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पंजाब लैंड लीजिंग एंड टैनैंसी बिल-2019 पर सब-कमेटी गठित

  • Updated on 7/31/2019

नई दिल्ली/अश्वनी। पंजाब (Punjab) मंत्रिमंडल ने प्रस्तावित पंजाब लैंड लीजिंग एंड टैनैंसी बिल-2019 (Punjab Land Leasing and Tenancy bill 2019) के सभी पक्षों का जायजा लेने के लिए एक कैबिनेट (Cabinate) सब-कमेटी गठित करने का फैसला किया है। साथ ही इस कमेटी के गठन और इसकी शर्तों व अवधि संबंधी फैसला करने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।  

मुख्यमंत्री (CM)ने वित्त मंत्री मनप्रीत बादल (Manpreet Singh Badal) को इस कमेटी का प्रमुख और सामाजिक सुरक्षा मंत्री अरुणा चौधरी व राजस्व मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ (gurpreet singh kangar) को मैंबर नियुक्त किया। इस बिल का उद्देश्य राज्य में कृषि वाली जमीन को पट्टे पर देने के मामले में बड़े सुधार लाना है। वहीं, भूमि मालिकों और काश्तकारों के अधिकारों व जिम्मेदारियों में संतुलन लाने के अलावा विवादों के निपटारों के लिए तेजी से अदालती आदेशों की प्रक्रिया मुहैया करवाना है। 

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भूमि पट्टे संबंधी कानून में पारदर्शता लागू करने का उद्देश्य भूमि मालिकों को अपनी जमीन छिनने के डर से बिना लिखित पट्टा/करारनामा करने के लिए आधार मुहैया करवाने के अलावा काश्तकारों (जमीन पट्टे पर लेने वालों) को भी जमीन संवारने के लिए लंबे समय के लिए निवेश करने की सुविधा मुहैया करवाना है। इसके साथ ही इनको कर्ज और सबसिडी के लिए भी सुविधा प्रदान करना है। हाल ही के सालों के दौरान खेती संबंधों में तबदीली आने के कारण यह बिल जरूरी बन गया है, क्योंकि इस तबदीली से रिवायती काश्तकारी की धारणा प्राथमिक रूप में व्यापारिक रूप में बदल गई है। पंजाब में जमीन पट्टे पर लेने में तेजी आई है। इसने काश्त वाले समूचे क्षेत्र को अपने घेरे में ले लिया है। इस समय कृषि वाली जमीन ठेके पर देने का काम ज्यादातर मौखिक होता है। 

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कृषि नीति के मसौदे पर कैबिनेट सब-कमेटी का गठन 
मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह ने पंजाब कृषि नीति के मसौदे का विस्तृत अध्ययन करने के लिए इसको भी कैबिनेट सब-कमेटी को सौंपने का फैसला किया है। यह मसौदा किसान आयोग द्वारा विभिन्न भाईवालों के सलाह-मशविरों के साथ तैयार किया गया है। मंत्रिमंडल की बैठक (Cabinet meeting) में इस मसौदे को अनौपचारिक विचार-विमर्श के लिए लाया गया। मसौदा पेश करते हुए किसान आयोग के चेयरमैन अजय वीर जाखड़ ने कहा कि कृषि नीति विचार-विमर्श और संशोधन के लिए खुली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने मसौदा देखा है और इसके कुछ उपबंधों की राजनीतिक अड़चनें होने के मद्देनजर कैबिनेट सब-कमेटी को इस नीति की जांच करके आगामी फैसला लेना चाहिए। यह नीति जल प्रबंधन, पशुधन के विकास, फसली विभिन्नता, वस्तु से अन्य वस्तुएं तैयार करने, सांझी जमीन, फसल मुआवजा फंड, शासन, विभागों और महकमों का विलय आदि मुद्दों पर केंद्रित है, जिससे कृषि पर निर्भर लोगों का जीवन स्थाई ढंग से सुधारने के साथ-साथ भावी पीढिय़ों के लिए वातावरण संतुलन कायम रखा जा सके।

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चिडिय़ाघरों की आय विकास सोसायटी के खाते में होगी जमा 
पंजाब मंत्रिमंडल ने राज्य के सभी चिडिय़ाघरों की प्रवेश टिकटों से होने वाली आय और अन्य साधनों से एकत्रित होने वाले राजस्व को पंजाब चिडिय़ाघर विकास सोसायटी के खाते में जमा करवाने की पुरानी प्रणाली को फिर से अमल में लाने का फैसला किया है। इस कदम से चिडिय़ाघरों के अन्य सभी साधनों जैसे कि कैंटीन, पार्किंग वाले स्थानों, वाहनों से एकत्रित होने वाला राजस्व और फूड कोर्ट व भविष्य में अन्य किसी भी स्रोत से होने वाली आय इस सोसायटी की खाते में जमा होगी। 

पोषण अभियान के अधीन प्रादेशिक प्रोजैक्ट प्रबंधन यूनिट होगा स्थापित
मंत्रिमंडल ने 6 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दूध पिलाने वाली माताओं का पौष्टिक स्तर सुधारने के लिए भारत सरकार के पोषण अभियान के अधीन प्रादेशिक प्रोजैक्ट प्रबंधन यूनिट (एस.पी.एम.यू.) स्थापित करने के लिए मंजूरी दे दी है। इस प्रोजैक्ट को लागू करने के लिए प्रादेशिक, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रोजैक्ट के लिए 184 पद भरने का भी फैसला किया है। इन पदों की अवधि 31 मार्च-2020 तक पोषण अभियान के काल से संबंधित होगी। 

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