Sunday, Apr 18, 2021
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उत्तर- दक्षिण के फेर में पार्टी के भीतर ही अलग- थलग पड़े राहुल गांधी

  • Updated on 2/25/2021

नई दिल्ली (नवोदय टाइम्स)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी उत्तर-दक्षिण के अपने बयान को लेकर पार्टी के भीतर ही बुरी तरह घिरते दिख रहे हैं। भाजपा के हमलों से उन्हें बचाने की बजाए वरिष्ठ कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि अपने बयान को खुद राहुल गांधी ही स्पष्ट कर सकते हैं। भाजपा ने राहुल पर बांटो और राज करो की सियासत करने का आरोप लगाते हुए उत्तर भारतीयों के प्रति एहसान फरामोस और बाजे चना, थोथा घना बताया।

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राहुल गांधी ने केरल यात्रा के दौरान अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड़ में कहा कि पहले 15 साल मैं उत्तर भारत से सांसद रहा। इसलिए मुझे अलग तरह की राजनीति की आदत हो गई थी। केरल आना मेरे लिए नए तरह का अनुभव है। यहां लोग मुद्दों में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि गहनता से उस पर विचार करते हैं। राहुल के इस बयान पर भाजपा उत्तर बनाम दक्षिण बनाते हुए हमलावर है।

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राहुल पर क्षेत्रीयता को बढ़ावा देने और उत्तर भारतीयों का अपमान करने का आरोप लगा रही है। इस पर प्रतिक्रिया में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि राहुल ने अपने किसी अनुभव के आधार पर टिप्पणी की है, मुझे किसी क्षेत्र के अपमान की बात नहीं दिखती। राहुल गांधी ही स्पष्टीकरण दे सकते हैं। शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी क्षेत्र, भाषा और धर्म के आधार पर लकीर नहीं खींची। आनंद शर्मा के बयान को राहुल के लिए सलाह के तौर पर देखा जा रहा है।

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उनका बयान आने के बाद पार्टी के भीतर हलचल बढ़ गई। इसके बाद वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के यहां कुछ वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक हुई। बताया गया कि इस बैठक में आनंद शर्मा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी शामिल थे। इसके बाद कपिल सिब्बल की प्रतिक्रिया आई, जिसमें उन्होंने कहा कि भाजपा खुद बंटवारे की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि मतदाता चाहे उत्तर भारत का हो या फिर दक्षिण भारत का, वोट देने की उन्हें समझ है। मतदाता कहीं का भी हो, उसे इज्जत देनी चाहिए। राहुल के बयान पर उन्होंने कहा कि मैं कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहता।

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अपने बयान पर राहुल ही बता सकते हैं कि उन्होंने किस संदर्भ में संबंधित बात कही है। पहले शर्मा फिर सिब्बल के इस तरह राहुल के बयान से किनारा कर लेने को लेकर पार्टी के भीतर खलबली मची हुई है। आजाद, सिब्बल, शर्मा और हुड्डा उन 23 नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी हाईकमान को ऊपर से नीचे तक संगठन के चुनाव कराने को लेकर चिट्ठी लिखी थी। माना जा रहा है कि राहुल पार्टी के भीतर ही वरिष्ठ नेताओं की आंखों के किरकिरी बन चुके हैं। यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है, जब पार्टी का एक बड़ा धड़ा राहुल गांधी को दोबारा से कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के लिए लॉबिंग कर रहा है।

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मामले ने तूल पकड़ा तो कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला राहुल के बचाव में उतरे। उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी ने मुद्दों की राजनीति का आह्वान किया है। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी समेत भाजपा के तमाम नेताओं के बयान के जवाब में आरोप लगाते हुए सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा मुद्दों की राजनीति के आह्वान को भी उत्तर-दक्षिण के विभाजन के टूलकिट के तौर पर बेचने का कुत्सित प्रयास कर रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश में मुद्दों की राजनीति नहीं होनी चाहिए? क्या देश में राजनीति का धर्म नहीं होना चाहिए?

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क्या देश में एकीकरण की राजनीति नहीं होनी चाहिए? क्या देश में प्रेम और सद्भाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कहा कि देश के हुक्मरानों को रोजगार के बारे में बताना पड़ेगा, किसान क्यों आत्महत्या को मजबूर है, बताना पड़ेगा। लाखों किसान की पीड़ा को आप अनदेखा नहीं कर सकत, उन्हें थका कर भगा नहीं सकते, उसका समाधान निकालना पड़ेगा। इस देश में जीडीपी औंधे मुंह क्यों गिरी, यह बताना पड़ेगा। देश में चीन घुसकर क्यों बैठा है, ये बताना पड़ेगा और प्रधानमंत्री चीन से डऱते क्यों है।

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