Saturday, Nov 17, 2018

चाइना ओपन: क्वार्टर फाइनल में पहुंचे पीवी सिंधू और किदाम्बी श्रीकांत, रिकॉर्ड किया बराबर

  • Updated on 11/8/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पूर्व चैंपियन पीवी सिंधू और किदाम्बी श्रीकांत ने विपरीत अंदाज में जीत दर्ज करके गुरुवार को यहां चाइना ओपन विश्व टूर सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। ओलंपिक रजत पदक विजेता सिंधू ने महिला एकल के दूसरे दौर में थाईलैंड की बुसानन ओंगबामरंगफान को आसानी से 21-12, 21-15 से हराया। श्रीकांत ने पुरूष एकल में तीन गेम तक चले मैच में इंडोनेशिया के टॉमी सुगियार्तो को 10-21, 21-9, 21-9 से पराजित किया। 
 
तीसरी वरीयता प्राप्त सिंधू को अगले मुकाबले में आठवीं वरीय ही बिंगजियाओ से होगा जिनसे उन्हें कड़ी चुनौती मिल सकती है। सिंधू चीन की विश्व में सातवें नंबर की खिलाड़ी इससे पहले दोनों मुकाबलों में हार गयी थी और ऐसे में भारतीय खिलाड़ी कल बदला चुकता करने के लिये उतरेगी। सिंधू ने 2016 में यहां खिताब जीता था। पिछले सत्र में मांसपेशियों में खिंचाव के कारण इस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाने वाले श्रीकांत ने पुरुष एकल में 45 मिनट में जीत दर्ज की। 

वूमेन T20 वर्ल्ड कप: जीत से शुरुआत करने उतरेगी भारतीय महिला टीम, खिताब पर होगी नजर
 
गुंटूर के रहने वाले 25 वर्षीय श्रीकांत ने 2014 में चाइना ओपन का खिताब जीता था। उन्हें अब चीनी ताइपै के चोउ टियेन चेन का सामना करना है जिन्होंने इस साल जकार्ता एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। विश्व में नौवें नंबर के श्रीकांत पिछले तीन साल में दो बार चेन से पराजित हुए है। भारतीय खिलाड़ी केवल एक बार 2014 हांगकांग ओपन में चेन को हरा पाये हैं।

श्रीकांत ने रिकॉर्ड किया बराबर
बता दें कि, श्रीकांत को प्री क्वार्टर में मुश्किल चुनौती मिली। पहला गेम गंवाने के बाद भारतीय शटलर ने जोरदार वापसी करते हुए अपनी टूर्नामेंट में अपने उम्मीदों को बनाए रखा। श्रीकांत ने फ्रांस के लुकास कोर्वी को 35 मिनट में 21-12, 21-16 से हराकर प्रीक्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। क्वार्टर फाइनल में इंडोनेशिया के टॉमी पर मिली जीत के साथ श्रीकांत का उनके खिलाफ रिकॉर्ड 33 हो गया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.