Wednesday, Dec 08, 2021
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भारत बायोटेक के वैक्सीन पर उठे सवाल तो कंपनी चीफ ने कहा- हम 200% ईमानदार

  • Updated on 1/5/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश के औषधि नियामक ने रविवार (Sunday) को ‘कोविशील्ड’ के साथ ही स्वदेश विकसित ‘कोवैक्सीन’ के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दे दी। हालांकि, ‘कोवैक्सीन’ (Covaxin) की प्रभावशीलता और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त डाटा उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बहस छिड़ गई है। इस पर जमकर राजनीति भी हो रही है। मगर वैक्सीन का एक विज्ञान है। उससे जुड़ी कुछ चिंताएं हो सकती हैं पर इन पर हो रही राजनीति सिर्फ भ्रम फैला रही है।  

कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया धान खरीदी को बाधित करने का आरोप

नहीं है विश्वास
प्रख्यात वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने भी कहा है कि उन्हें विश्वास नहीं है कि अंतत: ‘कोवैक्सीन’ सुरक्षित साबित होगी और 70 प्रतिशत से अधिक प्रभावशीलता दिखाएगा। मंजूरी देने के लिए जो रवैया अपनाया गया है, उससे कुछ चिंताएं पैदा होती हैं। इस बहस पर सोमवार को अखिल भारतीय आयुॢवज्ञान संस्थान (एम्स) निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोवैक्सीन को केवल आपात स्थितियों में ‘बैकअप’ के रूप में मंजूरी दी गई है। भारत बायोटेक का यह टीका एक बैकअप अधिक है। 

कोवैक्सीन को मंजूरी पर उठे ये सवाल

  • प्रख्यात वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील का कहना है कि यह टीका है दवा नहीं है। यह स्वस्थ लोगों को दिया जाना है। ऐसे में यह कितना प्रभावी है और कितना सुरक्षित दोनों का डाटा बहुत जरूरी होता है। कोवैक्सीन का प्रभावी क्षमता का डाटा कहां है? 
  • ‘बैकअप’ के लिए मंजूरी क्या है? क्या इसका मतलब यह है कि यदि आवश्यक होगा, तो उस टीके का भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिसकी प्रभावी क्षमता ही प्रमाणित नहीं है? 
  • ऑल इंडिया ड्रग्स एक्शन नेटवर्क ने सवाल उठाया है कि जब कोई प्रभावी क्षमता का डाटा ही नहीं है तो आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव कैसे कह रहे हैं कि यह कोरोना के नए स्ट्रेन सहित वायरस के सभी प्रकारों पर कारगर होगा? 

भारत बायोटेक के जवाब, हम 200% ईमानदार

  •  कंपनी के एमडी कृष्णा एल्ला का कहना है कि हम सिर्फ भारतीय कंपनी नहीं हैं ग्लोबल कंपनी हैं। हमने 16 वैक्सीन बनाई हैं जो 123 देशों के लिए हैं। मुझे एक सप्ताह का समय दें ,मैं आपको पुष्ट आंकड़े दूंगा।
  •  एल्ला के अनुसार हम पर लांछन लगाना ठीक नहीं। हम ट्रायल में २००त्न ईमादार हैं। मेरेक इबोला वैक्सीन का ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल कभी पूरा नहीं हुआ, इसके बावजूद डब्ल्यूएचओ ने उसे लाइबेरिया और गीनिया के मरीजों पर आपात इस्तेमाल की  मंजूरी दी है।
  • एल्ला का कहना है कि पता नहीं क्यों भारतीय कंपनियों को ही दुनियाभर के लोग क्यों निशाना बनाते हैं, जबकि इमरजैंसी मेडिकल लाइसेंस जारी करना तो ग्लोबल प्रैक्टिस है।

राजनीति से बाज नहीं आ रहे नेता
आनंद शर्मा, शशि थरूर और जयराम रमेश सहित कांग्रेस के कुछ नेताओं ने रविवार को टीके को मंजूरी दिये जाने पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा था कि यह ‘अपरिपक्व’ है और खतरनाक साबित हो सकता है। इसके जवाब में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधा कि जब भी भारत कुछ प्रशंसनीय हासिल करता है, तो विपक्षी पार्टी ‘उपलब्धियों’ का ‘उपहास’ करने के लिए ‘बेबुनियाद सिद्धांत’ लेकर आती हैं। इस विवाद की शुरुआत सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के रविवार को यह कहने से ही हुई थी कि वह टीका नहीं लगवाएंगे।

'सवाल नहीं खड़ा किया'
सोमवार को उन्हें गलती का कुछ एहसास हुआ और उन्होंने सफाई दी कि ‘मैंने किसी भी वैज्ञानिक या टीका बनाने में मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति पर सवाल नहीं खड़ा किया है। हमने सिर्फ भाजपा पर सवाल खड़ा किया है, क्योंकि इस पार्टी ने जैसे फैसले लिए हैं, उन पर जनता को भरोसा नहीं है। हरियाणा के एक मंत्री  ने वैक्सीन लगवाई थी, बताइए उनके साथ बाद में क्या हुआ। 

अस्पताल जाकर बची जान
सरकारी अस्पताल उनका इलाज नहीं कर पाया तो निजी अस्पताल जाकर उनकी जान बची। कंग्रेस नेता राशिद अल्वी ने अखिलेश यादव के रुख का जिस तरह से समर्थन किया उसने इस मामले को और राजनीतिक तूल दे दिया। सोमवार को अल्वी ने कहा कि प्रधानमंत्री जिस तरह से सीबीआई, आयकर विभाग और ईडी का इस्तेमाल करते हैं, अखिलेश यादव का यह डर गलत नहीं है कि उसी तरह  वैक्सीन का भी गलत इस्तेमाल हो सकता है।

भाजपा ने भी कसा तंज
जब वैक्सीन पर राजनीति शुरू हो गई तो भाजपा भी कहां चूकने वाली थी। केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग छुपकर वैक्सीन लगवा लेंगे और लोगों को भ्रम में रखेंगे। वैक्सीन देश का है। वैज्ञानिक देश के हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी कहा कि   गंभीर मुद्दों पर राजनीति करना काफी निराशाजनक है। वैक्सीन को मंजूरी के लिए अपनाए गए प्रोटोकॉल पर कांग्रेस नेता सवाल उठाने की कोशिश न करें।

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