Thursday, Feb 27, 2020
pulwama attack has india changed policy adopted aggressive image

पुलवामा अटैक से क्या भारत ने बदली नीति, अपना ली है आक्रामक छवि ?

  • Updated on 2/14/2020

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर।  पुलवामा अटैक (Pulwama attack)  को आज 1 बरस बीत गए है। यह अटैक हमें भारतीय खुफिया तंत्र की सबसे बड़ी विफलता का ध्यान दिलाता है। तो साथ ही अपने सुरक्षाकर्मियों पर गर्व करने का दिन भी है जब पुलवामा अटैक के 13 दिन के भीतर-भीतर बालाकोट (Balakot) में पाकिस्तान (Pakistan) की सीमा में घुसकर आतंकवादी ठिकाने को तहस- नहस कर दिया। जिसमें 300 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। अब बीते 1 साल में खुफिया तंत्र कितना मजबूत हुआ है इस पर कभी और चर्चा हम करेंगे। 

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फिर पाकिस्तान नहीं किया है दुस्साहस
लेकिन इतना तो तय है कि गत 1 साल से पुलवामा अटैक की तरह फिर से पाक समर्थित आतंकवादियों ने दुस्साहस नहीं दिखाया है। तो इसके लिये भी खुफिया तंत्र और सुरक्षाकर्मियों को बधाई दी जानी चाहिये। इसके अलावा हमें देश के मौजूदा नेतृत्व के ठोस और त्वरित निर्णय की भी सराहना करनी चाहिये जिससे सेना को सीमा पार करने का हौसला दिया। इससे भी ज्यादा देश की जनता की आकांक्षा के अनुरुप भारतीय सेनाओं ने अपना पराक्रम विश्व के सामने प्रदर्शन किया जो वाकई काबिलेतारिफ है।

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पहले भी भारत पर हुए है कई अटैक
लेकिन सवाल उठता है कि पुलवामा अटैक जिसमें हमारे देश ने 44 जवानों को खो दिया, यह उतना ही दुःखदाई है जितना समय-समय पर पहले भी न जानें कितनी बार हमले को देश ने झेला है। यह इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि जब 2013 के जनवरी में 2 भारतीय सेना के सर काटकर पाकिस्तानी सेना ले गए तो देश में गुस्से अपने चरम पर था। तबके बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सरकार पर जमकर भड़ास निकाली तो देश का उनको साथ भी मिला। नरेंद्र मोदी ने देश से वादा किया कि उनकी सरकार बनने पर सीमा के भीतर परिंदे भी पर नहीं मारेगा।

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मोदी के कार्यकाल में भी हुए है आतंकी हमले
लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के दावे पर पानी फिर जाता है जब मौजूदा केंद्र सरकार के पिछले 6 साल के कार्यकाल के दौरान आतंकवादी हमले की चर्चा सामने आती है। सबसे पहले दिसंबर 2014 में 12 जवान उस समय शहीद हो गए जब बारामूला में आतंकियों ने सेना पर हमला कर दिया। लेकिन मोदी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। वहीं कौन भूल सकता है कि सेना पर मणिपुर में 2015 में हमला हुआ तो 18 जवान को हमने खो दिया। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी की भी इस दो बड़ी घटना पर पाकिस्तान से औपचारिक विरोध ठीक उसी तरह रही जैसे पहले के केंद्र सरकार के दौरान हुआ करता था। 

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पठानकोट एयरबेस पर हुआ हमला तो... 
जब मोदी सरकार का कार्यकाल आगे बढ़ता है तो फिर दहलाने वाली घटना हो जाती है, जिससे देश भर में आक्रोश फैल जाता है। जैश-ए-मौहम्मद ने पठानकोट एयरबेस पर 2 जनवरी 2016 को हमला किया तो 7 जवान शहीद हो गए। ऐसा नहीं है कि बदले में हमारे जवान ने कुछ नहीं किया। सेना ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इन आतंकवादियों को मुंह तोड़ जवाब देकर ढेर भी कर दिया। 

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जब सेना ने किया सर्जिकल स्ट्राइक
लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के उस कड़े फैसले पर देश तब झूम उठा जब 29 सितंबर की आधी रात को सेना ने अपने शौर्य का परिचय देते हुए आधी रात को सीमा पार करके 39 आतंकवादियों को मार गिराकर सुबह होते-होते भारतीय सीमा में दाखिल भी हो गया। यह प्रतिक्रिया इसलिये दिखाना पड़ा जब जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में 18 सितंबर 2016 को सेना के जवान सो रहे थे तो उनपर हमला कर दिया। जिसमें देश ने अपने 18 होनहार जवान को खो दिया था। 

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बदल गया भारतीय सेना का चरित्र
यह वहीं समय था जब भारतीय सेना के चरित्र को बदलते हुए दुनिया ने देखा। जिसमें पाकिस्तान को यह कड़ा संदेश दिया गया कि जब कभी-भी भारत पर हमला करने की कोशिश होगी तो अब सीमा पार करके हम बदला भी लेंगे। इसके लिये देश के राजनीतिक नेतृत्व की भी सराहना करनी पड़ेगी जिसने भारतीय सेना को खुली छूट दी।

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पुलवामा अटैक में 44 जवान हुए शहीद 
हालांकि इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी अपना भारतीय सेना को निशाने पर लेना नहीं छोड़ा। जिसका परिणाम यह रहा कि इसी तरह का हमला दिसंबर 2017 में हुआ तो देश ने फिर से 5 जवान खो दिया। लेकिन जैश-ए-मौहम्मद ने अपनी सारी सीमाएं को तोड़ते हुए 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के जवानों से भरी गाड़ियों के काफिलों पर हमला कर दिया तो 44 जवानों शहीद हो गए।

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श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुआ था हमला

यह दर्दनाक हमला उस समय हुआ जब श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारतीय सेना का काफिला गुजर रहा था तो अचानक से एक तेज गाड़ी स्कॉरपियो ने टक्कर मार दी। यह गाड़ी 300 किलोग्राम के विस्फोटक से भरी थी जिसे आदिल अहमद डार नामक युवा चला रहे थे। अचानक राजमार्ग पर जा रही काफिले को टक्कर देते ही चारों तरफ लाशों के ढेर लग गए।और यहां से जो भारत ने कड़ा प्रतिकार किया तो उसकी गूंज दशकों तक पाकिस्तान में सुनाई देगी। 

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मोदी ने अपनाई दो कदम आगे बढ़ने की नीति
भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक का ऐसा जवाबी कार्रवाई की जिससे पाकिस्तान हक्के-बक्के रह गया। जिसका जिक्र करते हुए पूर्व वित्त मंत्री स्व. अरुण जेटली ने दावा किया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा नीति को तेजी से बदला है। जबकि पहले की सरकारें पाक समर्थित हमले को लेकर सिर्फ डिफेंसिव रहा करती थी। लेकिन मोदी ने इसे बदलकर आक्रामक नीति अपनाई है। जिसके तहत जहां सीमा पार आतंकी कैंप को ही टारगेट करके खत्म करने की दो कदम बढ़ने पर फोकस शिफ्ट कर दी है।

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बदले हुए भारत ने दिखाई नई ताकत

यह बदले हुए भारत की नई ताकत ही है कि जिसके कारण पाकिस्तान अब हमले करने की हिमाकत सपना में भी नहीं कर सकता है। कारण उसे पता है कि भारतीय सेना सीमा पार करने से गुरेज भी नहीं करेगी। ऐसे में भारत की आक्रामक नीति को सफल कहा जा सकता है।

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