Monday, May 23, 2022
-->
rahul gandhi interact with abhijit banerjee on video conferencing today pragnt

राहुल गांधी से बातचीत के दौरान नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी ने सरकार को दिए ये सुझाव

  • Updated on 5/5/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस (Coronavirus) संकट के बीच कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने नोबल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के जरिए बातचीत की। इस दौरान राहुल गांधी ने उनसे कोरोना महामारी, लॉकडाउन (Lockdown) और देश की लुढ़कती अर्थव्यवस्था (Economy) को लेकर बातचीत की। इससे पहले उन्होंने आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से बातचीत की थी।

राहुल गांधी ने कहा, 'राज्यों को समस्या अपने तरीके से संभालने की छूट दी जानी चाहिए। वर्तमान सरकार का दृष्टिकोण थोड़ा अलग है। वो अपने हिसाब से चीजों को मैनेज कर उनका केंद्रीकरण करती है। मैं विकेंद्रीकरण पर जोर देता हूं।'

नोबेल विजेता अभिजीत से राहुल गांधी की बातचीत
राहुल गांधी ने अभिजीत बनर्जी से गरीब जनता पर COVID संकट, लॉकडाउन और आर्थिक तबाही के प्रभाव के बारे में चर्चा की। गांधी ने कहा कि हमें इसके बारे में कैसे सोचना चाहिए।

लॉकडाउन में शराब के ठेकों पर लंबी कतारें, कुमार विश्वास ने शाह से की ये गुजारिश

UPA शासन में भारत में नीतिगत ढांचा था
राहुल गांधी ने अभिजीत बनर्जी से पहला सवाल पूछा कि भारत में कुछ समय के लिए नीतिगत ढांचा था, खासकर UPA शासन में, जब गरीब लोगों के लिए एक प्लेटफार्म था। उदाहरण के लिए, मनरेगा, भोजन का अधिकार आदि और अब उसका बहुत कुछ उल्टा होने वाला है, क्योंकि हमारे सामने ये महामारी है और लाखों-करोड़ों लोग वापस गरीबी में जाने वाले हैं। इस बारे में कैसे सोचना चाहिए? 

इसके जवाब में अभिजीत बनर्जी ने कहा कि यूपीए के अंतिम वर्षों में विचार था- आधार योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना, जिसे इस सरकार ने भी स्वीकारा, ताकि उसका उपयोग पीडीएस और अन्य चीजों के लिए किया जा सके। आधार कार्ड के जरिए आप जहाँ भी होंगे, पात्र होंगे। इससे बहुत सारी मुसीबतों से बचा जा सकता है। आधार दिखाकर लोग स्थानीय राशन की दुकान पर पीडीएस का लाभ उठा पाते। वो मुंबई में इसका लाभ उठा सकते, चाहे उनका परिवार मालदा, दरभंगा या कहीं भी रहता हो। 

आरोग्य सेतु ऐप को लेकर राहुल गांधी के बाद खुफिया एजेंसी ने भी जताई चिंता

राहुल गांधी- लेकिन इनमें से बहुत से लोगों को छोटे और मध्यम व्यवसायों से अपनी नौकरी मिलती है, जिनको नकदी की समस्या होने जा रही है। और बहुत से व्यवसाय इस झटके के कारण दिवालिया हो सकते हैं। इसलिए इन व्यवसायों को होने वाले आर्थिक नुकसान और इन लोगों की नौकरी बनाए रखने की क्षमता के बीच सीधा संबंध है।

अभिजीत बनर्जी- वास्तव में इसे स्थगित करने के बजाय स्थायी रूप से रद्द किया जाए। ऐसा किया जा सकता था। लेकिन इससे परे, यह स्पष्ट नहीं है कि MSME पर ध्यान केंद्रित करना सही प्रणाली है। यह मांग को पुनर्जीवित करने का मसला है। हर किसी को पैसा दिया जाए, ताकि वो सामान खरीद सकें। तो MSME इनका उत्पादन करेगा। लोग खरीद नहीं रहे हैं। यदि उनके पास पैसा है या सरकार उन्हें पैसे देने का वादा करती है, तो आवश्यक नहीं कि अभी पैसा दिया जाए। रेड जोन में सरकार कह सकती है कि जब भी लॉकडाउन खत्म होने पर लोगों के खाते में ₹10,000 होंगे और वो इसे खर्च कर सकते हैं। अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए खर्च बढ़ाना सबसे आसान तरीका है। क्योंकि जब MSME को पैसा मिलता है, वे इसे खर्च करते हैं और फिर इसकी सामान्य Keynesian chain reaction होती है।

सोनिया गांधी ने अब प्रवासी मजदूरों के लिए जारी किया वीडियो संदेश, निशाने पर मोदी सरकार

राहुल गांधी- तो, हम NYAY जैसी योजना या लोगों को सीधे नकद हस्तांतरण के बारे में बात कर रहे हैं?

अभिजीत बनर्जी- बिलकुल। चाहे वो सबसे गरीब लोगों के लिए हो, वह चर्चा का विषय है। मैं इसे व्यापक स्तर पर देखूंगा... मुझे लगता है कि चिन्हित करना बेहद महंगा पड़ सकता है। इस संकट के समय में सरकार उनको चिन्हित करने की कोशिश करेगी, जो 6 सप्ताह तक अपनी दुकान बंद रखने के बाद गरीब हो गया है, मुझे नहीं पता कि वे इसे कैसे समझेंगे। निचले तबके की 60% आबादी को पैसा देने में कोई बुराई नहीं है। अगर सरकार उन्हें पैसा देती है, तो शायद उनमें से कुछ को इसकी जरूरत नहीं होगी। लेकिन वे इसे खर्च करेंगे, यदि वे इसे खर्च करते हैं, तो इसका अच्छा प्रभाव होगा। एकमात्र जगह जहां मैं अधिक आक्रामक हूं- मैं सबसे गरीब लोगों से आगे के लोगों की सोचूंगा। 

राहुल गांधी- तो, आप बड़े पैमाने की बात कर रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द मांग शुरू हो।

अभिजीत बनर्जी- बिलकुल। मैं ऐसा कह रहा हूं। मैं पहले भी कहता रहा हूं कि हमारे यहाँ मांग की समस्या है। अब यह समस्या बड़ी होने जा रही है। क्योंकि साधारण सी बात है, पैसे के अभाव में कुछ न खरीद पाने के कारण दुकानें बंद है, क्योंकि लोग भी खरीद नहीं रहे हैं।

राहुल गांधी- आपके अनुसार तेजी से काम करने की आवश्यकता है। जितनी तेजी से काम होगा, यह उतना ही प्रभावी होगा। हर पल की देरी वास्तव में नुकसानदायक है। 

अभिजीत बनर्जी- आप सही कह रहे हो, मैं नहीं चाहता कि सरकार हर किसी के हस्तक्षेप या उपयुक्त-अनुपयुक्त की जांच करें। जिन इलाकों में खुदरा व्यापार को बंद कर दिया है, वहाँ लोगों के खर्च करने की क्षमता बढ़ने से मांग और आपूर्ति असंतुलित हो जाएगी, इससे बचना चाहिए। बेहतर योजना बनाने की आवश्यकता है, ताकि जब लोग बाहर जा सकें, तो उनको पैसे मिलें, ताकि वो खरीद सकें। भले ही अभी नहीं, लेकिन पैसा मिलने का वादा हो, ताकि लोग घबराना और खुद को पूरी तरह भूखा रखना बंद कर दें, ताकि उनके पास थोड़ी बहुत बचत रहे। 

यदि लोगों को आश्वस्त किया जाए कि लॉकडाउन खत्म होने पर उनके हाथों में कुछ पैसा होगा। तो वे बहुत कम चिंतित होंगे। वे अपनी बचत में से खर्च करने के लिए तैयार होंगे।

राहुल गांधी- तो, जितना जल्दी लॉकडाउन से बाहर आ पाएंगे, उतना ही बेहतर होगा। अर्थव्यवस्था के एक हिस्से को शुरू करने के लिए एक रणनीति की आवश्यकता है। अन्यथा ये पैसा बेकार है।

अभिजीत बनर्जी- जितनी जल्दी लॉकडाउन से बाहर आ सकें, जाहिर है ये महामारी पर निर्भर करता है। महामारी के ज्यादा मामले आने पर सरकार लॉकडाउन नहीं खोलना चाहेगी। तो आप बिलकुल सही हैं। हमें महामारी की वास्तविकता के बारे में पता होना चाहिए।

राहुल गांधी- हमारे यहाँ अन्न आपूर्ति का मुद्दा थोड़ा अलग है। बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं। एक तर्क है कि गोदाम में जो अनाज है, उसे वितरित किया जाए, क्योंकि नई फसल के आते ही भंडारण बढ़ जाएगा, इसलिए उस पर तुरंत कदम उठाएं।

अभिजीत बनर्जी- रघुराम राजन और अमर्त्य सेन के साथ हमने जरूरतमंदों के लिए अस्थायी राशन कार्ड का विचार रखा था। जिसे जरूरत हो, उसे दिया जाए। आपूर्ति के आधार के रूप में उपयोग करें। हमारे पास पर्याप्त स्टॉक है। हम थोड़े समय तक इसे चला सकते हैं।

राहुल गांधी- केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण के बीच एक संतुलन है। प्रत्येक राज्य की अपनी विशेषताएं हैं। केरल कुछ अलग कर रहा है, यूपी कुछ अलग। लेकिन इसमें केंद्र सरकार की भी विशेष भूमिका है। इन दो विचारों के बीच तनाव को देखा जा सकता है।

अभिजीत बनर्जी- लॉकडाउन के मामले में भी, राज्यों को स्वतंत्रता देनी चाहिए। यानी राज्य लॉकडाउन करना चाहते हैं, तो वो अपने यहाँ लॉकडाउन की प्रकृति को समझकर लॉकडाउन करें। अगर राज्यों पर जिम्मेदारी आती है, तो वो इससे बेहतर तरीके से निपटेंगे।

राहुल गांधी- वर्तमान सरकार का दृष्टिकोण थोड़ा अलग है। वो इसे अपने नियंत्रण में रखना पसंद करती है। ये दो दृष्टिकोण हैं, जरूरी नहीं कि एक गलत और एक सही हो। मैं विकेंद्रीकरण पर जोर देता हूं।

अभिजीत बनर्जी- सबसे गरीबों तक पहुंचने के लिए अच्छी योजनाओं के प्रस्ताव के लिए पैसों की घोषणा करें और कुछ नया करके देखें। अधिकांश राज्यों में अच्छे एनजीओ हैं, जिन्हें उस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

राहुल गांधी- सामाजिक संरचना में इस तरह के फैसले लेने में जातीय प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

अभिजीत बनर्जी- इससे आगे बढ़कर अगर आप लोगों को नकद देना चाहते हैं। कुछ लोगों के पास जन धन खाता है और कुछ के पास नहीं। कुछ लोग मनरेगा सूची में हैं, जो नकदी प्राप्त करने का एक और तरीका है। बाहर रह गए लाखों लोगों की मदद कैसे कर सकते हैं। स्थानीय प्रशासन को कुछ संसाधन देने चाहिए, जो उन लोगों की पहचान करके मदद कर सके। हो सकता है इसमें कुछ गलत हो जाए। अगर हम जोखिम नहीं उठाएंगे, तो निश्चित रूप से मुश्किल में पड़ जाएंगे।

दिल्लीः जरुरतमंदों की मदद में जुटे BJP प्रदेश मंत्री, पहुंचाया राशन किट

राहुल गांधी- एक बार महामारी खत्म होने के बाद या अब से 6 महीने बाद गरीबी के नजरिए से आप इसे कैसे देखते हैं? जिस समय आर्थिक तंगी की संभावना है। वर्तमान समय की तुलना में मध्यम अवधि में आप इसे कैसे देखते हैं?

अभिजीत बनर्जी- दो चिंताएं हैं- दिवालिया होने के सिलसिले से कैसे बचें। हो सकता है कि बहुत सारे ऋण माफ करना एक तरीका है। अन्य है- मांग में कमी और लोगों के हाथों में कुछ नकदी पहुंचाकर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का सबसे अच्छा तरीका है। यूएस आक्रामक रूप से ऐसा कर रहा है। यदि वे इसे करने को तैयार हैं, तो हमें जरूर करना चाहिए। उन्होंने तय किया कि सिर्फ आर्थिक अस्तित्व के बचाव के लिए लोगों के हाथों में पैसा पहुंचाना होगा। मुझे लगता है हमें इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

राहुल गांधी- लोगों के दिमाग में यह बात डाली जा रही है कि मजबूत नेता ही वायरस से लड़ सकता है और जनमानस में ये बात डाली जा रही है कि एक व्यक्ति ही वायरस से लड़ सकता है।

अभिजीत बनर्जी- यह विनाशकारी है। अमेरिका और ब्राजील दो ऐसे देश हैं, जहाँ बुरी तरह गड़बड़ हो रही है। ये दो तथाकथित मजबूत नेता हैं, जो सब कुछ जानने का दिखावा करते हैं, लेकिन वे जो भी कहते हैं, वो हास्यास्पद होता है। अगर कोई "मजबूत व्यक्ति" के सिद्धांत पर विश्वास करता है, तो यह समय अपने आप को इस गलतफहमी से बचाने का है।

अभिजीत बनर्जी का संक्षिप्त प्रोफाइल
अभिजीत बनर्जी भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं और उन्होंने 2019 के लिए अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीता था। इन दिनों वह मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में प्रफेसर हैं। उनके साथ नोबेल पुरस्कार उनकी वाइफ एस्तेय डिफ्लो और एक अन्य अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर को भी मिला था। 1961 में जन्मे बनर्जी ने कोलकाता के साउथ पॉइंट स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की थी। बाद में वह प्रेसिडेंसी कॉलेज से 1981 में ग्रैजुएशन कर गए। 1983 में उन्होंने जेएनयू से एमए किया और फिर 1988 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी हासिल कर गए। 

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें...

वो 'हर्बल ड्रिंक' जिसे बताया जा रहा है कोरोना का इलाज

लॉकडाउन में नरमी के बाद कुछ देशों में तेजी से फैला कोरोना संक्रमण

डोनाल्ड ट्रंप की राह चले अरविंद केजरीवाल, क्या राजधानी में थमेगा Corona का कहर?

Lockdown 3.0 : दिल्ली में बाहर निकलने से पहले जान लें, क्या खुला और क्या है बंद?

ऑनलाइन बेचा जा रहा है कोरोना मरीजों के लिए ये स्पेशल खून, कीमत है 10 लाख

कोरोना मरीजों की स्किन पर ऐसे दिखता है वायरस का असर, पढ़ें रिपोर्ट

कोरोना से जंग जीते बोरिस जॉनसन ने कहा- मेरे मरने की घोषणा करने की डॉक्टरों ने कर ली थी तैयारी...

लॉकडाउन में भी बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए HRD मंत्री ने जारी किया वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर

कोरोना संकट के बीच दुनिया में हुए कुछ स्पेशल इनोवेशन, जानकार हैरान हो जायेंगे आप!

भारत में इलाज न मिलने से हो जाती है 10 में से 7 कैंसर मरीजों की मौत,पढ़ें और भी फैक्ट

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.