Thursday, Jun 17, 2021
-->
rage between bjp and left members in raas over koregaon bhima case

संसद में उठा भीमा कोरेगांव मामला वापस लेने का मुद्दा, BJP- लेफ्ट में तकरार

  • Updated on 12/4/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरेगांव भीमा घटना (Bhima Koregaon violence) से जुड़े आपराधिक मामले कथित तौर पर वापस लिए जाने के महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) के कदम का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में उठाए जाने पर भाजपा (BJP) और वाम दलों (Left parties) के सदस्यों के बीच तीखी तकरार हुई।  

उच्च सदन में शून्यकाल में भाजपा के जीवीएल नरसिम्हा राव ने पुलिस जांच का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में पुलिस की जांच के राजनीतिकरण के प्रयास हुए हैं जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होता है। राव ने कहा कि कोरेगांव भीमा मामले की जांच और खुलासों से पूरा देश हिल गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कुछ लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए।  

भीमा कोरेगांव: प्रकाश गजभिए ने उद्धव को लिखा पत्र, दलितों से केस वापस लेने की मांग की

केरल का मामला
भाजपा सदस्य ने कहा लेकिन अब, यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा करने की मांगें उठ रही हैं जो पूरी तरह राजनीतिक हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह राजनीतिकरण का प्रयास है। राव ने केंद्र से राज्य सरकारों को यह सलाह देने का अनुरोध किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा ही एक मामला केरल का भी है। इस पर वाम सदस्यों बिनोय विश्वम, के के रागेश और इलामारम करीम ने तत्काल विरोध जताया।

केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा की सरकार है। सभापति एम वेंकैया नायडू ने विरोध कर रहे वाम सदस्यों से शांत रहने की अपील की और राव से कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल का नाम न लें। हंगामा कर रहे वाम सदस्यों से नायडू ने कहा आप निर्देश नहीं दे सकते।

अनोखा मामलाः जानें, गौतम नवलखा केस से 5 जजों ने क्यों किया खुद को अलग

शून्यकाल में राजनीतिक बयान की अनुमति नहीं
सभापति ने यह भी कहा कि शून्यकाल में राजनीतिक बयान की अनुमति नहीं है। उल्लेखनीय है कि कोरेगांव भीमा युद्ध की 200वीं बरसी पर पिछले साल एक जनवरी को पुणे के समीप स्मारक पर लोग एकत्र हुए थे। जब भीड़ वापस जा रही थी उसी दौरान ङ्क्षहसा हुयी जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई थी।  

शून्यकाल में ही कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह, भाजपा के डॉ अशोक बाजपेयी, किरोड़ीलाल मीणा और डॉ डी पी वत्स, बीजद के प्रशांत नंदा, एमडीएमके सदस्य वाइको, मनोनीत शंभाजी छत्रपति और के टी एस तुलसी ने भी लोक महत्व से जुड़े अपने अपने मुद्दे उठाए।  

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.