Tuesday, Jun 22, 2021
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कृषि कानूनों पर राहुल गांधी ने जारी किया 'खेती का खून', कहा- तीन- चार लोग चला रहे देश

  • Updated on 1/19/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्र सरकार (Central Government) के नए कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस लेने की मांग पर अड़े किसानों का आंदोलन 55वें दिन भी जारी है। ऐसे में किसान आंदोलन को लेकर कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) लगातार मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं। इस क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि देश को सिर्फ तीन-चार लोग चला रहे हैं। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों पर खेती का खून नाम से एक बुकलेट भी जारी किया।

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और दावा किया कि इन कानूनों से कृषि क्षेत्र पर तीन-चार पूंजीपतियों का एकाधिकार हो जाएगा और खेती की पूरी व्यवस्था आजादी से पहले की हालत में चली जाएगी। तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि वह 'देशभक्त' और 'साफ-सुधरे' व्यक्ति हैं और वे देश की रक्षा के लिए मुद्दे उठाते रहेंगे।

राहुल गांधी ने 'किसानों की पीड़ा' पर 'खेती का खून' शीर्षक से एक पुस्तिका भी जारी की। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'देश में एक त्रासदी पैदा हो रही है। सरकार इस त्रासदी को नजरअंदाज करना चाहती है और लोगों को गुमराह करना चाहती है। किसानों का संकट इस त्रासदी का एक हिस्सा मात्र है।'

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तीन-चार लोग ही प्रधानमंत्री के करीबी
कांग्रेस नेता ने दावा किया, 'हवाई अड्डों, बुनियादी ढांचे, दूरसंचार, रिटेल और दूसरे क्षेत्र में हम देख रहे हैं कि बड़े पैमाने पर एकाधिकार स्थापित हो गया है। तीन-चार पूंजीपतियों का एकाधिकार है। ये तीन-चार लोग ही प्रधानमंत्री के करीबी हैं और उनकी मदद करते हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि क्षेत्र अब तक एकाधिकार से अछूता था, लेकिन अब इसे भी निशाना बनाया जा रहा है। ये तीनों कानूनों इसीलिए लाए गए हैं।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'इससे पहले खेती में एकाधिकार नहीं था। इसका फायदा किसानों, मजदूरों, गरीबों और मध्यम वर्ग को मिलता था। खेती का पूरा ढांचा था जो इनकी रक्षा करता था। इसमें मंडियां, कानूनी व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा शामिल थे। अब फिर इस पूरे ढांचे को आजादी से पहले वाली स्थिति की तरफ ले जाने की कोशिश हो रही है।' राहुल गांधी ने कहा, 'नतीजा यह होगा कि तीन-चार लोग पूरे देश के मालिक बन जाएंगे। किसानों को उनकी उपज की वाजिब कीमत नहीं मिलेगी। बाद में मध्यम वर्ग को इसकी वो कीमत अदा करनी होगी, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी।'

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किसानों पर नहीं, मध्यम वर्ग और युवाओं पर हमला- राहुल
उन्होंने आरोप लगाया, 'ये कानून सिर्फ किसानों पर हमला नहीं हैं, बल्कि मध्यम वर्ग और युवाओं पर हमला हैं। युवाओं से कहना चाहता हूं कि आपकी आजादी छीनी जा रही है।' कांग्रेस नेता के मुताबिक, 'पंजाब और हरियाणा के किसान इस देश के रक्षक हैं। वे कृषि क्षेत्र को कुछ लोगों के हाथ में जाने से रोकने के लिए लड़ रहे हैं। सभी को इनका साथ देना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'सरकार को लगता है कि किसानों को थकाया जा सकता है और उनको बेवकूफ बनाया जा सकता है। किसान प्रधानमंत्री से ज्यादा होशियार हैं। समाधान एक ही होगा कि तीनों कानूनों को वापस लेना होगा।'

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नड्डा के सवालों का जवाब देने से किया इनकार
भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा के हमले पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'भट्टा परसौल में नड्डा जी कहां थे? किसानों का कर्ज माफ करने की बात आई तो कांग्रेस खड़ी थी। भूमि अधिग्रहण कानून कांग्रेस लेकर आई। उस वक्त नड्डा जी कहां थे? नड्डा जी कोई हिंदुस्तान के प्रोफेसर हैं कि उनकी हर बात का जवाब दूं। मैं हिंदुस्तान के लोगों और किसानों की बात का जवाब दूंगा।' इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'मैं साफ-सुथरा आदमी हैं। मैं नरेंद्र मोदी या किसी से नहीं डरता। ये मुझे छू नहीं सकते। हां, गोली मार सकते हैं। मैं देशभक्त हूं और देश की रक्षा करता हूं। आगे भी करता रहूंगा। पूरा देश एकतरफ होगा तो भी मैं अकेला खड़ा रहूंगा। मुझे फर्क नहीं पड़ता।'

केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को लेकर किसानों के साथ आज होने वाली 10वें दौर की बैठक टाली

किसानों और सरकार के बीच 10वें दौर की बैठक टली
नए कृषि कानूनों (New farm Laws) के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों का आज यहां पर 55वां दिन है। वहीं केंद्र सरकार ने आज किसानों के साथ होने वाली 10वें दौर की वार्ता को टाल दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने जानकारी दी है कि ये बैठक अब 20 जनवरी को होगी। इससे पहले सरकार और किसानों के बीच 15 जनवरी को हुई वार्ता बेनतीजा  रही थी। आज यानी 19 जनवरी को 10वें दौर की बैठक होने वाली थी जिसे ब कल यानी 20 जनवरी के लिए टाल दिया गया है। 

एक ओर ये मामला लंबा खिंचता जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर किसान अपना आंदोलन तेज करने तैयारी में है। सुप्रीम कोर्ट ने किसानों की 26 जनवरी पर प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाने से फिलहाल इंकार कर दिया है। संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला कानून व्यवस्था का है। फैसलसा दिल्ली पुलिस को करना है कि किसे राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश की अनुमति दें कि से नहीं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी कर दी है।

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रैली निकालना संवैधानिक अधिकार- किसान
आंदोलन कर रहे किसानों ने कहा कि ट्रेक्टर रैली निकालना उनका संवैधानिक अधिकार है। गौरतलब है कि किसानों ने 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने का ऐलान किया है। किसानों की प्रस्तावित रैली अथवा गणतंत्र दिवस समारोह एवं सभाओं को बाधित करने की कोशिश करें अन्य प्रकार के प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए केंद्र की याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि पुलिस के पास इस मामले से निपटने का पूरा अधिकार है।

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कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से क्या कहा
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबड़े, न्यायमूर्ति नागेश्वर राव  और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र से कहा कि क्या उच्चतम न्यायालय यह बताएगा कि पुलिस की क्या शक्तियां हैं और वह इनका इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? हम आपको यह नहीं बताने जा रहे कि आपको क्या करना चाहिए। 

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केंद्र ने कहा गणतंत्र दिवस के दिन रैली शर्मिंदगी का कारण
पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा कि हम इस मामले में 20 जनवरी को आगे सुनवाई करेंगे। पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल हम इस मामले की सुनवाई स्थगित कर रहे हैं और आपके पास इस मामले से निपटने का पूरा अधिकार हैय़ केंद्र ने दिल्ली पुलिस के जरिए दायर याचिका में कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह को

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