बाबरी मस्जिद 26 साल: जानिए क्यों नरसिम्हा राव ने कर दिया था राष्ट्रपति तक को नजरअंदाज

  • Updated on 12/6/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश में कभी मंदिरों में महिलाओं की रोक को लेकर खबर सामने आती है तो कभी मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर पर, लेकिन धर्म से जुड़ा जितना बड़ा विवाद राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर चला आ रहा है, इतना बड़ा विवाद अब तक के इतिहास में देखने को नहीं मिला है।  

और जैसे जैसे दिसंबर पास आता है इस मामले से जुड़ी सारी यादें ताजा हो जाती है। साल 1992  6 दिसंबर इस दिन आयोध्या में कुछ ऐसा हुआ जिसका असर आज तक देखने को मिलता है। दरअसल उस दिन बाबरी मस्जिद को ढाह दिया गया था। लगभग 490 साल पुराने इस मामले में आज से सुप्रीम कोर्ट सुनवाई शुरू करने वाला है। 

इस घटना से जुड़ी सारी बाते तो हम सभी जानते ही है, लेकिन क्या आप जानते है कि नरसिम्हा राव इस विध्वंस को होने से रोक सकते थे।

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सबसे पहले शुरू करते है राव की उस दिन की  दिनचर्या से, आप सोच रहे होंगे की उनकी दिनचर्या से इस मामले का क्या तालुख है लेकिन जनाब इस घटना का और उनकी दिनचर्या का लेना देना है। 

Navodayatimes6 दिसंबर 1992 को नरसिम्हा राव सुबह सात बजे सोकर उठे थे हालांकि वो आमतौर पर इससे पहले ही उठ जाया करते थे। राव दिल के मरीज थे तो उनके डॉक्टर रेड्डी उनकी जांच करने के लिए राव के घर आए थे जांच करने के कुछ देर बाद रेड्डी वहां से चले गए। दोपहर 12 बजे रेड्डी ने जब  अपने घर का टेलीविजन खोला तो उन्होंने देखा की कई हजीर कारसेवक बाबरी मस्जिद के गुंबदों पर चढ़े हुए है। कुछ ही देर बाद पहले गुंबद को नीचे गिरा दिया गया था।

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रेड्डी को अचानक राव की चिंता हुई क्योंकि उनका हाल ही में दिल का ऑपरेशन हुआ था। रेड्डी दोबारा प्रधानमंत्री निवास पर गए। तब तक मस्जिद का एक ओर गुंबद भी गिरा दिया गया था। रेड्डी को देखकर राव गुस्से में आ गए और उनकी जांच की राव की ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था। इसके बाद शाम 6 बजे राव ने अपने निवास स्थान पर मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई। इस बात का जिक्र अर्जुन सिंह अपनी आत्मकथा 'ए ग्रेन ऑफ़ सैंड इन द आर ग्लास ऑफ़ टाइम' में लिखा है। पूरी बैठक में राव ने एक शब्द तक नहीं बोला। इस बैठक में जाफ़र शरीफ़ ने कहा इस घटना की देश, सरकार और कांग्रेस पार्टी को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इतना सुनते ही कांग्रेस के नेता माखनलाल फ़ोतेदार ने रोना शुरू कर दिया इसके बाद भी राव चुप ही बैठे रहे।  

Navodayatimesमाखनलाल फोतेदार ने कहा कि फोन कर राव से किया था ये आग्रह  

माखनलाल फ़ोतेदार ने अपनी आत्मकथा 'द चिनार कीव्स में लिखा है कि उन्होंने राव से फोन कर आग्रह किया था कि वो वायुसेना से कहें कि वो फैजाबाद में तैनात चेतक हैलिकॉप्टरों से अयोध्या में मौजूद कारसेवकों को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले चलवाएं। फ़ोतेदार ने आगे लिका है कि राव ने कहा मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं। हालांकि फ़ोतेदार ने कहा कि ऐसा स्थिति में केंद्र सरकार के पास पूरा हक होता है कि वो जो भी फैसला इसे सही लगता है वो ले सकती है। फ़ोतेदार ने राव से आग्रह किया कि राव जी एक गुंबद तो बचा लिजिए, ताकि बाद में उसे शीशे के केबिन में रख सके, और जनता को बता सके कि हमने मस्जिद को ढाहने से रोकने के लिए प्रयास किया था। इसक बाद राव ने फ़ोतेदार से कहा कि मैं आपको बाद में फोन करता हूं। 

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फोतेदार ने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री के इस व्यवहार से में बहुत आहात हुआ। इसके बाद फ़ोतेदार राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा को फोन कर उनसे मिलने की इच्छा जताई। उन्होंने चार बजे का समय दिया। जब फ़ोतेदार उनसे मिलने के लिए पहुंचे तो राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा उन्हें देखकर रोने लगे और बोले की पीवी ने ये क्या कर दिया। प्रधानमंत्री ने इसके बाद एक और बैठक बुलाई। जब फोतेदार बैठक में पहुंचे तो सब चुप थे, फोतेदार ने कटाक्ष करते हुए कहा क्या हुआ सबकी बोलती क्यों बंद है। 

इतने बोलते ही माधवराव सिंधिया ने कहा फ़ोतेदारजी आप तो पता नहीं है कि बाबरी मस्जिद गिरा दी गई है। तब फ़ोतेदार ने प्रधानमंत्री ने कहा कि राव जी क्या ये सही है। राव ने इसपर कोी जवाब नहीं दिया। तब कैबिनेट सचिव ने कहा कि हां ये सही है। फ़ोतेदार ने सारे कैबिनेट मंत्रियों के सामने राव से कहा कि इसके लिए वो ही जिम्मेदार है। उतने पर भी प्रधानमंत्री चुप ही रहे। 
 

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