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राहत इंदौरी की बेबाक शायरी का अंदाज था निराला, मोदी सरकार को भी नहीं बख्शा

  • Updated on 8/11/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मशहूर शायर राहत इंदौरी अब इस दुनिया में नहीं रहे। 70 वर्षीय इंदौरी कोरोना वायरस पॉजिटिव थे और उनका इलाज मध्य प्रदेश के इंदौर के अस्पताल चल रहा था। राहत इस खबर के साथ ही इंदौरी के परिवार में मातम छा गया है, वहीं देश में भी उनकी मौत पर संवेदनाएं जाहिर की रही हैं। राहत इंदौरी शायरी की दुनिया में अपना अलग ही मुकाम रखते थे। युवाओं के भी वह बहुत चहेते थे और अकसर कॉलेजों के समारोह में अपनी शायरी से हलचल मचा देते थे।

मशहूर शायर राहत इंदौरी नहीं रहे, कोरोना वायरस से थे संक्रमित

राहत इंदौरी का अंदाज तो निराला था ही, उनकी शायरी सत्ता पक्ष को भी हिला देती थी। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर भी इशारों-इशारों में शायराना कटाक्ष किए। सत्ता के खिलाफ बेबाकी से बोलने वाले इंदौरी को कई जलसों से भी दरकिनार किया गया। लेकिन, उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और अपने जज्बातों को जाहिर करते रहे। सीएए विरोधी प्रदर्शन को लेकर भी उन्होंने मोदी सरकार को अपनी शायरी से नहीं बख्शा।

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राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को हुआ था। राहत साहब के पिता रिफअत उल्लाह 1942 में सोनकछ देवास जिले से इंदौर आए था। राहत साहब का बचपन का नाम कामिल था, लेकिन बाद में इनका नाम बदलकर राहत उल्लाह किया गया। राहत इंदौरी का बचपन गरीबी में गुजरा। उनके वालिद ने इंदौर आने के दौरान ऑटो भी चलाया, मिल में भी काम किया। 

1939 से 1945 तक चलने वाले दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान राहत साहब के वालिद की छटनी में नौकरी भी चली गई। इसके बाद हालात इतने बिगड़ गए कि राहत साहब की फैमिली को बेघर होना पड़ा। इस दौरान राहत साहब ने कलम का दामन थाम लिया। अपनी बेबसी को लेकर उन्होंने शेर भी बयां किए। उन्होंने लिखा- अभी तो कोई तरक्की नहीं कर सके हम लोग, वही किराए का टूटा हुआ मकां है मिया।

 

 

 

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