा समेत 13 रिटायर्ड जस्टिस और 166 शिक्षाविदों, रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट और मशहूर शख्सियतों के नाम के साथ दस्तखत किए गए दर्ज हैं।

इतना ही नहीं, इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे सहित 41 वकीलों ने भी हस्ताक्षर करते हुए, सुप्रीम कोर्ट के जजों और आम लोगों के लिए एक खुला पत्र भी लिखा है। हस्ताक्षर करने वालों में प्रमुख वकील राजू रामचन्द्रन,वृंदा ग्रोवर, अरविंद दातार, कामिनी जायसवाल, संजय हेगड़े, शेखर नाफडे, ललित भसीन भी शामिल हैं।

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बताते चलें कि उच्चतम न्यायालय की न्यायपालिका के प्रति कथित रूप से अपमानजनक ट्वीट करने के मामले में वकील प्रशांत भूषण को दोषी करार दिया गया है। इस केस की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होनी है।

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