Saturday, Nov 17, 2018

#GovardhanPuja: प्रसन्न मन से मनाए लड्डू गोपाल को, जानिए पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

  • Updated on 11/8/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। गोवर्धन  को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। दिवाली के अगले दिन पड़ने वाले त्योहार पर  लोग घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत का चित्र बनाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करते हैं और परिक्रमा लगाते हैं। इस दिन भगवान को अन्नकूट का भोग लगाकर सभी को प्रसाद दिया जाता है।

गोवर्धन पूजा की महत्व के दिन गाय बैलों की पूजा की जाती है। इस पर्व को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सभी मौसमी सब्जियों को मिलाकर अन्नकूट तैयार किया जाता है और भगवान को भोग लगाया जाता है, फिर पूरे कुटुंब के लोग साथ में बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी उम्र और अरोग्य की प्राप्ति होती है। यहीं नहीं ऐसी भी कहा जाता है कि पर्व को प्रभाव से दरिद्रता का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।  

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ऐसा माना जाता है कि अगर इस दिन कोई मनुष्य दुखी रहता है तो साल भर दुख उसे घेरे रहते है, इसलिए सभी को चाहिए कि वे भगवान श्रीकृष्‍ण के प्रिय अन्नकूट उत्सव को प्रसन्‍न मन से मनाएं। इस दिन भगवान कृष्‍ण को नाना प्रकार के पकवान और पके हुए चावल पर्वताकार में अर्पित किए जाते हैं। इसे छप्पन भोग की संज्ञा भी दी गई है। इसी दिन शाम को दैत्‍यराज बलि के पूजन का भी विधान है।

पूजा तिथि और शुभ मुहूर्त 

  • गोवर्धन पूजा का प्रात: काल मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को सुबह 06 बजकर 39 मिनट से 08 बजकर 52 मिनट तक।
  • गोवर्धन पूजा का सांयकालीन मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को दोपहर 03 बजकर 28 मिनट से शाम 05 बजकर 41 मिनट तक।

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पूजा विधि

  • गोवर्धन पूजा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शरीर पर तेल लगाने के बाद स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें।
  • अब अपने ईष्‍ट देवता का ध्‍यान करें और फिर घर के मुख्‍य दरवाजे के सामने गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं।
  • अब इस पर्वत को पौधों, पेड़ की शाखाओं और फूलों से सजाएं। गोवर्धन पर अपामार्ग की टहनियां जरूर लगाएं।
  • अब पर्वत पर रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें।
  • अब हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए कहें: 

गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव: ।।

  • अगर आपके घर में गायें हैं तो उन्‍हें स्‍नान कराकर उनका श्रृंगार करें। फिर उन्‍हें रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। आप चाहें तो अपने आसपास की गायों की भी पूजा कर सकते हैं। अगर गाय नहीं है तो फिर उनका चित्र बनाकर भी पूजा की जा सकती है।
  • अब गायों को नैवेद्य अर्पित करें इस मंत्र का उच्‍चारण करें 

लक्ष्मीर्या लोक पालानाम् धेनुरूपेण संस्थिता।
घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु।।

  • इसके बाद गोवर्धन पर्वत और गायों को भोग लगाकर आरती उतारें।
  • जिन गायों की आपने पूजा की है शाम के समय उनसे गोबर के गोवर्धन पर्वत का मर्दन कराएं। यानी कि अपने द्वारा बनाए गए पर्वत पर पूजित गायों को चलवाएं, फिर उस गोबर से घर-आंगन लीपें. 
  • पूजा के बाद पर्वत की सात परिक्रमाएं करें।
  • इस दिन इंद्र, वरुण, अग्नि और भगवान विष्‍णु की पूजा और हवन भी किया जाता है।

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