Thursday, Aug 11, 2022
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सावधान! अब नहीं सुधरे तो अगले 30 वर्षों में सांस लेने योग्य नहीं रहेगा पंजाब

  • Updated on 10/31/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जिस गति से लगातार पंजाब और उससे सटे राज्यों में वायु की गुणवत्ता खराब होती जा रही है इस लिहाज से आने वाले 30 सालों में पंजाब में सांस लेना आपको काफी महंगा पड़ने वाला है। एक तरफ सड़कों लगातार बढ़ती गाड़ियों की संख्या और दूसरी तरफ किसानों द्वारा जलाए जाने वाला पराली वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। 

अलग-अलग राज्यों में किसानों द्वारा जलाए जाने वाले पराली के मामलों में कमी आती हुई नहीं दिखाई दे रही है। अभी हाल ही में सिर्फ पंजाब में ही 2300 से अधिक स्थानों पर पराली जलाए जाने के मामले सामने आए हैं। अगर इसे सही समय पर रोका न गया तो साल 2050 तक पंजाब सांस लेने योग्य नहीं रहेगा। एक वैज्ञानिक शोध में काफी चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।

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हवा में प्रदूषण संबंधी की गई रिसर्च दौरान यह बात सामने आई है कि अगर इसी प्रकार से फसलों की वेस्टेज जलाई जाती है तो वर्ष 2050 तक हवा दोगुना दूषित हो जाएगी और पंजाब सांस लेने योग्य राज्य नहीं रहेगा। शोधकत्र्ताओं के मुताबिक हवा में 2.5 पी.एम कणों को प्रादर्शी कातिल (धीमा जहर) माना जा सकता हैं, जिन्हें मनुष्य की स्वास प्रणाली फिल्टर नहीं कर सकती।

उक्त बारीक कण खून में मिलकर स्वास्थ खराब करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जब पराली जलाई जाती है तो आधे से अधिक मात्रा इन बारीक (2.5 पी.एम) कणों की होती है। पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीच्यूट ऑफ मैडिकल एजूकेशन एंड रिस्र्च (पी.जी.आई.एम.ई.आर) के पर्यावरण विज्ञानी डा. रविन्द्र कहिवाल ने इस संबंध में एक अभियान चलाया है जिसमें उन्होंने पंजाब में जलाई जाने वाली पराली का खाका तैयार किया है।

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रविन्द्र कहिवाल के मुताबिक उपग्रह की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि पंजाब में 2328 स्थानों पर पराली जलाई गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर पराली को आग लगाने का यह सिलसिला इसी तरह चलता रहा तो वर्ष 2017 के मुकाबले 2050 तक यह 45 फीसदी तक पहुंच जाएगा।

डा. कहिवाल ने बताया वर्ष 2017 में 488 मिलीयनटन फसल की वेस्टेज बची थी, जबकि इस दौरान वेस्टेज के मात्र चौथे हिस्से को ही जलाया गया था, जिसके कारण पूरे उत्तर भारत में कई दिनों तक स्मोग व धूएं के कारण आसमान में सफेद चादर पसरी रही थी। उन्होंने कहा कि अगर वेस्टेज के चौथे हिस्से को जलाने के इतने घातक नतीजे निकले हैं तो जल्द ही इसका समाधान तलाशने की जरूरत हैं।

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