Wednesday, Jan 29, 2020
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ऐतिहासिक फैसला: जम्मू- कश्मीर से धारा 370 खत्म, BSP-AAP ने किया समर्थन

  • Updated on 8/5/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कई विपक्षी दलों के भारी विरोध के बीच सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में एक संकल्प पेश किया जिसमें जम्मू कश्मीर (jammu kashmir) राज्य से संविधान के अनुच्छेद 370 (1) (article 370) के अलावा सभी खंडों को हटाने और राज्य का विभाजन- जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया है। जम्मू- कश्मीर केंद्र शासित क्षेत्र की अपनी विधायिका होगी जबकि लद्दाख बिना विधायिका वाला केंद्रशासित क्षेत्र होगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक संकल्प पेश किया जिसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खंड जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे। उन्होंने कहा, ‘संविधान के अनुच्छेद 370(3) के अंतर्गत जिस दिन से राष्ट्रपति द्वारा इस सरकारी गैजेट को स्वीकार किया जाएगा, उसी दिन से अनुच्छेद 370 (1) के अलावा अनुच्छेद 370 के कोई भी खंड राज्य में लागू नहीं होंगे।’ अनुच्छेद 370 (1) के तहत उन विषयों का उल्लेख किया गया जिनमें संसद जम्मू कश्मीर के लिए कानून बना सकता है।

जैसे ही शाह ने उच्च सदन में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने संबंधी एक संकल्प और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों.... जम्मू- कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित करने के प्रावधान वाले एक विधेयक पेश किया, इस पर कड़ा विरोध जताते हुए कांग्रेस, तृणमूल अैर द्रमुक के सदस्य आसन के समक्ष आ गए और पालथी मारकर बैठ गये। इसी बीच पीडीपी के एक सदस्य ने अपने वस्त्र फाड़ लिए। हाथों में काली पट्टी बांधे पीडीपी के दो सदस्यों ने पहले विधेयक की और फिर संविधान की प्रति भी सदन में फाड़ी। इसके बाद सभापति एम वेंकैया नायडू ने पीडीपी के इन दोनों सदस्यों को मार्शलों के जरिये सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया।

शाह ने कहा कि विगत में 1950 और 1960 के दशकों में तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने इसी तरीके से अनुच्छेद 370 में संशोधन किया था। ‘हमने भी यही तरीका अपनाया है।’ गृह मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद स्वयं भी जम्मू कश्मीर से आते हैं, उन्हें चर्चा में भाग लेकर राज्य के लोगों की समस्याओं को उजागर करना चाहिए।

शाह ने राज्यसभा में जम्मू एवं कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश किया। गृह मंत्री ने लद्दाख के लिये केंद्र शासित प्रदेश के गठन की घोषणा की जहां चंडीगढ़ की तरह विधानसभा नहीं होगी। शाह ने राज्यसभा में घोषणा की कि कश्मीर और जम्मू डिवीजन विधानसभा के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी। विपक्षी सदस्यों के विरोध और हंगामे के बीच गृह मंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे।’

सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह जम्मू कश्मीर राज्य में संविधान के अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन दो केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में करने संबंधी संकल्प का विरोध करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी देश के संविधान का सम्मान करती है, उसकी रक्षा का संकल्प दोहराती है और संविधान की प्रतियां फाड़े जाने की कड़ी निंदा करती है।

हालांकि जम्मू- कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर बसपा ने सरकार का समर्थन किया। इससे पहले सोमवार को सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक घंटे लंबी बैठक चली। समझा जाता है कि इस बैठक में शीर्ष नेतृत्व ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।

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