Monday, Jan 27, 2020
punjab haryana goods will now reach gujarat port in 24 hours

पंजाब- हरियाणा का सामान अब 24 घंटे में पहुंचेगा गुजरात के बंदरगाह

  • Updated on 12/28/2019

नई दिल्ली/ सुनील पांडेय। दिल्ली के साथ हरियाणा और पंजाब के कारोबारियों के लिए अच्छी खबर है । वह अब रेवाड़ी से गुजरात के समुद्र तट तक 24 घंटे में अपना माल माल गाड़ी के जरिए भेज सकेंगे जो  वहां से बाहर के देशों में चला जाएगा। यह व्यवस्था मार्च 2020 से शुरू हो जाएगी। अब तक 3 दिन लगता था माल गाड़ियों के जरिए सामान भेजने एवं ले ले आने में।

मालवहन गलियारे के 306 किमी लंबे रेवाड़ी-मदार खंड  परिचालन के लिए खोल गया 
इसके लिए भारतीय रेलवे के पश्चिमी समर्पित मालवहन गलियारे (डीएफसी) के 306 किलोमीटर लंबे रेवाड़ी-मदार खंड को आज से परिचालन के लिए खोल दिया गया। करीब तीन माह तक इस खंड पर रोजाना लगभग 20 जोड़ी मालगाड़ियों का परीक्षण परिचालन चलेगा। इस गलियारे का औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किया जाएगा।

सौ किलाेमीटर प्रतिघंटा की गति और 80 टन प्रति वैगन माल लोड करके एक मालगाड़ी चलेगी
अजमेर जिले में डीएफसी के न्यू किशनगढ़ स्टेशन पर भारतीय समर्पित मालवहन गलियारा निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अनुराग सचान की मौजूदगी में 16 वैगन वाली मालगाड़ी को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया गया गया। गाड़ी को स्टेशन मास्टर रवीन्द्र शर्मा ने झंडी दिखाई। यह गाड़ी 75 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलायी गयी। आने वाले दिनों में सौ किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलायी जाएगी।

इस मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए डीएफसी प्रमुख अनुराग सचान ने कहा कि रेवाड़ी से पालनपुर 650 किलोमीटर के खंड का निर्माण कार्य मार्च 2020 में पूरा कर लिया जाएगा। इसी से साथ रेवाड़ी पालनपुर खंड पर मालगाड़ियों का नियमित रूप से वाणिज्यिक परिचालन शुरू हो जाएगा। माल ढुलाई के लिहाज पश्चिमी डीएफसी का यह खंड अति महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मुन्द्रा पिपावाब, कांडला एवं टूना बंदरगाह जुड़ जाएंगे। मदार-रेवाड़ी खंड के बारे  में उन्होंने बताया कि इस 306 किलोमीटर के खंड पर नियमित वाणिज्यिक परिचालन शुरू होने तक परीक्षण परिचालन के तौर पर रोज़ाना करीब 20 जोड़ी मालगाड़ियों को गुजारा जाएगा। इससे लाइन की क्षमता एवं संभावित श्रुटियों का आकलन किया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि दिसंबर 2020 तक वडोदरा के मकरपुरा तक की लाइन भी यातायात के लिए खोल दी जाएगी। जबकि मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) तक का काम दिसंबर 2021 तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि दादरी से जेएनपीटी 1500 किलोमीटर जब बनकर तैयार होगा तो रोज़ाना 120 डबल स्टेक कंटेनर वाली मालगाड़ियां चलायीं जा सकेंगी। मुंबई से दिल्ली से दूरी 24 घंटे में तय करेंगी। सौ किलाेमीटर प्रतिघंटा की गति और 80 टन प्रति वैगन माल लोड करके एक मालगाड़ी चलेगी। यह माल लगभग 1300 ट्रकों के सामान के बराबर होगा। इससे यह तय है कि माल ढुलाई की लागत में कमी आएगी।

कॉरिडोर से यह तय है कि माल ढुलाई की लागत में कमी आएगी
प्रबंध निदेशक अनुराग सचान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का है, उसमें डीएफसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। पश्चिमी डीएफसी एवं पूर्वी डीएफसी मिला कर करीब 2800 किलोमीटर का कार्य पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे का 80 प्रतिशत माल ढुलाई का काम डीएफसी के पास आ जाएगा। इसके बाद मौजूदा भारतीय रेल की लाइनों पर मालगाड़ियों का बोझ खत्म होगा। उनका अनुरक्षण हो सकेगा और नयी यात्री गाड़ियां तेजगति से चलायीं जा सकेंगी।

डीएफसी के वाणिज्यिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आठ मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क के प्रस्ताव मंजूर किये गये हैं। इन पर 15हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा। जाहिर है कि इससे रोज़गार एवं कारोबार के नये अवसर सृजित होंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि पश्चिमी डीएफसी के लिए जापान सरकार से छह अरब डॉलर का निवेश किया गया है।

इस ट्रैक पर कल से रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के विशेषज्ञों ने प्रारंभिक परिचालन परीक्षण किया था। इस परीक्षण के दौरान सीकर जिले के न्यू श्री माधोपुर स्टेशन पर भारतीय डीएफसी निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक (परिचालन) वेद प्रकाश एवं अन्य अधिकारी मौजूद थे। परीक्षण गाड़ी 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से गुजरी।

देश की GDP ग्रोथ को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी
DFC का बड़ा योगदान भारत की अर्थव्यवस्था पर होगा। यह माल ढुलाई को इतना सस्ता कर देगा. माना जा रहा है कि दिसंबर 2021 तक दोनों ही DFC के पूरी तरह ऑपरेशनल होने के बाद भारत का लॉजिस्टिक कॉस्ट 9% तक आ जायेगा। यह फिलहाल 15% के आसपास है।

भारत सरकार की योजना ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर के पूरा होने के बाद चारों महानगरों को आपस में जोड़ने वाले और डायगोनल के लिए कॉरिडोर बनाने की है। उम्मीद की जा रही है कि इससे भारत की जीडीपी 1 अंक तक आगे बढ़ सकती है। यानी पर्यावरण, ट्रैफिक जाम और अर्थव्यवस्था की कई समस्याओं का समाधान मालगाड़ियों के लिए बन रही इन रेल लाइनों से होगा।

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