Thursday, Feb 27, 2020
punjab bjp head ashwani kumar sharma aap will not go up in punjab after delhi

पंजाब में नहीं चढ़ेगी AAP की काठ की हांडी : अश्विनी शर्मा

  • Updated on 2/14/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पंजाब भाजपा के नए प्रधान अश्विनी शर्मा ने कहा है कि आप’ की काठ की हांडी दिल्ली में चढ़ गई है लेकिन पंजाब में यह हांडी नहीं चढ़ेगी। पार्टी के पुराने प्रदेशाध्यक्ष श्वेत मलिक का दावा दोहराते हुए 2022 के चुनाव में भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा किया है। पंजाब केसरी के संवाददाता नरेश कुमार के साथ बातचीत दौरान अश्विनी शर्मा ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत, पंजाब में पूर्व अकाली-भाजपा सरकार द्वारा किए गए बिजली समझौते के अलावा पार्टी की राज्य में रणनीति और अकाली दल के साथ गठजोड़ को लेकर भी विस्तार के साथ बात की। पेश है अश्विनी शर्मा के साथ हुई पूरी बातचीत :

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प्र.: दिल्ली में ‘आप’ की सरकार की वापसी को आप किस रूप में देखते हैं?
उ.: लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। बतौर राजनीतिक दल भाजपा का लड़ाई करने का अपना अधिकार था और इसी अधिकार के चलते भाजपा ने पूरे दमखम के साथ यह लड़ाई लड़ी लेकिन अंत में जनता का जो भी फैसला आया उसे हम पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है और जनता का फैसला ही आखिरी फैसला है।

प्र.: क्या दिल्ली चुनाव के बाद पंजाब में ‘आप’ मजबूत होगी?
उ.: ‘आप’ की काठ की हांडी दिल्ली में चढ़ गई है लेकिन पंजाब में यह हांडी नहीं चढ़ेगी क्योंकि पंजाब का मतदाता सजग है और दिल्ली के मतदाता की तरह नहीं सोचता। पंजाब में 2017 के चुनाव के दौरान ही ‘आप’ अपना शीर्ष प्रदर्शन कर चुकी है और पार्टी के विधायकों ने जनता को निराश किया है। ये लोग जनता के मुद्दे उठाने की बजाय आपस में ही लड़ते रहे। पंजाब के लोगों ने इस पार्टी के 4 उम्मीदवारों को चुनकर संसद में भेजा लेकिन संसद में भी पार्टी प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर पाई। लिहाजा पंजाब में ‘आप’ की झूठ की हांडी नहीं चढ़ेगी।

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प्र.: भाजपा की 2022 के चुनावों के लिए क्या तैयारी है?
उ.: मुझे हाईकमान ने पंजाब में पार्टी का संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी है और भाजपा पंजाब में अगले 2 साल के लिए मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी। पार्टी के पंजाब में 30 लाख सदस्य हैं और मुझे पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी मिली है और जब पार्टी का विस्तार होता है तो इसके कई आयाम होते हैं और इसे आप विधायकों की बढ़ी हुई संख्या के रूप में भी देखेंगे।

प्र.: क्या भाजपा गठबंधन में छोटे भाई की भूमिका में ही रहेगी या ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी?
उ.: मुझे फिलहाल पार्टी को मजबूत करने के लिए कहा गया है और मैं पूरी मेहनत के साथ इस काम में लगा हुआ हूं। हम पार्टी का संगठन मजबूत करेंगे, जमीन पर आंदोलन करेंगे, जनता की आवाज बनेंगे और सरकार के सामने जनता के मुद्दे जोर-शोर से उठाएंगे। फिलहाल गठबंधन में भाजपा की भूमिका और सीटों की संख्या को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। 

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प्र.: पंजाब में जब पावर पर्चेज एग्रीमैंट हुए तो उस समय आप विधायक थे, क्या आपने उस समय इन एग्रीमैंट्स को ध्यान से नहीं पढ़ा?
उ.: भाजपा ने अकाली दल के साथ सरकार का हिस्सा होते हुए भी बिजली की बढ़ी दरों का विरोध किया था और भाजपा के विरोध के चलते ही सरकार को इस मामले में लचीला रुख अपनाकर उपभोक्ताओं को राहत देनी पड़ी थी। 
अब भी भाजपा का स्टैंड इस मामले में स्पष्ट है कि भले ही पावर पर्चेज एग्रीमैंट को रद्द करना पड़े या कोई नई नीति बनानी पड़े, किसी भी तरीके से बिजली के दाम कम करके जनता को राहत दी जानी चाहिए क्योंकि बिजली महंगी होती है तो इंडस्ट्री प्रभावित होती है। 

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प्र.: क्या सी.ए.ए. के समर्थन की मुहिम के लिए नेताओं को लक्ष्य दिए गए हैं?
उ.: मुझे लगता है कि बड़े नेताओं को बड़े उदाहरण पेश करने चाहिएं। मैंने अपने खुद के लिए अपने हलके से 25 हजार मिस कॉल करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और मुझे लगता है कि जो-जो नेता विधायक हैं या रह चुके हैं, उन्हें भी इसी तर्ज पर अपने हलके से 25,000 मिस कॉल करवाने चाहिएं। 

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प्र.: पार्टी में चल रही धड़ेबंदी को आप कैसे काबू करेंगे?
.: भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है और आंतरिक लोकतंत्र में सबको अपना पक्ष रखने का अधिकार है। जिसे पार्टी की धड़ेबंदी कहा जा रहा है वह असल में वैचारिक अंतर है और यह वैचारिक अंतर लोकतंत्र के लिए सुखद है और इस तरह के लोकतंत्र के चलते ही भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी है। 

प्र. : पंजाब सरकार के प्रदर्शन को आप किस तरीके से देखते हैं?
उ.: पंजाब में सरकार है कहां? सरकार ने पिछले 3 साल में अपने मैनीफैस्टो में किए गए वायदों में से एक भी वायदा पूरा नहीं किया। कांग्रेस ने आटा-दाल के साथ-साथ चीनी और चाय देने का वायदा किया था लेकिन उस वायदे के नाम पर गरीबों के साथ छल किया गया। पंजाब न तो नशामुक्त हुआ और न ही नई नौकरियां दी गईं। राज्य में रेत का अवैध कारोबार भी नहीं रुका और न ही युवाओं को स्मार्ट फोन मिले। सरकार ने किसानों को पूरा कर्ज माफ करने का वायदा किया था लेकिन वह भी अधूरा ही रहा।  राज्य का हर वर्ग सरकार से दुखी है और परिवर्तन के लिए उतावला है। 2022 में भाजपा अपने सहयोगी दल के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाएगी और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया जाएगा। 
 

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