Wednesday, Oct 16, 2019
priyanka gandhi up congress raj babbar removed ajay kumar lallu appointed president

छोटी मगर, युवा जोश से भरी है यूपी कांग्रेस की नई टीम

  • Updated on 10/9/2019

नई दिल्ली/शेषमणि शुक्ल। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कांग्रेस (Congress) को संजीवनी देने का दायित्व अब युवा कंधों पर डाला गया है। अरसे बाद पार्टी की ओर से ऐसा प्रयास हुआ, अन्यथा अब तक गिने चुने पांच-सात नेताओं के इर्द गिर्द ही पूरी पार्टी सिमटी रहती थी। नई टीम में ज्यादातर 40-45 साल की आयु के पदाधिकारी हैं। छोटी होने के साथ ही नए संगठन में जातिगत संतुलन भी है।

यूपी में कांग्रेस को पुनर्जीवन देने का दायित्व पार्टी हाईकमान ने महासचिव और प्रभारी प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) को सौंपा है। एक तरह से नया संगठन टीम प्रियंका कही जाएगी। प्रियंका की नजर 2022 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections 2022) पर है। उन्होंने राज्यभर से जमीनी कार्यकर्ताओं को चिह्नित पार्टी को सक्रिय और मजबूत करने का जिम्मा दिया है।

राज बब्बर की जगह लल्लू को मिली उत्तर प्रदेश कांग्रेस की कमान

नए संगठन में राज बब्बर (Raj Babbar) जैसे सेलीब्रिटी की जगह जमीन से जुड़े अजय कुमार लल्लू (Ajay Kumar Lallu) को नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया गया। लल्लू कुशीनगर के सेवरही गांव के रहने वाले हैं और तमकुहीराज विधानसभा सीट से कांग्रेस के दूसरी बार के विधायक हैं। वे पिछड़ी जाति के वैश्य समाज से आते हैं। लल्लू अव्वल दर्जे के आंदोलनकारी हैं। जन समस्याओं को लेकर आए दिन धरना-प्रदर्शन करते रहते हैं। इसके चलते वे धरना कुमार के नाम भी विख्यात हैं। लल्लू को चुनने के पीछे भाजपा और सपा के वोट बैंक को काटने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

भाजपा ने सत्यदेव सिंह कुर्मी जाति हैं तो सपा के प्रदेश अध्यक्ष यादव हैं। यानि दोनों ओबीसी हैं। राज्य में आबादी के हिसाब से ओबीसी ही सबसे ज्यादा संख्या में हैं। इसके मद्देनजर कांग्रेस ने नई कमेटी में 45 फीसदी ओबीसी को जगह दी है। वहीं आराधना मिश्रा को नेता विधानसभा मंडल बनाकर जहां ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की है, वहीं 19 फीसदी ब्राह्मण समेत अन्य सवर्ण, 20 फीसदी दलित और 16 फीसदी मुस्लिमों को जगह देकर संगठन को जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण से भी साधने का प्रयास किया गया है।

अदिति सिंह पार्टी व्हिप उल्लंघन के बावजूद कांग्रेस प्रचारकों की लिस्ट में

पार्टी ने उन नेताओं को भी संगठन में तरजीह दी है, जो भले ही कांग्रेस काडर के नहीं हैं, लेकिन काम के हैं और जमीन से जुड़े हुए हैं। वीरेंद्र चौधरी जो बसपा से कांग्रेस में आए हैं और दीपक कुमार सपा सरकार में मंत्री रहे हैं। इन दोनों को नई टीम में उपाध्यक्ष का दायित्व दिया गया है। सपा छोड़ कर कांग्रेस में आए राकेश सचान को महासचिव तो कैसर जहां अंसारी व नवाज आलम को सचिव का दायित्व दिया है। वर्किंग कमेटी और परामर्श कमेटियों में ऐसे नेताओं को जगह देकर पार्टी ने संतुलन बनाने का प्रयास किया है।

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