Thursday, Aug 18, 2022
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रिहाई के लिए छटपटाते स्टेन स्वामी की मौत पर विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा

  • Updated on 7/5/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 84 वर्षीय आदिवासी नेता स्टेन स्वामी की मृत्यु पर विपक्षी दलों ने नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर महबूबा मुफ्ती ने स्टेन स्वामी की मौत पर अफसोस जाहिर किया है। बता दें कि ऐल्गार परिषद माओवादी संबंध मामले में आरोपी, जेसुइट पादरी स्टेन स्वामी की सोमवार को मृत्यु हो गयी है। स्वामी का इलाज जिस अस्पताल में चल रहा है, उसके अधिकारी ने बंबई उच्च न्यायालय को इस आशय की जानकारी दी। उच्च न्यायालय के जस्टिस एस. एस. शिंदे और जस्टिस एन. जे. जामदार की खंड पीठ को बांद्रा स्थित होली फैमिली अस्पताल के निदेशक डॉक्टर इयान डि’सूजा ने बताया कि 84 वर्षीय स्वामी का निधन दोपहर 1:30 बजे हुआ। 

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महबूबा मुफ्ती ने कहा - कठोर और निर्दयी सरकार 
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 84 वर्षीय आदिवासी नेता स्टेन स्वामी की मृत्यु पर सोमवार को आश्चर्य जताते हुए कहा कि ‘‘कठोर और निर्दयी’’ सरकार ने उन्हें उनके सम्मान से वंचित कर दिया और वह उनकी मौत के लिए जिम्मेदार है। महबूबा ने ट्वीट किया है, ‘‘आदिवासी नेता 84 वर्षीय स्टेन स्वामी की मृत्यु से बहुत दुखी हूं। कठोर और निर्दयी सरकार ने उनके जीवित रहते उनसे उनका सम्मान छीन लिया और वही उनकी मृत्यु के लिए जिम्मेदार है। बहुत आश्चर्यचकित हूं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।’’  

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स्टैन स्वामी न्याय और मानवीयता के हकदार थे: राहुल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फादर स्टैन स्वामी के निधन पर दुख जताते हुए सोमवार को कहा कि वह न्याय और मानवीयता के हकदार थे। एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी पादरी स्टैन स्वामी का एक अस्पताल में निधन हो गया। स्वामी का जिस अस्पताल में उपचार चल रहा था, उसके एक अधिकारी ने बंबई उच्च न्यायालय को सोमवार को इस बारे में बताया। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘फादर स्टैन स्वामी के निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि। वह न्याय और मानवीयता के हकदार थे।’’ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा, ‘‘फादर स्टैन स्वामी को विनम्र श्रद्धांजलि। कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक व्यक्ति जिसने जीवन भर गरीबों-आदिवासियों की सेवा की और मानव अधिकारों की आवाज बना, उन्हें मृत्यु की घड़ी में भी न्याय एवं मानव अधिकारों से वंचित रखा गया।’’ 

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स्टैन स्वामी के निधन से दुखी और आक्रोशित हूं: येचुरी 
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने सोमवार को कहा कि वह फादर स्टैन स्वामी के निधन से दुखी और आक्रोशित हैं। येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘फादर स्टैन स्वामी के निधन से बहुत दुखी और आक्रोशित हूं। वह एक पादरी और सामाजिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने कमजोरों की अथक सहायता की। अधिकनायकवादी गैर कानूनी गतिविधियां नियंत्रक अधिनियम (यूएपीए) के तहत उन्हें हिरासत में लिया गया और आमनवीय व्यवहार किया गया, जबकि उन पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ था।’’ उन्होंने कहा कि ‘हिरासत में हुई इस हत्या’ के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।     

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भारी उदासीनता के लिए केन्द्र जवाबदेह: सोरेन 
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को पादरी स्टैन स्वामी के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन का समाचार हृदयविदारक है। सोरेन ने कहा कि स्टैन स्वामी के प्रति उदासीनता के लिए केन्द्र सरकार जिम्मेदार है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सामाजिक कार्यकर्ता, आदिवासियों के अधिकार के लिए संघर्ष करने के लिए जाने जाने वाले स्टैन स्वामी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी पादरी स्टैन स्वामी का सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत का इंतजार कर रहे थे। 

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सोरेन ने एक ट्वीट में आरोप लगाया, ‘‘स्टैन स्वामी के प्रति भारी उदासीनता के लिए केन्द्र सरकार को ही जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’ सोरेन ने कहा, ‘‘फादर स्टैन स्वामी के निधन का समाचार सुनकर पूरी तरह हतप्रभ हूं। उन्होंने आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ते हुए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने उनकी गिरफ्तारी और उन्हें जेल में रखने का कड़ा विरोध किया था। केन्द्र सरकार को स्वामी के प्रति घोर उदासीनता एवं उन्हें समय से इलाज की सुविधा न प्रदान करने के लिए पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अंतत: इसी के चलते उनकी आज मौत भी हो गयी।’’      

 

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