Thursday, Mar 21, 2019

राफेल मामला: सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल के बाद भूषण ने भी दी दमदार दलीलें

  • Updated on 3/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राफेल विमान सौदे को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार पर कई कड़े सवाल दागे हैं। इसको लेकर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल सफाई देते हुए नजर आए। लोकसभा चुनाव से पहले राफेल मामले की सुनवाई केंद्र की मोदी सरकार के लिए अग्नि परीक्षा साबित हो रही है। 

AAP और BJP नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर दिल्ली को लेकर छिड़ी जंग

राफेल सौदे में कथित घोटाले के आरोपों को लेकर इन दिनों मोदी सरकार विपक्ष के हमले झेल रही है। सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार को पिछली सुनवाई में उस समय शर्मसार होना पड़ा था, जब अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि राफेल से जुड़े दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं। इसके दो दिन बाद सरकार ने हलफनामा दायर कर पलटी मारी और कहा कि दस्तावेज चोरी नहीं हुए हैं, बल्कि लीक हुए हैं। 

कांग्रेस ने किया यूपी, महाराष्ट्र के उम्मीदवारों का ऐलान, जानिए कौन कहां से लड़ेगा?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में आज जारी सुनवाई में अटॉर्नी जनरल ने आरटीआई एक्ट का हवाले देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इस पर न्यायमूर्ति जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार का आरोप लगता है तो जानकारी देनी ही पड़ती है। 

राफेल मामले में फजीहत के बाद मोदी सरकार ने SC में दायर किया हलफनामा

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश एसके कौल ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि अब आप दस्तावेज बदल रहे हैं और विशेषाधिकार की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन आपने ही सबूत पेश किए हैं। इसके उत्तर में वेणुगोपाल ने कहा कि हमने डॉक्यूमेंट्स पेश नहीं किए हैं, दूसरी पार्टी ने उजागर किए हैं। 

नई पेंशन स्कीम के खिलाफ केंद्र सरकार के कर्मियों ने किया प्रदर्शन

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि कैग की जो रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी, उसमें कुछ दस्तावेज नहीं थे। रिपोर्ट में शुरुआती 3 पेज नहीं थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि आप दस्तावेजों के विशेषाधिकार की बात कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए सही तर्क पेश करने होंगे।

प्रशांत भूषण ने भी दी दमदार दलीलें
याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने न्यायालय से कहा, राफेल सौदे में सरकार और सरकार के बीच कोई करार नहीं है, क्योंकि इसमें फ्रांस ने कोई संप्रभू गारंटी नहीं दी है। इसके साथ ही भूषण ने कहा कि भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम में पत्रकारों के सूत्रों के संरक्षण के प्रावधान हैं।  

  प्रियंका गांधी ने अस्पताल में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर से की मुलाकात, सियासत गर्म

राफेल के अलावा ऐसा कोई अन्य रक्षा सौदा नहीं है, जिसमें कैग की रिपोर्ट में कीमतों के विवरण को संपादित किया गया। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार कानून के प्रावधान कहते हैं कि जनहित अन्य चीजों से सर्वोपरि है और खुफिया एजेन्सियों से संबंधित दस्तावेजों पर किसी प्रकार के विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता। 

सपा-बसपा लोकसभा चुनाव में संयुक्त रैलियों के जरिए #BJP पर करेगी वार

भूषण ने न्यायालय से कहा कि राफेल के जिन दस्तावेजों पर अटार्नी जनरल विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं, वे प्रकाशित हो चुके हैं और सार्वजनिक दायरे में हैं।  इससे पहले सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कोई भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज प्रकाशित नहीं कर सकता। राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है।      
 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.