Thursday, Feb 09, 2023
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promises of free gifts congress said election commission not have jurisdiction

मुफ्त उपहार के वादे : कांग्रेस बोली- चुनाव आयोग का अधिकार क्षेत्र नहीं

  • Updated on 10/7/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कांग्रेस ने कहा कि आदर्श संहिता में बदलाव संबंधी निर्वाचन आयोग का हालिया प्रस्ताव प्रतिस्पर्धी राजनीति की भावना के खिलाफ है और यह ‘‘लोकतंत्र के ताबूत में और एक कील’’ साबित होगा।  निर्वाचन आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों से कहा है कि वे चुनावी वादों को पूरा करने को लेकर वित्तीय स्थिति के संबंध में मतदाताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराएं क्योंकि आधी-अधूरी जानकारी का दूरगामी प्रभाव हो रहा है।

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निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों से 19 अक्टूबर तक जवाब देने को कहा है। इस घटनाक्रम के संबंध में सवाल करने पर कांग्रेस में संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र नहीं है।      उन्होंने कहा, ‘‘यह प्रतिस्पर्धी राजनीति की भावना के खिलाफ है और यह भारत के लोकतंत्र के ताबूत में और एक कील साबित होगा।’’

निर्वाचन आयोग को भी आदर्श आचार संहिता की जरूरत : कपिल सिब्बल

रमेश ने कहा कि अगर ऐसी नौकरशाही वाली सोच होती तो पिछले दशकों में कल्याण और सामाजिक विकास की कोई योजना धरातल पर उतर कर सफल नहीं हुई होती। आयोग के प्रस्ताव पर कई राजनीतिक दलों ने अपना विरोध जताया है और वामपंथी दलों का कहना है कि नीति निर्माण को ‘नियमित’ करना निर्वाचन आयोग का काम नहीं है।   

आयोग को भी आदर्श आचार संहिता की जरूरत : सिब्बल

इससे पहले राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने चुनावी वादों की वित्तीय व्यवहार्यता के बारे में मतदाताओं को प्रामाणिक जानकारी देने को लेकर आदर्श आचार संहिता में बदलाव के संबंध में राजनीतिक दलों से राय मांगने के लिए, निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि हो सकता है चुनाव निगरानीकर्ता को खुद एक आचार संहिता की जरूरत हो।    

   उन्होंने टविटर पर कहा, 'हो सकता है निर्वाचन आयोग को ही आदर्श आचार संहिता की जरूरत हो।’’  ईसी ने अपने पत्र में कहा था, ‘‘चुनावी घोषणा पत्रों में स्पष्ट रूप से यह संकेत मिलना चाहिए कि वादों की पारदर्शिता, समानता और विश्वसनीयता के हित में यह पता लगना चाहिए कि किस तरह और किस माध्यम से वित्तीय आवश्यकता पूरी की जाएगी।’’   

  

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