Thursday, Feb 27, 2020
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पुलवामा का बदलाः Air Strike से पाकिस्तान को दिया कभी न भूलने वाला जख्म

  • Updated on 2/14/2020

नई दिल्ली/प्रियंका अग्रवाल। साल 2019 में बसंत के मौसम में जहां पूरी दुनिया प्यार में डूबी हुई थी उस दौरान हमारे जवानों के साथ ऐसा हादसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इस दिन जम्मू- कश्मीर (Jammu And Kashmir) में सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले पर एक बहुत बड़ा आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें देश ने अपने 40 जवान खो दिए। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।

14 फरवरी, 2019 को जम्मू- कश्मीर के पुलवामा (Pulwama) में सीआरपीएफ के जवान अपने परिवार के साथ छुट्टी मनाने के बाद ड्यूटी जॉइन करने के लिए घर से वापस लौट रहे थे। ठीक इसी सफर के दौरान उनके काफिले को विस्फोटकों से लदी एक कार ने टक्कर मार दी जिसे आत्मघाती हमलावर चला रहा था। इस फिदायीन हमले की जिम्मेदारी खुद पाकिस्तान (Pakistan) के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) ने ली थी। इस हमले में देश के 40 जवान शहीद हो गए थे। अपने देश के 40 जवानों के शवों को एक साथ देखकर जहां पूरा देश शोकाकुल था, तो वहीं सबके मन में बदले की आग भी धधक रही थी।

इस खबर को सुनते ही पूरे भारत में मातम पसर गया लेकिन इससे भारतीय आर्मी का मनोबल नहीं गिरा और जवानों की शहादत का बदला लेने का फैसला किया और महज दो हफ्तों के भीतर पाकिस्तान को ऐसी चोट दी जिसका जख्म वो दिखा भी नहीं सकता था और छुपा भी नहीं सकता था।

चलिए तो हम आपको बताते हैं कि किस तरह से भारतीय वायुसेना ने अपने शहीद सीआरपीएफ के जवानों का बदला लिया। जिसे पाकिस्तान कभी नहीं भूल पाएगा...

14 फरवरी को पाकिस्तान ने जो जख्म दिया उसका बदला तो लेना ही था पर हमारी वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर उन पर ताबड़तोड़ बम बरसाए और पुलवामा में हुए 40 जवानों की शहादत का बदला लिया। हमने पाकिस्तान को पुलवामा हमले का एयर स्ट्राइक के रूप में जवाब दिया। 26 फरवरी, दिन मंगलवार को सुबह 3 बजकर 40 मिनट से लेकर 3 बजकर 53 मिनट तक भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान स्थित बालाकोट में आतंकी अड्डों पर बम बरसाकर उन्हें तबाह कर दिया। इस हमले के बाद पाकिस्तान बुरी तरह से तिलमिला उठा।

7 लोगों को थी हमले की जानकारी
इस हमले की जानकारी काफी खुफिया रखी गई। कई मीटिंग भी हुई लेकिन मीडिया तक में बात नहीं आई। इस हमले की पूरी जानकारी और टाइमिंग सिर्फ 7 लोगों को पता थी जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजिल डोभाल, तीनों सेना के प्रमुख और रॉ प्रमुख शामिल थे। इस हमले में इंटेलिजेंस ब्यूरो का पूरा योगदान था। जिसने समय पर जानकारी दी कि बालाकोट के इस जगह पर कई आंतकवादी छिपे हुए हैं। 

18 फरवरी को मिली मंजूरी
पुलवामा हमले के बाद कई हाई लेवल की मीटिंग हुईं लेकिन गुप चुप तरीके से भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को धवस्त करने की योजना बनाई। कहा जाता है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बारीकी से सभी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थे। इस योजना की मंजूरी 18 फरवरी को मिली।

मिराज 2000 ने रचा इतिहास
भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के एक ग्रुप ने पाकिस्तान के बालाकोट और पाक अधिकृत कश्‍मीर (POK) में जैश-ए-मुहम्‍मद के आतंकी अड्डों पर कई बम बरसाए। भारत के इस ताबड़तोड़ हवाई हमले में जैश-ए-मुहम्‍मद के कई ठिकाने पूरी तरह से तबाह हो गए। 

पाकिस्तान को किया भ्रमित
इस हमले से पहले पाकिस्तान को भ्रम में डालना जरूरी था जिससे कि उसे इस हमले के बारे में बिल्कुल भी भनक न लगे। इसलिए वायु सेना ने हमले से पहले 22 फरवरी से ही फाइटर विमानों ने एयरबेस से उड़ान भरना शुरू कर दिया जिससे पाकिस्तान को लगे कि उनकी कोई ट्रेनिंग या युद्धअभ्यास चल रहा है और वह उसमें उलझा रहे।



इसके बाद  25 फरवरी को वायु सेना को खुफिया जानकारी मिली की बालाकोट में एक जगह पर जैश-ए-मोहम्मद के 300 से अधिक आतंकवादी मौजूद है तो वायुसेना ने बिना देरी किए अगली सुबह करीब 4 बजे उन पर बम से हमला बोल दिया।

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