विभिन्न देवी-देवताओं के रूप में राजनीतिज्ञों को पेश करने की गलत परम्परा 

  • Updated on 2/1/2019

भारत एक धर्म प्रेमी देश है और विभिन्न विचारधाराएं होने के बावजूद यहां के लोग अपने देवी-देवताओं के प्रति अत्यधिक श्रद्धा रखते और उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त करते हैं। 

दुख की बात है कि इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों से हमारे देश में देवी-देवताओं को भी राजनीतिज्ञों के स्वार्थ साधन का माध्यम बना दिया गया है तथा लोगों को गुमराह करने के लिए उन्हें देवी-देवताओं के रूप में चित्रित करने का गलत रुझान चल पड़ा है।

10 जुलाई, 2015 को कानपुर में अमित शाह के दौरे से पहले वहां लगे पोस्टरों में उन्हें तीर-कमान लिए हुए भगवान राम के रूप में दर्शाया गया।

26 जुलाई, 2016 को प्रयागराज में लगाए गए पोस्टरों में उत्तर प्रदेश के भाजपाध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को राम, दया शंकर सिंह को लक्ष्मण और मायावती के बारे में अभद्र टिप्पणी करने वाली उसकी पत्नी स्वाति को दुर्गा के अवतार के रूप में पेश किया गया।

9 दिसम्बर, 2016, आगरा में एक पोस्टर में नरेन्द्र मोदी को अर्जुन और अमित शाह को श्री कृष्ण के रूप में दिखा कर नीचे लिखा, ‘परिवर्तन के पुरोधा।’

19 जनवरी, 2017 को वारणसी में लगाए गए पोस्टरों में महाभारत  के युद्ध की तरह अखिलेश यादव और राहुल गांधी को क्रमश: अर्जुन और भगवान श्री कृष्ण के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया। पोस्टर में अर्जुन के स्थान पर अखिलेश यादव और भगवान श्री कृष्ण के स्थान पर राहुल गांधी को रथ चलाते हुए दिखाया गया।

20 जनवरी, 2017 को बाराबंकी में भाजपा युवा मोर्चा की ओर से जारी पोस्टर में अखिलेश यादव व भाजपा विरोधियों को रावण के रूप में तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भगवान राम के रूप में रावण का संहार करते दिखाया गया। रावण के 10 सिरों में राहुल गांधी, मायावती, असदुद्दीन ओवैसी, आजम खान, राम गोपाल यादव और लालू यादव आदि को दिखाया गया।

25 सितम्बर, 2018 को भोपाल में एक पोस्टर में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भगवान शिव और उनकी पत्नी साधना सिंह को गौरी के रूप में दिखाया गया। इसके नीचे लिखा था, ‘‘माता हैं गौरी (साधना), पिता हैं महेश (शिवराज सिंह चौहान)।’’

15 अक्तूबर, 2018 को चम्बल-ग्वालियर के दौरे पर आए राहुल गांधी के स्वागत में लगाए गए पोस्टरों में राहुल गांधी तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाभारत के रथ पर सवार दिखाया गया।

28 जनवरी, 2019 को प्रियंका गांधी को गोरखपुर से उम्मीदवार बनाने की मांग करने वाले दो पोस्टर लगे दिखाई दिए जिनमें से एक पोस्टर में प्रियंका को झांसी की रानी के रूप में सफेद घोड़े पर सवार दिखा कर पोस्टर के नीचे लिखा था ‘‘चारों तरफ बज रहा डंका, बहन प्रियंका, बहन प्रियंका’’।

29 जनवरी, 2019 को बिहार की राजधानी पटना में लगाए गए पोस्टरों में  राहुल गांधी को भगवान राम के रूप में दिखाया गया। इन पोस्टरों पर लिखा था, ‘‘वे राम-राम जपते रहे, तुम बन कर राम जियो रे।’’

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने राहुल गांधी को शिव भक्त के रूप में पेश किया।

30 जनवरी, 2019 को कानपुर शहर में लगे पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शेर और अमित शाह को चाणक्य के रूप में दिखाया गया है।

30 जनवरी, 2019 को प्रयागराज के कुंभ मेला क्षेत्र में लगाए एक पोस्टर में प्रियंका गांधी को महिषासुर मॢदनी मां दुर्गा के रूप में दिखाया गया और बैनर पर लिखा,‘‘ कांग्रेस की दुर्गा करेंगी शत्रुओं का वध।’’ कुछ दिन पहले भी उन्हें एक पोस्टर में दुर्गा के अवतार में दिखाया गया था।

मेले में प्रियंका गांधी के ऐसे पोस्टर भी लगाए गए हैं जिनमें उन्हें ‘गंगा की बेटी’ कहा गया है। उल्लेखनीय है कि 2014 में जब नरेन्द्र मोदी वाराणसी से लोकसभा चुनाव में उतरे थे तो उन्होंने स्वयं को ‘गंगा का बेटा’ बताया था।

बिहार सरकार में मंत्री रह चुका तेज प्रताप यादव तो स्वयं को श्री कृष्ण का रूप बता चुका है और उसने स्वयं की कृष्ण के रूप में रथ पर बैठे हुए एक तस्वीर भी पिछले दिनों पोस्ट की थी।

उपरोक्त उदाहरणों से ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय राजनीति में नेताओं की तुलना देवी-देवताओं से करने की एक गलत परम्परा सी बन गई है जो हमारे देवी-देवताओं का सरासर अपमान तथा घोर ङ्क्षनदनीय है। अत: इस रुझान को रोकने के लिए सरकार और समाज को कदम उठाने चाहिएं।                                                                       —विजय कुमार

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