Monday, Jun 27, 2022
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रेलवे के निजीकरण को लेकर रेल मंत्री वैष्णव ने सरकार का रुख किया साफ

  • Updated on 3/16/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को स्पष्ट किया कि रेलवे के निजीकरण का कोई प्रश्न ही नहीं है और इस बारे में कही गई सारी बातें ‘काल्पनिक’ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की दृष्टि में ‘रणनीतिक क्षेत्र’ के रूप में रेलवे की सामाजिक जवाबदेही है जिसे वाणिज्यिक व्यवहार्यता पर ध्यान देते हुए पूरा किया जा रहा है। ‘वर्ष 2022-23 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा’ का जवाब देते हुए रेल मंत्री ने कहा, ‘‘रेलवे के निजीकरण का कोई प्रश्न ही नहीं है। इस बारे में कही गई बातें काल्पनिक हैं। ’’ 

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उन्होंने कहा कि रेलवे का निजीकरण नहीं हो सकता है क्योंकि पटरियां रेलवे की हैं, इंजन रेलवे के हैं, स्टेशन और बिजली के तार रेलवे के हैं। इसके अलावा डिब्बे और सिग्नल प्रणाली भी रेलवे की ही हैं। वैष्णव ने कहा कि उनके पूर्ववर्ती पीयूष गोयल भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि रेलवे का ढांचा जटिल है और इसका निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मालगाडिय़ों का भी निजीकरण नहीं किया जा रहा है। रेल मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार की ²ष्टि में ‘रणनीतिक क्षेत्र’ के रूप में रेलवे की सामाजिक जवाबदेही है। इसका अब तक पालन किया गया और आगे भी किया जायेगा। इसे वाणिज्यिक व्यवहार्यता पर ध्यान देते हुए पूरा किया जा रहा है।’’  

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गौरतलब है कि इस विषय पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने सरकार पर रेलवे के ‘निजीकरण’ की ओर कदम बढ़ाने और सिर्फ मुनाफा कमाने पर ध्यान देने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को लोकसभा में कहा था कि सरकार की ओर से रेल आधुनिकीकरण की बात करना सिर्फ ‘दुष्प्रचार’ है। रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे की सामाजिक जवाबदेही पर ध्यान दें तब स्पष्ट होगा कि हम 60 हजार करोड़ रूपये की सब्सिडी दे रहे हैं। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ‘वर्ष 2022-23 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों’ को मंजूरी प्रदान कर दी। वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन से रेल से जुड़ा रहा है, वह रेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि आज रेलवे किस मोड़ पर है, यह जानने के लिए हमें पीछे जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले जैसी नीतिगत पंगुता थी, उसका प्रभाव रेलवे पर भी था। 

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रेल मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले रेलवे में निवेश की कमी एवं नजरिये की दिशाहीनता थी, साथ ही प्रौद्योगिकी में बदलाव नहीं हो पा रहा था, कर्मचारियों में विभागीय प्रतिस्पर्धा थी और इसके कारण रेलवे लगातार बाजार में हिस्सेदारी खोता जा रहा था। सरकार के कदमों का उल्लेख करते हुए रेल मंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार बनने के बाद सबसे पहले सफाई पर ध्यान दिया गया। इसके बाद जमीनी कार्यालयों के स्तर पर अधिकारियों को शक्तियां दी गईं। आज ज्यादातर निविदाएं फील्ड अधिकारियों द्वारा तय होती हैं, वे रेलवे बोर्ड के पास नहीं आती।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री ने रेलवे को नयी दिशा दी। बहुत बड़े पैमाने पर परिवर्तन हुआ है। सांसद खुद कहते हैं कि ये परिवर्तन दिखता है।’’ 

रेलवे में भर्ती को लेकर असमंजस के हालात : अधीर रंजन 
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भारतीय रेलवे के सामने वित्तीय चुनौतियां होने का दावा करते हुए बुधवार को कहा कि रेलवे में भर्ती को लेकर इस समय जो असमंजस के हालात हैं, ऐसे आजाद भारत के इतिहास में पहले कभी देखने को नहीं मिले। लोकसभा में कांग्रेस के नेता चौधरी ने ‘2022-23 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांग’ पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि रेलवे धीरे-धीरे बाहरी स्रोतों और ऋण पर निर्भर होती जा रही है और उसका आंतरिक राजस्व कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे के बजटीय संसाधन भी पर्याप्त नहीं हैं और इससे रेलवे की वित्तीय हालत पर गंभीर सवाल खड़ा होता है। 

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उन्होंने कहा कि रेलवे को लाभ कमाने के उद्देश्य से चलाना चाहिए यह बात सही है, लेकिन इसे केवल व्यावसायिक इकाई के रूप में नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिबद्धता निभाने वाले संस्थान के रूप में भी देखा जाना चाहिए। चौधरी ने रेल मंत्री से जानना चाहा कि रेलवे किरायों में विभिन्न श्रेणियों में कोविड से पूर्व की स्थिति में मिलने वाली छूट की बहाली को लेकर क्या स्थिति है। उन्होंने महामारी के बाद रेलवे के किराये में ‘अत्यधिक वृद्धि’ होने की ओर भी इशारा किया। उन्होंने दावा किया कि रेलवे में भर्ती को लेकर इस समय जो अव्यवस्था और असमंजस की स्थिति है ऐसा ‘‘आजाद भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया’’। उन्होंने कहा कि इसी के कारण पिछले दिनों रेलवे में भर्ती को लेकर प्रदर्शन के दौरान अनेक अभ्यर्थी घायल हो गये। 

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चौधरी ने सरकार से पूछा कि देश में बुलेट ट्रेन कब चलेगी, इस लिहाज से जमीन अधिग्रहण की स्थिति क्या है? उन्होंने कहा कि रेलवे में निजीकरण की ओर बढऩे का सबसे बड़ा उदाहरण तेजस ट्रेनें हैं और निजीकरण की तरफ सरकार क्यों बढ़ रही है। उसे स्पष्ट करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने अगले तीन वर्ष में 400 वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण की सरकार की घोषणा का जिक्र करते हुए कहा कि हर महीने औसतन 11 वंदे भारत ट्रेनें तैयार करनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि ऐसा कैसे संभव होगा।

 

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