Monday, Jan 21, 2019

कुंभ 2019: प्रयागराज कुंभ की ये बातें बनाती हैं इसे और भी खास, विदेश से भी खिंचे चले आते हैं भक्त

  • Updated on 12/27/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हमारा देश विभिन्न भाषा और संस्कृति का एक अनोखा सम्मेलन है, जहां आए दिन कोई न कोई त्यौहार बड़े हर्षोलास से मनाया जाता है। यहां धार्मिक-आध्यातमिक आयोजन होता रहता है, जिसे देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग आते हैं। ऐसा ही एक आयोजना है कुंभ मेला। दुनिया भर से लोग इस मेले में शामिल होने के लिए आते हैं।

इस बार भी 2019 में संगम नगरी प्रयागराज में आस्था का ऐसा ही जमघट लगने जा रहा है, जिसे देखने के लिए न सिर्फ भारत बल्कि सात समुंदर पार से भी भक्त खिले चले आते हैं। इस पावन कुंभ मेले की दिव्यता और भव्यता को जानने के लिए लोग उत्सुक रहते हैं, आइये जानते है इसके बारे में कुछ खास बातें। 

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--विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले कुंभ का आयोजन देश के चार प्रमुख शहरों हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में किया जाता है। इन शहरों में प्रत्येक 12 वर्षों में विशेष ज्योतिषिय योग बनने पर कुंभ मेला लगता है। धार्मिक ग्रथों के अनुसार देवासुर संग्राम के दौरान इन्हीं चार स्थानों पर अमृत की बुंदे गिरी थी।

--इस मेले की खास बात यह है कि यहां बिना किसी निमंत्रण के करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ खुद-ब-खुद उमड़ती है। मेले में शिरकत करने वाले लोगों को यहां किसी चीज को कोई मोह नहीं होता, वे बस अपनी श्रद्धा के चलते अपनी गठरी-वठरी लिए संगमतट पहुंचते हैं और आस्था की डुबकी लगाकर वापस लौट जाते हैं।

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--दुनिया के सबसे बड़े कुंभ मेले जैसा धार्मिक-आध्यातमिक अनुभव शायद ही कहीं मिल सके। रोशनी से नहाई हुई पंडालो की नगरी और घंटा-घड़ियालों के साथ गूंजते वैदिक मंत्र मन में शांति भर देते हैं। भक्ति का ये सुखद अहसास आपको सिर्फ कुंभ नगरी में पहुंचनें पर ही होगा। 

--गंगा, यमुना और सरस्वती के मिलन तट पर लाखों लोगों की भीड़ सिर्फ इस संगम को देखने के लिए उमड़ती है। देश के लोग ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग इस पावन संगम के साक्षी बनते हैं।

--इस मेले को जो और भी खास बनाता है वो है साधु-संतो का 13 अखाड़ा, जहां ये लोग कुंभ के प्रमुख दिनों पर पूरी शानों शौकत के साथ शाही स्नान को जाते हैं। इस शाही स्नान के लिए प्रशासन अखाड़ो से संगम तक एक अलग राजपथ बनाता है, जिस पर सिर्फ और सिर्फ अखाड़े चलते हैं।

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