Monday, Jan 24, 2022
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कृषि कानूनों पर राहुल गांधी बोले- लोग पीएम मोदी की बातों पर विश्वास करने को तैयार नहीं

  • Updated on 11/21/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि अतीत में ‘झूठे जुमले’ झेल चुके लोग कृषि कानूनों को निरस्त करने के प्रधानमंत्री के बयान पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद भी किसान संघों के दिल्ली की सीमाओं पर अपना आंदोलन जारी रखने की बात कहने के बाद राहुल गांधी की यह टिप्पणी आई है। 

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गांधी ने ट्वीट में कहा, ‘‘झूठे जुमले झेल चुके लोग प्रधानमंत्री की बातों पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं। किसान सत्याग्रह जारी है।’’ तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान पिछले लगभग एक साल से दिल्ली की सीमाओं पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान संघों ने कहा है कि जब तक संसद द्वारा तीनों कृषि कानूनों को निरस्त नहीं किया जाता और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैधानिक गारंटी पर कानून नहीं लाया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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लोगों को सरकार के फैसले पर भरोसा नहीं है : दिग्विजय 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत केन्द्र सरकार द्वारा विवादास्पद तीन कृषि कानून वापस लेने के फैसले के दो दिन बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को कहा कि अब भी लोगों को केन्द्र सरकार के इस निर्णय पर भरोसा नहीं है, क्योंकि भाजपा के कई लोग कह रहे हैं कि इन कानूनों को फिर से लाया जाएगा।     सिंह ने यह भी दावा किया कि अब भी केन्द्र की सरकार में केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ही निर्णय करते हैं और पूरे मंत्रिमंडल में संवादहीनता की स्थिति है, जो संसदीय लोकतंत्र के विपरीत है। 

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दिग्विजय ने यहां बातचीत करते हुए कहा, ‘‘‘तीनों कृषि कानून वापस लेने का काम देर से हुआ है, लेकिन इस अवधि में 700 से ज्यादा किसानों की मौत हो गई है। इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? अब भी लोगों को इस निर्णय पर भरोसा नहीं है, क्योंकि भाजपा के कई लोग कह रहे हैं कि इन कानूनों को फिर से लाया जाएगा।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए जब तक किसानों की मांग के मुताबिक संसद में निर्णय नहीं होता है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की अनिवार्यता नहीं होती है, तब तक भरोसा नहीं होगा।’’  दिग्विजय ने कहा, ‘‘केन्द्र सरकार में संवादहीनता की स्थिति है। मंत्रिमंडल में ही संवादहीनता है। पूरी सरकार में केवल नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ही निर्णय लेते हैं, जो लोकतंत्र के ठीक विपरीत है। हमने संसदीय लोकतंत्र को अपनाया है और उसमें प्रधानमंत्री और दूसरे मंत्री सभी बराबर हैं। केवल प्रधानमंत्री नंबर एक हैं, इसलिए सभी से चर्चा करके निर्णय़ लिया जाना चाहिए।’’  

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