क्या यूपी में खत्म हो रही कांग्रेस को ऑक्सीजन दे पाएंगी प्रियंका गांधी, होंगी ये मुश्किलें

  • Updated on 2/12/2019

नई दिल्ली/ अमरदीप शर्मा। लोकसभा चुनाव में अब सौ दिन से भी कम का वक्त शेष रह गया है। इसके लिए सभी राजनैतिक पार्टियां गठजोड़ के साथ अपने- अपने गणित को सुधारने में लगे हुए हैं। चुनावी मौसम में सियासत की हवाओं का रुख देखना बेहद दिलचस्प होगा।

उत्तर प्रदेश में सपा- बसपा का गठबंधन और इसमें कांग्रेस को शामिल नहीं करना यूपी की सियासत में बड़ा घमासान देखने को मिल सकता है। इससे इतर कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को राजनीति में लाकर सियासी दाव खेल दिया है। प्रियंका की एंट्री से यूपी की राजनीति में उबाल आ गया है।  

कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी महासचिव बना दिया है। इसके साथ ही उन्हें यूपी का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी का मकसद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के डूबते हुए वर्चस्व को संजोए रखने की है। कांग्रेस का ये स्टंट यकीनन चुनावी फायदे के लिए लिया गया है। हालांकि देखना दिलचस्प होगी कि प्रियंका आखिर यूपी में डूबती हुई कांग्रेस को कितना आक्सीजन दे पाएंगीं।

इस बात में कोई दोहराय नहीं हैं कि राहें इतनी आसान नहीं है, जितना कांग्रेस समझ रही है। हालांकि प्रियंका पार्टी के लिए एक नई उम्मीद जरुर बनकर उभरी हैं। प्रियंका को कई तरह की बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। बीजेपी का कहना है कि यूपी में प्रियंका को लाना राहुल की हार का प्रमाण है। 

प्रियंका के लिए हो सकती हैं ये परेशानियां

लंबे समय से सत्ता से बाहर

कांग्रेस पार्टी काफी लंबे समय से सत्ता से बाहर है। प्रदेश में उसका वर्चस्व लगभग खत्म होता जा रहा है। पिछले 28 साल से कांग्रेस यूपी की सत्ता के करीब तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में वोटरों को एक बार फिर लुभाना प्रियंका के लिए चुनौती होगी। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी महज 2 सीटों पर आकर ही सिमट गई थी। फिलहाल अमेठी और रायबरेली की ही सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है क्योंकि इन सीटों पर खुद राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने चुनाव लड़ा था। तब जाकर कांग्रेस इन सीटों को जीतने में सफल रही थी। प्रियंका को एक बार फिर पार्टी को शुरुआत से जमीनी स्तर पर मजबूत करके खड़ा करना होगा।

रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप

प्रियंका गांधी वाड्रा खानदान की बहू हैं। उनके पति पर आरोप लए हुए हैं कि उन्होंने यूपीए सरकार के होते हुए तमाम जमीन के घोटाले किए। जिसके चलते प्रियंका को जनता के बीच जाकर इस छवि को खतम करके खास पहचान स्थापित करनी होगी। बीजेपी हमेशा से ही रॉबर्ट वाड्रा पर हमले करती रही है। लेकिन जब तक दोनों ही राजनीति में नही थे लेकिन अब प्रियंका की इस पर जवाब देने की जिम्मेदारी बढेंगी। 

सपा - बसपा गठबंधन

उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का गठबंधन होकर विपक्ष एकजुट होता हुआ दिख रहा है। इस गठबंधन से कांग्रेस पार्टी को बाहर रखा गया है। जब गठबंधन का प्रत्याशी किसी सीट पर चुनाव लड़ेगा तो कांग्रेस के प्रत्याशी को अलग से वोट लेने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी। यूपी में देखा जा रहा है कि सपा - बसपा गठबंधन सीधे तौर पर बीजेपी को टक्कर देगा। इस लिहाज से कांग्रेस के लिए राहें आसान नहीं होंगी। गठबंधन की घोषणा के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचारी पार्टी होने का आरोप लगाया था। इसके अलावा यूपी में पिछली बार जब सपा के साथ कांग्रेस ने गठबंधन किया था तो करारी हार का सामना करना पड़ा था। 


 

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