Monday, Jun 14, 2021
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Punjab Haryana present plan for stubble disposal prevention from Pollution KMBSNT

इस साल पराली के प्रदूषण से बच सकेगी दिल्ली! पंजाब हरियाण ने पेश की ये योजना

  • Updated on 8/17/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिवाली नजदीक आ रही है और राजधानी में प्रदूषण की समस्या फिर बढ़ने की आशंका है। हर साल पराली जलाने को लेकर हंगामा होता है। इसके लिए हमेशा पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब को जिम्मेदार ठहराया जाता है। यही वजह है कि पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए अपनी कार्ययोजना पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) को सौंप दी है।

दिल्ली में प्रदूषण के लिए पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी बड़ा कारक होता है। राज्यों ने पराली के प्रबंधन के लिए अत्याधुनिक उपकरण खरीदने में असमर्थ किसानों को किराए पर कृषि मशीनें देने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना का प्रस्ताव दिया है। 

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दिल्ली प्रदूषण में पराली के धुएं का 44 प्रतिशत योगदान
इन मशीनों में पराली को दबाकर गांठ में बदल दिया जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक पिछले साल नवंबर में दिल्ली में वायु प्रदूषण में पराली के धुएं का योगदान 44% था। पंजाब सरकार ने पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) को बताया कि वह जैव इंधन आधारित बिजली संयंत्रों में पराली का इस्तेमाल कर रही है और विभिन्न जैव ईंधन आधारित और  सीएनजी परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

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सौर जैव इंधन परियोजना शुरू करने का प्रस्ताव
राज्य ने अब 25 मेगा वाट का सौर जैव इंधन परियोजना शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। पंजाब 7378 सीएचसी की स्थापना कर चुका है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस साल 5200 और सीएचसी स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक गांव में सीएचसी खोलने का लक्ष्य है। हरियाणा सरकार ने ईपीसीए को बताया है कि जैव सीएनजी और जैव इथेनॉल परियोजना और जैव इंधन संयंत्रों की प्रगति पर गौर करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। राज्य ने 2879 सीएचसी स्थापित किए हैं और इस साल अक्टूबर तक 2000 और केंद्र बनाए जाएंगे। 

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