Wednesday, Oct 27, 2021
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हर्ष मंदर से जुड़े बालगृह पर छापामारी- NCPCR ने दिल्ली हार्कोर्ट में किए चौंकाने वाले खुलासे

  • Updated on 7/28/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में हर्ष मंदर से जुड़े बालगृहों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। आयोग ने कोर्ट को बताया कि बालगृह प्रबंधन की ओर से विभिन्न उल्लंघनों और विसंगतियों का पता लगाने के बाद ही कार्यकर्ता हर्ष मंदर से जुड़े दो बाल गृहों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

एनसीपीसीआर ने कोर्ट को अपने जवाब में जिन उल्लंघनों के बारे में बताया है उनमें से एक ये है कि उन्हें बच्चों ने ही बताया कि उन्हें जंतर-मंतर सहित विरोध स्थलों पर ले जाया गया है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि एनसीपीसीआर की निरीक्षण रिपोर्ट को रद्द करने के लिए सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (सीईएस), जहां मंदर एक निदेशक हैं, द्वारा संचालित दो बच्चों के घरों द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में जवाब प्रस्तुत किया गया था।

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'कई उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताएं पाई गई'
एनसीपीसीआर ने जवाब में कहा है कि निरीक्षण के दौरान, प्रथम दृष्टया, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और इसके मॉडल नियम, 2016 के कई उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं सहित कई अन्य अनियमितताएं संज्ञान में आईं। संस्थान उनके बारे में खुलासा नहीं कर रहा था।

एनसीपीसीआर ने अपने जवाब में आगे कहा कि एक कलिंग राइट्स फोरम से एक शिकायत मिली थी, जिसमें दोनों घरों में किशोर न्याय अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि "केवल एक विशेष धर्म" के बच्चों को घरों में रखा जा रहा था और सीईएस को "भारी धन" प्राप्त हो रहा था, जिसका उपयोग "धार्मिक रूपांतरण जैसी अवैध गतिविधियों के लिए" किया जा रहा था। 

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'हर्ष मंदर की प्रतिष्ठा को खराब करने के प्रयास'
बता दें कि जनवरी 2021 में एक रिपोर्ट में, एनसीपीसीआर ने कहा कि निरीक्षण के दौरान, उसने दोनों घरों में किशोर न्याय अधिनियम के कई उल्लंघन और अन्य विभिन्न अनियमितताओं को देखा, जिसमें लड़कों के लिए घर पर बाल यौन शोषण के मामले भी शामिल थे। सीईएस ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि र इसके निदेशक हर्ष मंदर की प्रतिष्ठा को खराब करने के प्रयास के लिए ये सब आरोप लगाए जा रहे हैं। 

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