Monday, Mar 25, 2019

शहीदों के परिवारों में गुस्से और आक्रोश की लहर, पाक से चाहिए बदला

  • Updated on 2/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश के हरपुर से लेकर कर्नाटक के गुदीगेर गांव सहित देश के कई गांवों में शोक की लहर है, जहां के युवाओं ने मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। गुरुवार को हुए हमले को लेकर कई स्थानों पर दुख के साथ गुस्सा भी जाहिर किया जा रहा है। इस हमले में 40 जवान शहीद हुए हैं। 

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शहीद पंकज त्रिपाठी के पिता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के हरपुर में कहा, ‘‘ ..हमें इस बात पर गर्व है कि मेरे बेटे ने मातृभूमि के लिए शहादत दी लेकिन सरकार को हमला करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।‘’ उन्होंने कहा, ‘‘ बातचीत का समय खत्म हो चुका है, यह बदला लेने का समय है।‘’

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वहीं सड़कों पर गांव के लोग ‘बदला लो, बदला लो, पाकिस्तान से बदला लो’ के नारे लगा रहे हैं। देवरिया के जैदेव छापिया में लोग 30 वर्षीय विजय कुमार मौर्य की शहादत का बदला मांग रहे हैं। मौर्य नौ जनवरी को अपने गांव से जम्मू के लिए रवाना हुए थे। उनके परिवार में उनका डेढ़ साल का बच्चा भी है।  उनके पिता रामायण मौर्य ने कहा, ‘‘ मुझे गर्व है कि मेरे बेटे ने देश के लिए शहादत दी लेकिन सरकार को जल्द से जल्द पाकिस्तान को जवाब देना चाहिए।‘’

उन्होंने कहा, ‘‘ वह जवाब इतना मजबूत हो कि पाकिस्तान अगली बार हमारे क्षेत्र में घुसने और हमारे जवानों की मारने की हिम्मत न कर पाए।‘’  शहीद जवान बबलू संत्रा के परिवार ने मांग की है कि बलिदान का बदला लिया जाए और आतंकियों को ऐसी सीख दी जाए जो वे कभी ना भूल पाए। पश्चिम बंगाल में हावड़ा जिले के चक्काशी राजबंशीपाड़ा गांव के रहने वाले संत्रा 2000 में सीआरपीएफ में शामिल हुए थे। 

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संत्रा के परिवार में उनकी पत्नी और मां बिलख-बिलख कर रो रही हैं। उनकी चीख-पुकार को सुनकर परिवार के अन्य सदस्यों और दोस्तों ने कहा कि वे वीभत्स आतंकवादी हमले में जवानों की शहादत का बदला चाहते हैं। संत्रा हमेशा मंडल को देश की सेवा करने के लिए सुरक्षा बल में शामिल होने के वास्ते प्रेरित करते रहते थे। मंडल ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि मामा और अन्य लोगों की मौत का बदला लिया जाए। इस कायरतापूर्ण हमले की पीछे जिम्मेदार लोगों को ऐसी सीख दी जाए जो वे कभी भुला ना पाए।’’

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उन्होंने बताया कि संत्रा ने जब डेढ़ महीने पहले छुट्टी पर घर आए थे तब भी उन्होंने उससे केंद्रीय अद्र्धसैन्य बल की परीक्षा की तैयारी करने के लिए कहा था।  सीआरपीएफ के इन शहीद जवानों में मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के रहने वाले 30 वर्षीय अश्विनी कुमार काछी भी शामिल है। अश्विनी के शहीद होने की खबर कल रात उनके पैतृक गांव खुड़ावल में पहुंचने के बाद उनके परिवार सहित पूरे गांव में मातम छा गया।  

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अश्विनी के पिता सुकरु काछी (70) ने जवान बेटे के बलिदान की खबर मिलने के बाद भी अपना हौसला बनाये रखा और परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी दी। सुकरू के चार बेटे तथा एक बेटी हैं। बेटों में अश्वनी सबसे छोटा था। गांव के लोग अश्विनी को उसकी मुस्कुराहट के लिए याद कर रहे हैं। इस गांव ने अब तक सेना में शामिल हुए लोगों से तीन को खो दिया है। 

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राजस्थान के जैतपुर गांव के शहीद हुए जवान भागीरथ सिंह को सरपंच कपूर चंद गुर्जर याद करते हुए कहते हैं कि उसे बंदूक पसंद था। पंजाब के तरन-तारन गांव के शहीद सुखजिंदर सिंह को वर्दी बड़ी प्यारी लगती थी। पंचायत के सदस्य अंग्रेज सिंह ने कहा, ‘‘ वह काफी देशभक्त थे और बचपन से ही सेना में शामिल होना चाहते थे। पूरा गांव सदमे में है।‘’ 

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आतंकवादी ने जिस बस को टक्कर मारी थी, वह बस चला रहे शहीद जमाल सिंह ने अपनी पत्नी और पांच साल के बेटे से फोन पर मंगलवार को बात की थी। यह जानकारी शहीद के पिता जसवंत सिंह ने दी। कर्नाटक के मांड्या जिले के गुदीगेर गांव के शहीद ने हमले से कुछ घंटे पहले ही फोन पर अपने परिवार से बात की थी।      उनकी पत्नी कलावती ने कहा, ‘‘ मुझे उनसे फोन पर बात करना चाहिए था। उन्होंने सुबह में फोन किया था। लेकिन मैं बात नहीं कर पाई थी। मैं बहुत दुखी हूं।‘’

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पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के 40 कर्मियों में से एक तिलक राज के परिवार में कुछ समय पहले ही किलकारी गूंजी थी लेकिन कल की घटना ने पूरे परिवार को हिला दिया है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के जावील के रहनेवाले तिलक राज गुरुवार को हुए हमले से तीन दिन पहले ही अपने घर से निकले थे। पिछले महीने ही उनके बेटे का जन्म हुआ है। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुआ हमला राज्य में अब तक हुए हमलों में से बेहद भयानक है।
 

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