Friday, Dec 03, 2021
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राहुल ने मोदी सरकार से पूछा- किसानों के प्रति बेपरवाही, सूट-बूट के साथियों से सहानुभूति क्यों?

  • Updated on 1/3/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi ) ने केंद्र की मोदी सरकार के 3 नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन की तुलना अंग्रेजों के शासन में हुए चंपारण आंदोलन से करते हुए रविवार को कहा कि इसमें भाग ले रहा हर किसान एवं श्रमिक सत्याग्रही है, जो अपना अधिकार लेकर ही रहेगा। गांधी ने ट्वीट कर आरोप लगाया, ‘‘देश एक बार फिर चंपारण जैसी त्रासदी झेलने जा रहा है। तब अंग्रेज ‘कम्पनी बहादुर’ था, अब मोदी-मित्र ‘कम्पनी बहादुर’ हैं।’’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आंदोलन में भाग ले रहा हर एक किसान-मजदूर सत्याग्रही है जो अपना अधिकार लेकर ही रहेगा। महात्मा गांधी ने 1917 में चंपारण सत्याग्रह का नेतृत्व किया था और इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक आंदोलन माना जाता है। किसानों ने ब्रिटिश शासनकाल में नील की खेती करने संबंधी आदेश और इसके लिए कम भुगतान के विरोध में बिहार के चंपारण में यह आंदोलन किया था। राहुल गांधी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं दे पाने वाली मोदी सरकार अपने उद्योगपति साथियों को अनाज के गोदाम चलाने के लिए निश्चित मूल्य दे रही है।’’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘सरकारी मंडियां या तो बंद हो रही हैं या अनाज खरीदा नहीं जा रहा। किसानों के प्रति बेपरवाही और सूट-बूट के साथियों के प्रति सहानुभूति क्यूँ?’’      कांग्रेस तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि नए कृषि कानूनों से खेती और किसानों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। कांग्रेस नए कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का समर्थन भी कर रही है।     

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उल्लेखनीय है कि गत बुधवार को छठे दौर की औपचारिक वार्ता के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के बीच बिजली शुल्कों में बढ़ोतरी एवं पराली जलाने पर जुर्माने के मुद्दों पर सहमति बनी थी, लेकिन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी को लेकर गतिरोध बरकरार है। हजारों किसान कड़ाके की ठंड के बावजूद एक महीने से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। 

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