Saturday, Mar 23, 2019

पुलवामा : भारत विरोधी टिप्पणियां और कश्मीरियों की पिटाई 

  • Updated on 2/23/2019

पाकिस्तान समॢथत ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के आतंकवादियों द्वारा पुलवामा में सी.आर.पी.एफ. के जवानों की कायरतापूर्ण हत्या के विरुद्ध देशभर में भड़के रोष और आक्रोश का तूफान यथापूर्व जारी है। 

जहां कुछ संगठनों ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने की मांग की है वहीं पुलवामा हमले के बाद जिस तरीके से देश में कश्मीरी युवाओं द्वारा देश विरोधी टिप्पणियां की जा रही हैं और दूसरी ओर ऐसी टिप्पणियों और पुलवामा हमले से आक्रोशित लोगों द्वारा देश में कश्मीरी समुदाय के लोगों के विरुद्ध भड़की ‘घृणा’ के चलते उन पर हमले किए जा रहे हैं, उससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर ही प्रश्रचिन्ह लगता जा रहा है।

इसी को देखकर 22 फरवरी को सुप्रीमकोर्ट ने कश्मीरी मूल के लोगों पर हमलों को लेकर कठोर रवैया अपनाते हुए केंद्र सरकार समेत 11 राज्यों की सरकारों को कश्मीरियों के विरुद्ध किसी भी हमले या सामाजिक बहिष्कार के मामलों में तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

एस.जी.एस. यूनिवॢसटी, गुडग़ांव की छात्रा को इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर राष्टï्र विरोधी भावनाएं व्यक्त करने पर विश्वविद्यालय से निकाल दिया गया। 

शाहजहांपुर में फरहान और भदोही में जीशान खां नामक युवकों को सोशल मीडिया पर जलते हुए तिरंगे के नीचे भारत विरोधी आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

बंगाल के ‘सूरी’ में एक कश्मीरी छात्र को पुलवामा हमले संबंधी टिप्पणी करने पर काबू किया गया जबकि एक अन्य फरार है। 

भोपाल के एक नॄसग कालेज में पढ़ रहे खालिद बशीर तथा आबिद मोहम्मद लोन के साथ 4 अन्य कश्मीरी छात्रों को राष्ट्र विरोधी टिप्पणियां और चित्र पोस्ट करने पर कालेज से निष्कासित कर दिया गया।

रुड़की स्थित क्वांटम ग्लोबल यूनिवॢसटी द्वारा सोशल मीडिया पर राष्टï्र विरोधी टिप्पणियों के लिए 7 कश्मीरी छात्रों को निलंबित किया गया।

दीनानगर के एक कालेज के होस्टल में रह रहे कश्मीरी छात्र सोहेल लोन द्वारा तिरंगा फाड़ कर फैंकने से विवाद हो गया। उसने कहा कि लोग जितनी बार झंडा लगाएंगे वह उतनी बार उसे उतार देगा। उसने कुछ दिन पहले भी अपनी फेसबुक वाल पर कमैंट लिखा था, ‘‘हम पाकिस्तानी हैं।’’

बिहार के समस्तीपुर में एक व्यक्ति को सी.आर.पी.एफ. के जवानों के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर पकड़ा गया। 

इसी प्रकार की घटनाओं की प्रतिक्रिया स्वरूप कश्मीरियों के विरुद्ध जनरोष भड़क उठा है जिसने कई स्थानों पर ङ्क्षहसक रूप धारण कर लिया है।

अमृतसर में दिल्ली-लाहौर बस आने से पहले ‘ईडीयट क्लब’ ने सड़क पर पाकिस्तान का झंडा बिछा दिया और ड्राइवर को मजबूर किया कि वह झंडे को रौंदते हुए बस निकाले। इसके बाद पाकिस्तान का झंडा जला दिया गया। 

हिमाचल की पोंटा पंचायत ने वहां रहने वाले कश्मीरियों को वहां से चले जाने के लिए कह दिया है जिसके बाद पुलिस ने 7 कश्मीरियों को वहां से निकाल कर अन्य स्थानों पर पहुंचाया है। 

कोलकाता में 22 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहे एक प्रतिष्ठित कश्मीरी डाक्टर को जहां कोलकाता छोड़ कर चले जाने या गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जा रही है तथा एक अंग्रेजी स्कूल में पढऩे वाली उसकी 2 बेटियों का उनकी सहपाठिनों ने बहिष्कार कर दिया है।

नई दिल्ली में एक लोकल गाड़ी में यात्रा कर रहे 3 कश्मीरी शाल व्यापारियों को पत्थरबाज कह कर उग्र भीड़ ने उन पर हमला कर दिया और जान बचाने के लिए उन्होंने अपने शाल वहीं छोड़ कर नांगलोई के निकट जब गाड़ी कुछ धीमी हुई तो चलती गाड़ी से छलांग लगा दी। 

महाराष्ट्र के यवतमाल में शिव सेना की युवा इकाई के सदस्यों ने एक कालेज में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों को पीटा और गालियां निकालीं। 

लुधियाना में एक कश्मीरी युवक द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने और भारत के विरुद्ध अपशब्द बोलने पर भारी बवाल हो गया। 

इनके अलावा भी और न जाने कितनी घटनाएं हुई हैं जो प्रकाश में नहीं आ पाईं। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा ही रहेगा। जहां कश्मीरी युवाओं द्वारा भारत विरोधी टिप्पणियां और कृत्य नाकाबिले माफी है वहीं कश्मीरी समुदाय के सभी सदस्यों को रोष का पात्र बनाना भी उचित नहीं।

अत: जहां भारत विरोधी टिप्पणियां करने वालों को पकड़ कर कड़ी सजा देने की जरूरत है उसी प्रकार निर्दोष कश्मीरियों को निशाना बनाने वालों को भी ऐसा करने से रोकने की आवश्यकता है।                                           —विजय कुमार 

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