Friday, Apr 23, 2021
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prices of fruits and vegetables in the capital decreased by nearly 50 percent rkdsnt

करीब 50 फीसदी कम हुए राजधानी में फल-सब्जियों के दाम

  • Updated on 12/16/2020

नई दिल्ली, (अनामिका सिंह): करीब एक महीने पहले तक आलू-प्याज व टमाटर के दाम ने राजधानी के लोगों को रूला दिया था लेकिन बीते एक सप्ताह से फल-सब्जियों के बढे दाम करीब 50 फीसदी से भी ज्यादा कम हुए हैं। इसका फायदा जहां राजधानीवासियों को मिल रहा है, वहीं आढती व किसान इससे परेशान हैं। दरअसल दिल्ली के बाॅर्डर पर पिछले 21 दिनों से किसान कृषि विधेयक की वापसी को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे राजधानी की थोक मंडी आजादपुर से अन्य प्रदेशों में जाने वाली फल व सब्जी का निर्यात बाधक हो गया है।


बता दें कि किसानों के आंदोलन से पहले आलू का दाम 60 से 70 रूपए तक खुदरा मार्केट में था जोकि अब घटकर 25 रूपए हो गया है। प्याज के दाम 80 रूपए तक पहुंच गए थे जबकि अब 30 रूपए किलो प्याज बिक रही है। बात यदि टमाटर की करें तो 80-100 रूपए किलो तक पहुंचने वाले टमाटरों का दाम 25 रूपए किलो पहुंच गया है।

150 से 200 रूपए किलो वाले सेब भी अब 50 से 100 रूपए में खूब बिक रहे हैं। इसकी वजह एशिया की सबसे बडी मंडी आजादपुर में फल व सब्जियों के थोक दाम लुढक जाना है। हालांकि अभी भी मंडी की आवक 50 फीसदी है, रोजाना मंडी में 7-8 हजार टन सब्जी व फल आ रहा है। जोकि दिल्ली के लोगों के लिए पर्याप्त ही नहीं बल्कि अधिक है। जिससे फल-सब्जियों के दाम लगातार गिरते चले जा रहे हैं।

जाने क्या है आजादपुर मंडी में फल-सब्जियों के प्रतिकिलो थोक भाव                     
आलू        12 रूपए
प्याज        18‐50 रूपए 
टमाटर        21‐50 रूपए
गोभी        5‐75 रूपए
पत्ता गोभी    9 रूपए
लौकी        9 रूपए
मूली        1‐75 रूपए
सेब        54‐25 रूपए
केला        13‐50 रूपए
पपीता        12‐75 रूपए
तरबूज        6 रूपए


क्या कहते हैं एपीएमसी चेयरमैन:

आजादपुर मंडी के चैयरमेन आदिल अहमद खान ने कहा कि दिल्ली में जितनी मांग होती है उसससे ज्यादा की आपूर्ति है। जो फल-सब्जी आ रहे हैं वो अन्य प्रदेशों में नहीं जा पा रहे हैं। जिससे फल-सब्जी के दाम लगातार गिर रहे हैं लेकिन इसमें सबसे ज्यादा नुकसान को हो रहा है किसानों का। उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। आंदोलनकारी किसानों को बाॅर्डर पर कम होते तापमान व उपज का दाम ना मिलने से दोहरी मार झेलनी पड रही है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वो किसानों की बात अब मान ले।

 


 

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