Tuesday, Jan 25, 2022
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पेगासस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्साहित राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बोला हमला

  • Updated on 10/27/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पेगासस जासूसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक्सपर्ट कमेटी गठित करने के फैसले के बाद विपक्ष में उत्साह देखने को मिल रहा है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने अब मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। 

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राहुल गांधी ने कहा है, 'हमें खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मुद्दे पर विचार करना स्वीकार कर लिया है। हम इस मुद्दे को फिर से संसद में उठाएंगे। हम कोशिश करेंगे कि संसद में बहस हो। मुझे यकीन है कि भाजपा इस पर बहस करना पसंद नहीं करेगी।' पेगासस मामले में राहुल गांधी ने पूछा कि आखिर पेगासस स्पाइवेयर को भारत कौन लाया है और क्या इसका डेटा किसी और देश के पास भी है। कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट में मामला है, ऐसे में अब जेपीसी जांच की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'पेगासस देश पर और देश के संस्थानों पर एक हमला है। हम चाहते हैं कि कोर्ट में जांच हो रही है, लेकिन हम चाहेंगे कि संसद में इसपर चर्चा हो। 

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पेगासस को प्रधानमंत्री ने आदेश दिया है या गृह मंत्री ने दिया है। अगर प्रधानमंत्री ने हमारे ही देश पर किसी और देश से मिलकर हमारे देश पर आक्रमण किया है तो हम ये प्रधानमंत्री से सुनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के कोर्ट में जवाब ना दे पाने का मतलब यही है कि उन्होंने कुछ गलत किया है। यह सिर्फ राजनितिक मामला नहीं है, ये देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘संसद के पिछले सत्र के दौरान हमने यह मुद्दा उठाया था क्योंकि हमें लगा कि यह हमारे संविधान और लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला है। उच्चतम न्यायालय ने हमारे रुख का समर्थन किया है...यह एक अच्छा कदम है।’’

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उन्होंने यह भी कहा, ‘‘हम जो कह रहे थे, उच्चतम न्यायालय ने बुनियादी तौर पर उसका समर्थन किया है। हमारे तीन सवाल थे। पहला यह कि पेगासस को किसने खरीदा तथा इसे किसने अधिकृत किया? दूसरा यह है कि किनके खिलाफ इस स्पाईवेयर का इस्तेमाल किया गया? तीसरा यह कि क्या किसी अन्य देश ने हमारे लोगों के बारे में सूचना हासिल की, उनके आंकड़े लिये?’’     राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ इन सवालों का कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद हमने संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी। हमने संसद की कार्यवाही को इसलिए रोका क्योंकि यह हमारे देश और हमारे जीवंत लोकतंत्र को कुचलने एवं नष्ट करने का प्रयास है।’’ 

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उन्होंने यह आरोप भी लगाया, ‘‘यह भारत के विचार (आइडिया ऑफ इंडिया) पर हमला है। यह राजनीति पर नियंत्रण करने का प्रयास है। लोगों को ब्लैकमैल करने और उन्हें उनका काम नहीं करने देने का प्रयास है।’’ एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा, ‘‘हम इस मामले को फिर से संसद में उठाएंगे और इस पर चर्चा कराने का प्रयास करेंगे। पता है कि भाजपा चर्चा नहीं चाहेगी। लेकिन हम इस पर चर्चा चाहेंगे। हम चाहेंगे कि संसद में इस पर चर्चा अवश्य हो।’’     कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने दावा किया, ‘‘प्रधानमंत्री या गृह मंत्री ने इसे अधिकृत किया है। इन दो ही लोगों ने यह किया होगा। (नितिन) गडकरी ने यह नहीं किया होगा। किसी अन्य मंत्री ने यह नहीं किया होगा। अगर प्रधानमंत्री ने दूसरे लोगों के साथ मिलकर हमारे देश पर आक्रमण किया है तो उन्हें जवाब देना होगा। हम जानना चाहेंगे कि उन्होंने गैरकानूनी काम क्यों किए? वह देश से ऊपर नहीं हैं।’’ 

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जो आंकड़े आ रहे थे, वह क्या प्रधानमंत्री को मिल रहे थे ? अगर चुनाव आयुक्त और विपक्षी नेताओं के आंकड़े प्रधानमंत्री के पास जाएं तो फिर यह आपराधिक कृत्य है।’’  गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने इकाराइली स्पाईवेयर ‘पेगासस’ के जरिए भारत में कुछ लोगों की कथित जासूसी के मामले की जांच के लिए बुधवार को विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को निजता के उल्लघंन से सुरक्षा प्रदान करना जरूरी है और ‘‘सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा’’ की दुहाई देने मात्र से न्यायालय ‘‘मूक दर्शक’’ बना नहीं रह सकता।     प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया मौजूदा साक्ष्य ‘‘गौर करने योग्य प्रतीत होते हैं।’’ पीठ ने केन्द्र का स्वयं विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि ऐसा करना पूर्वाग्रह के खिलाफ स्थापित न्यायिक सिद्धांत का उल्लंघन होगा।     शीर्ष अदालत ने अपने पूर्व न्यायाधीश आरवी रवींद्रन से तीन सदस्यीय समिति के कामकाज की निगरानी करने का आग्रह किया और समिति से जल्द ही रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा।      

 

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