Sunday, Jun 13, 2021
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ चाइनीज सॉफ्टवेयर से लेन-देन पर लगाया प्रतिबंध

  • Updated on 1/6/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। चीन (China) और अमेरिका (America) की बीच अभी भी तनाव की स्थिति बरकरार है। इस क्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चीन के आठ सॉफ्टवेयर के साथ लेनदेन पर पुरी तरह से रोक लगा दी है।  इन में एक सॉफ्टवेयर अलीबाबा एंट ग्रुप का अलीपे भी है।


इन सॉफ्टवेयर पर लगा प्रतिबंध
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रम्प ने बीते मंगलवार को आठ चीनी सॉफ्टवेयर के साथ लेन-देन पर प्रतिबंध लगाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, उन्हीं में अलीबाबा एंट ग्रुप का अलीपे भी एक है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपित जो बाइडेन के पदभार ग्रहण करने से पहले अमेरिक-और बीजिंग के बीच गतिरोध बढ़ गया है।

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इससे पहले भी ट्रंप बैन कर चुके हैं चीनी ऐप
ट्रंप ने साल 2020 में चीन के कुछ ऐप को अविश्वसनीय करार देते हुए प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिका द्वारा बैन किए गए ऐप में टिकटॉक और वीचैट को बैन किए जाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने बताया कि ये ऐप डेटा एकत्रित करके देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।

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गूगल ने भी किए थे चीनी चैनेल्स डिलीट
बता दें कि चीन के ऐप की विश्वसनीयता पर लंबे समय से सवाल खड़े किए जा रहे हैं। साल 2020 में  गूगल ने भी चीन के खिलाफ एक्शन लेते हुए 2,500 से ज्यादा चीनी यूट्यूब चैनेल्स को डिलीट कर दिया था। दरअसल, इन चीनी यूट्यूब चैनल्स के माध्यम से गलत जानकारी शेयर की जा रही थी। गूगल ने इसकी जानकारी मिलते ही इन चैनलों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया। इस पूरे मामले पर गूगल का कहना था कि इन चैनल्स को अप्रैल और जून के दौरान यूट्यूब से हटा दिया गया था। गूगल ने कहा, चीन से संबंधित इन्फिलुएंस ऑपरेशंस के लिए चलाई जा रही जांच के तहत ये फैसला लिया गय।

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नामों को लेकर नहीं की कोई जानकारी साझा
गूगल द्वारा जारी बुलेटिन में इस बात की पुष्टि की गई कि यूट्यूब के मुताबिक इन चैनल्स पर अधिकतर स्पैमी, नॉन-पॉलिटिकल वीडियो को शेयर किया जा रहा था। बताया गया की इन वीडियो में राजनीति से भी जुड़ी बाते शामिल थीं। फिलहाल गूगल ने इन चैनल्स को डिलीट तो कर दिया है, लेकिन इनके नामों को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की। चैनल्स से जुड़ी अन्य जानकारी साझा कर दी गईं। यूट्यूब के अलावा ट्विटर पर भी इस तरह की ही वीडियो के लिंक देखे गए।

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ग्राफिका द्वारा की गई पहचान
यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस तरह के वीडियो की पहचान सबसे पहले डिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन में सोशल मीडिया एनालिटिक्स कंपनी ग्राफिका के द्वारा की गई थी। फिलहाल इस पूरे मामले पर अमेरिका में चीनी दूतावास ने अभी तक कोई भी बयान नहीं दिया है। इन सब कार्रवाईयों से पता चलता है कि ट्रंप सरकार ने सत्ता में रहते चीन के खिलाफ कड़ा रुख ही रखा, लेकिन अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार का चीन के प्रति रवैया कैसा होता है ये देखने वाली बात होगी।

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