Wednesday, Dec 08, 2021
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रेलवे, Defence और BSNL की जमीन से पैसा कमाएगी Modi सरकार, जानें किसके पास है कितनी जमीन

  • Updated on 10/22/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मोदी सरकार पैसा जुटाने के लिए अब खाली पड़ी मंत्रालयों और विभागों की अतिरिक्त जमीन का इस्तेमाल करने जा रही है। केंद्र के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, जिन मंत्रालयों और विभागों की जमीन से सरकार को मौद्रिक फायदा हो सकता है उसमें रेलवे, टेलिकम्युनिकेशनस और रक्षा मंत्रालय शामिल है। 

जानकारी के अनुसार, सरकार इन जमीनों पर कुछ संसाधनों के जरिए देशभर में नई इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़े करने की जुगत में है। इसके लिए मंत्रालयों की अतिरिक्त जमीन पर कमर्शियल डेवलपमेंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना को मंजूरी भी मिल गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे सरकार को अच्छी कमाई हो सकती है।

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इस बारे में एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि सरकार से मिली अनुमति के बाद रेलवे और रक्षा मंत्रालय अपनी अतिरिक्त भू-संपत्ति के मुद्रीकरण की योजना तैयार करने में लगे हैं। इसके लिए समीक्षा और चर्चाएं हो चुकी हैं। इन सरकारी कंपनियों में बीएसएनएल आगे बढ़ रही है, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद मिलेगी।

एक रिपोर्ट के अनुसार रेलवे और रक्षा मंत्रालय के पास सबसे ज्यादा सरकारी जमीन है। सरकारी डेटा की माने तो रेलवे के पास अभी 4.78 लाख हेक्टेयर (11.80 लाख एकड़) जमीन है। इनमें 4.27 लाख हेक्टेयर जमीन पर रेलवे और अन्य साथी संस्थाओं के उपयोग में आ रही है, जबकि 0.51 लाख हेक्टेयर (1.25 लाख एकड़) जमीन खाली पड़ी है।

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जबकि रक्षा मंत्रालय के पास 17.95 लाख एकड़ जमीन खाली पड़ी है। जिसमें 1.6 लाख एकड़ का इलाका 62 कैंटोनमेंट जोन में है, जबकि 16.35 लाख एकड़ सीमाओं के बाहर हैं। सरकार के आदेश के बाद रक्षा मंत्रालय ने भी खाली पड़ी जमीन के लिए समीक्षा शुरू कर दी है।

अधिकारी ने बताया कि बीएसएनएल इस पर पहले से ही काम करने में लगा था। जिससे उसने अपनी खाली पड़ी जमीन के अतिरिक्त ऐसी करीब एक दर्जन संपत्तियों की पहचान की है और अब वो उससे पैसे जुटाने की तैयारी कर रहा है। इस जमीन पर इन्फ्रास्ट्रक्चर से संबंधित काम किए जाएंगे जो जल्द ही शुरू हो सकता है। हालांकि अभी इसे शुरू होने में 6 माह का समय है।

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बता दें कि रेलवे ने पहले भी अपने पास पड़ी अतिरिक्त जमीन का फायदा लेने के लिए कई मॉडल्स लागू किए हैं। जिसमें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और राज्य सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर काम करना भी शामिल रहा है। मौजूदा समय में रेलवे पिछले साल के पांच गुना ज्यादा मिले टेंडर पर काम कर रहा है।

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