Thursday, Mar 21, 2019

चंद्रशेखर को लेकर महागठबंधन और कांग्रेस में तनातनी, जानें क्या है आजाद की रणनीति

  • Updated on 3/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  भीम आर्मी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश में दलितों के पोस्टर बॉय बन चुके चंद्रशेखर आजाद लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सियासत में अचानक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

दरअसल बुधवार को कांग्रेस की महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने चंद्रशेखर से मुलाकात की। इसके कुछ ही देर बाद अखिलेश यादव और मायावती ने बैठक की। 

चेंद्रशेखर राव और प्रियंका की मुलाकात के निकाले जा रहे राजनीतिक मायने 

चेंद्रशेखर से प्रियंका गांधी की मुलाकात के बाद से राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि चंद्रशेखर लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का हाथ थामने जा रहे हैं। उन्हें पार्टी की ओर से लोकसभा का उम्मीदवार भी बनाया जा सकता है या दलित नेता के साथ कांग्रेस का गठबंधन हो सकता है।

हालांकि दोनोंं नेताओं की मीटिंग महत्वपूर्ण है लेकिन ये बिल्कुल साफ है कि चेंद्रशेखर लोकसभा का चुनाव तो लड़ना चाहता हैं लेकिन कांग्रेसी बनकर नहीं। भीम आर्मी के संस्थापक को लेकर भी कांग्रेस का कुछ ऐसा ही रूख है।

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प्रियंका से जुड़े करीबी सूत्र का कहना है कि चेंद्रशेखर को अपनी पार्टी में शामिल करना चाहते हैं और न ही उन्हें अपने टिकट पर कहीं से चुनाव लड़ाना चाहते हैं हालांकि वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की इच्छा रखते है। चेंद्रशेखर की मांग है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव में उन्हें समर्थन दे।

कांग्रेस इन मांगों को लेकर राजी भी है लेकिन उनकी अपनी भी कुछ शर्तें है। हालांकि इस सहयोग के बदले कांग्रेस, दलित नेता का इस्तेमाल अपने चुनावी कैम्पेन में मन मुताबिक करना चाहती है। कांग्रेस की यह शर्त चंद्रशेखर और कांग्रेस के बीच किसी राजनीतिक समझौते की अड़चन बन रही है। 

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क्यों नहीं हो पा रहा समझौता 

चेंद्रशेखर चाहते है कि वो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के  महागठबंधन से भी लोकसभा चुनाव में समर्थन दे। इसके बदले वो अपने मुताबिक़ बीजेपी के खिलाफ लड़ रही पार्टियों को चुनाव के दौरान मदद करेंगे। दिक्कत ये है कि यूपी में महागठबंधन से हारने के बाद कांग्रेस अब बसपा को सबक सिखाने के साथ लोकसभा के नतीजों में अपने लिए बेहतर गुंजाइश चाहती है।

कांग्रेस का मानना है कि चंद्रशेखर उनके इस काम में काफी मदद कर सकते है। संभावनाएं हैं कि दिल्ली में भीम आर्मी की रैली के बाद शायद कोई नतीजा निकल जाए। वैसे समझौते के लिए कांग्रेस के अंदर चंद्रशेखर के भरोसेमंद दिग्गज नेता काम कर रहे हैं। 

राहुल से दो कदम आगे निकली प्रियंका गांधी 

सहारनपुर आंदोलन के बाद चेंद्रशेखर दबंग दलित नेता के तौर पर उभरे हैं। तब राहुल गांधी, चंद्रशेखर से मुलाकात करना चाहते थे। लेकिन मायावती की वजह से उन्होंने इसे टाल दिया।

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कांग्रेस को यह उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन हो सकता है। चूंकि चेंद्रशेखर को लेकर मायावती उस वक्त काफी संकुचित थीं, इस वजह से कांग्रेस ने अपने कदम पीछे कर लिया। लेकिन जबसे उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा ने गठबंधन किया है। उसके बाद प्रियंका गांधी ने चेंद्रशेखर से मुलाकात की है। इस बहाने पार्टी बसपा को सबक सिखाना चाहती है। 

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