Friday, Feb 28, 2020
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#PulwamaAttack: प्रशासन के मुआवजे वाले दावे खोखले! शहीद के परिजनों को अब भी है मदद का इंतजार

  • Updated on 2/14/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के पुलवामा (Pulwama) में हुए आतंकी हमले को एक साल बीत गए। आज ही के दिन देश के 40 जाबांज पिछले साल आतंकियों के कायरना हरकत के शिकार हो गए। वैलेंटाइन डे के अवसर पर शहीदों को याद करते हुए लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। वहीं कुछ शहीद ऐसे भी हैं जिन्हें कागज पर ही याद किया जा रहा है। हमले में शहीद महेश कुमार यादव के परिजन आज भी सरकार से मदद के इंतजार में आंखें बिछाए बैठे हैं।

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डेढ़ एकड़ जमीन देने का किया था वादा
शहीद महेश के घर परिवार को अब तक कोई सुविधाएं नहीं मिलीं। शहीद की पत्नी संजू देवी ने कहा कि शासन और प्रशासन द्वारा किए गए बड़े-बड़े दावे केवल खोखले हैं। अब तक कोई मदद हम तक नहीं पहुंची है। पत्नी ने बताया कि उन्हें डेढ़ एकड़ जमीन देने का वादा किया गया था। वादे को 11 माह गुजर गए लेकिन पता नहीं वो वादा फाइल के किस पन्ने में आज तक छिपी हुई है। सरकार (Government) की तरफ से शौचालय (Toilet), सोलर लाइट, शहीद गेट और बच्चों की पढ़ाई कराने का वादा भी किया गया था। लेकिन सभी वादे न पूरे हुए और न ही आगे इसके आसार भी दिख रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि स्वयं के खर्च पर दोनों बेटों को पढ़ा रहीं हैं। मां बाप को पेंशन नहीं मिल रही है। भाई नौकरी के इंतजार में बुढ़ा होता जा रहा है। शहीद के छोटे भाई ने बताया कि नौकरी के कागजात को तो कई बार लिया लेकिन बार-बार बहाना बनाकर टालते रहते हैं। छोटे भाई अमरेश ने कहा कि वार्षिकी पर कोई सांस्कृतिक आयोजन भी नहीं होंगे।

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2017 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे महेश
शहीद महेश कुमार यादव वर्ष 2017 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 118 वीं बटालियन में भर्ती हुए थे। महेश सात दिन की छुट्टी पर घर आए थे और पुलवामा हमले के तीन दिन पहले ड्यूटी पर लौटे थे। जिस वक्त महेश की शहादत की खबर आई, उस वक्त उनके पिता राजकुमार यादव सूरत में अपनी टैक्सी चला रहे थे। पता चला तो बहोसी की हालत में वह गांव पहुंचे। घर पहुंचकर देखा तो पत्नी संजू यादव, मां शांति देवी और दोनों बेटों के अलावा छोटे भाई अमरीश यादव वीर जवान की शहादत को अंतिम विदाई दे रहे थे। 

 

 

       

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