क्या राफेल पर उड़कर राहुल गांधी पहुंच पाएंगे सत्ता के सिंहासन पर! जानिए पूरा मामला...

  • Updated on 2/9/2019

नई दिल्ली/ अमरदीप शर्मा। राफेल पर रण खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। राफेल हवा में उड़े उससे पहले कागज के राफेल खूब उड़ाए जा रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां जमकर सियासी रोटियां सेकने का काम कर रही हैं। इस विवाद को लेकर करीब एक साल का वक्त होने वाला है। लेकिन राफेल उड़ने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार इस मसले पर लगातार सफाई दे रही है तो राहुल आए दिन अपने तरकस से कोई नया हथियार निकाल कर ले आते हैं । जिससे वे इस मामले को जिंदा रख सकें। 

कई सारी चर्चाओं के बीच में प्रश्न उठता है कि क्या राहुल गांधी इस मामले को लोकसभा चुनाव तक जीवंत रखना चाहते हैं। जिससे वे राफेल पर सवार होकर सत्ता के सिंहासन  तक पहुंच सकें। पिछले कुछ दिनों से ये मामला शांत होता हुआ दिख रहा था। लेकिन एक बार फिर राहुल गांधी ने एक अखबार की खबर का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा। इससे साथ ही इस मामले को एक बार फिर हवा दे दी। राहुल गांधी लगातार कह रहे हैं कि देश का चौकीदार चोर है। 

राहुल ने लगाया आरोप...

शुक्रवार को राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता करके राफेल सौदे से जुड़े तथ्यों का जिक्र करते हुए एक बार फिर अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि ताजा तथ्यों से साफ है कि राफेल  सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय का हस्तक्षेप था अब उन्हें सिर्फ जेपीसी पर भरोसा है। बता दें कि एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित सरकारी दस्तावेज दावा कर रहा है कि रक्षा मंत्रालय ने राफेल सौदे के संदर्भ में रक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा था।

पत्र में रक्षा मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि प्रधानमंत्री कार्यकाल में राफेल सौदे में समानांतर बातचीत से रक्षा मंत्रालय की नेगोशिएशन टीम की कोशिशों को धक्का लग सकता है। मंत्रालय की तरफ से रक्षा मंत्री को गए इस पत्र को मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी एसके शर्मा ने 24 नवंबर 2015 को जारी किया और इस पत्र को मंत्रालय में रक्षा सौदों के लिए जिम्मेदार डायरेक्टर जनरल एक्विजिशन की सहमति थी।

रक्षामंत्री का जवाब...

राहुल के इन आरोपों का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मीडिया में फाइल नोटिंग को पूरी तरह नहीं प्रकाशित किया गया है। तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने रक्षा सचिव की फाइल नोटिंग का स्पष्ट जवाब दिया था। लिहाजा इस संदर्भ में तत्कालीन रक्षा मंत्री का जवाब बेहद अहम है जिसे न तो प्रकाशित किया गया और न ही विपक्ष ने उठाया। इसके साथ ही रक्षामंत्री ने अखबार को भी पूरी जानकारी छापने की नसीहत दी। 

इसके अलावा निर्मला सीतारमण ने कहा कि मनोहर पर्रिकर ने अपनी फाइल नोटिंग में रक्षा सचिव से साफ-साफ कहा कि मामले में शांत रहने की जरुरत है क्योंकि ये सही दिशा में चल रहा है किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं है। सीतारमण ने कहा कि अगर किसी मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय कोई जानकारी चाहता है तो उसे हस्तक्षेप नहीं कहा जा सकता।  सीतारमण ने कहा कि विपक्ष को मल्टीनेशनल कंपनियों की युद्ध नीति से प्रेरित है औप वह महज राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति कर रहे है। 

सुप्रीम कोर्ट से मिली थी हरी झंडी...

जब राफेल मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट ने कहा कि इस मामले से जुड़ी जानकारी हमें मुहैया कराएं जिसके बाद फैसला किया जाएगा कि आखिर मामले में कितनी सच्चाई है। इस पर 14 दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। इसके साथ ही कहा कि लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश इन विमानों के बगैर नहीं रह सकता है। इसके बाद लगने लगा कि शायद अब राहुल के हाथ से ये मुद्दा फिसल गया। हालांकि एक बार फिर राहुल ने इसे गरमाहट दे दी है। 

अध्यादेश के दैरान राहुल ने कहा था...

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकतंत्र के मंदिर यानि संसद भवन में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान होने वाली बहस में भरी लोकसभा में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। राहुल गांधी ने कहा था कि फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान राफेल को लेकर हुई डील में बड़ा घोटाला हुआ है।

इसके साथ ही उन्होंने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को भी कटघरे में खड़ा कर दिया था। मामला इतने पर शांत नहीं हुआ राहुल के बयान के बाद पूरा विपक्ष एकजुट होकर सरकार पर निशाना साधता रहा। बात संसद भवन के बाहर आ गई। चुनावी गलियारों में भी राफेल का शोर गूंजने लगा। राहुल गांधी हरेक सभा में राफेल का नाम लेना नहीं भूल रहे थे।

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