Wednesday, Jan 26, 2022
-->
rahul-gandhi-said-pm-modi-is-helping-industrialists-instead-of-poor-rkdsnt

राहुल गांधी बोले- गरीबों की बजाय उद्योगपतियों की मदद कर रहे हैं पीएम मोदी 

  • Updated on 4/1/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के करोड़ों गरीबों को सशक्त बनाने की बजाय कुछ बड़े उद्योगपतियों की मदद कर रहे हैं। केरल विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के प्रचार के लिए अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड पहुंचे कांग्रेस नेता ने यह भी कहा, ‘‘प्रधानमंत्री का मानना है कि अगर आप बड़े कारोबारों में पैसे लगाएंगे तो अर्थव्यवस्था गति पकड़ लेगी। लेकिन होता यह है कि ये सब बड़े कारोबारी पैसे खुद ले लेते हैं।’’ 

आरएसएस के गढ़ नागपुर में कोरोना का कहर, 60 संक्रमितों की मौत

उन्होंने वायनाड के मनन्थावडी और सुल्तान बतेरी इलाकों में रोडशो भी किया। कलपेटा में आयोजित एक चुनावी सभा में राहुल गांधी ने दावा किया कि उनकी पार्टी के पास आॢथक संकट को दूर करने का समाधान है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘केरल की अर्थव्यवस्था चालू करने के लिए हम ‘न्याय’ का विचार दे रहे हैं। इससे न सिर्फ गरीबों को मदद मिलेगी, बल्कि केरल की अर्थव्यवस्था गति पकड़ लेगी तथा नौकरियों का सृजन आरंभ हो जाएगा।’’ 

अंबानी सुरक्षा मामला: NIA ने मुंबई के क्लब पर मारा छापा

गांधी ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर ‘न्याय’ योजना के तहत गरीब लोगों के खातों में प्रति माह छह हजार रुपये डाले जाएंगे। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘कांग्रेस का मानना है कि अगर आपको अर्थव्यवस्था को गति देना है तो गरीब लोगों, करोड़ आम लोगों के हाथ में पैसे देने होंगे।’’ कांग्रेस नेता ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने तीनों कानून पारित करवाएं हैं। हमें इसके खिलाफ लडऩा होगा।’’ 

यूपी पंचायत चुनाव: गाजियाबाद में 161 ग्राम प्रधानों के निर्वाचन के लिए 15 अप्रैल को वोटिंग

वायनाड से लोकसभा सदस्य ने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है कि फिर से वायनाड की सोच को वापस लाया जाए और इसका कोई कारण नहीं है कि यह स्थान फिर से दुनिया में मसाले की राजधानी की पहचान हासिल करे। गौरतलब है कि केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों के लिए छह अप्रैल को मतदान होना है।

 

यहां पढ़े अन्य बड़ी खबरें... 

comments

.
.
.
.
.