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राजस्थान में विश्वास बनाम अविश्वास प्रस्ताव, भाजपा और कांग्रेस में हलचल बढ़ी

  • Updated on 8/13/2020

नई दिल्ली/जयपुर/शेषमणि शुक्ल। राजस्थान कांग्रेस का संकट तो खत्म हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री और सरकार में विधायकों का भरोसा लौटा या नहीं, इसकी परीक्षा होनी बाकी है। इसके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार, 14 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है। वहीं भाजपा ने उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला लिया है। भाजपा को लगता है कि अभी भी वह बाजी पलट सकती है। इसे देखते हुए कांग्रेस सतर्क है और अपने विधायकों को अभी भी होटल में बाड़ाबंदी करके रखा है।

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विधानसभा  का विशेष सत्र आज से, गहलोत लाएंगे विश्वास प्रस्ताव
पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों के साथ सुलह के बाद भी मुख्यमंत्री विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाने पर अड़े हैं। माना जा रहा है कि यह गहलोत की रणनीति है, जिससे वे मुतमइन हो सकें कि नाराज विधायक मन से साथ आए हैं या केवल दिखावा है। वहीं एक बार विश्वास मत हासिल कर लिया तो फिर अगले छह महीने तक के लिए उनकी सरकार सुरक्षित हो जाएगी।

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विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला सकेगा। यही कारण है कि वीरवार को कांग्रेस विधानमंडल दल की बैठक में गहलोत ने सभी से इस प्रस्ताव पर मुहर लगवा ली। बैठक के बाद मीडिया के सवालों पर गहलोत ने कहा कि 19 विधायक नहीं आते तब भी वे विश्वास प्रस्ताव लाते, लेकिन इतनी खुशी नहीं होती। जो हुआ, उसे भूलो और आगे बढ़ो। कांग्रेस एकजुट है।

भाजपा ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का किया फैसला
वहीं दूसरी ओर भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में गहलोत सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला लिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की मौजूदगी में हुई इस बैठक में सभी ने एकमत से इस पर अपनी मुहर लगाई। बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाब चंद कटारिया ने मीडिया के सामने इसका ऐलान किया।

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माना जा रहा है कि यह वसुंधरा राजे के इशारे पर किया जा रहा है। दरअसल, एनडीए के सहयोगी दल के सांसद हनुमान बेनीवाल ने वसुंधरा पर गहलोत सरकार का अपरोक्ष समर्थन का आरोप लगाया गया था। अविश्वास प्रस्ताव लाकर वे जहां बेनीवाल समेत पार्टी के भीतर अपने विरोधियों का मुंह बंद कराना चाहती हैं, वहीं कांग्रेस की एकजुटता का भी इससे पता चल जाएगा।

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---पायलट को देख मुस्करा पड़े गहलोत
करीब एक महीने बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट वीरवार को आमने-सामने मिले। मुलाकात में अपना दाया हाथ आगे बढ़ाते हुए गहलोत ने पायलट से हाथ मिलाया और बाएं हाथ को उनके बाजू पर ले जाकर थपकी देते हुए मुस्कान भरी। जबकि दाया हाथ आगे बढ़ा कर पायलट ने हाथ मिलाया और ऊपर से अपने बाए हाथ का सपोर्ट देते हुए थपकी दी। वे इस दौरान पूरी तरह संयत दिखे। लेकिन दोनों के मास्क उनकी आंखों और चेहरे के भाव को नहीं रोक पाए।


---कांग्रेस पूरी तरह सतर्क, होटल में रहेंगे विधायक
भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव के फैसले को देखते हुए कांग्रेस पूरी तरह सतर्क है। कांग्रेस को अभी भी डर है कि भाजपा उसके विधायकों को बरगलाने और तोड़फोड़ में लगी है। इसलिए विधानमंडल दल की बैठक के बाद सभी विधायकों को फिर से होटल में ले जाया गया है।

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शुक्रवार को वहीं से उन्हें सीधे विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए लाया जाएगा। होटल में गहलोत खेमे के साथ-साथ पायलट खेमे के विधायकों को भी ले जाया गया है। कांग्रेस विधान मंडल दल की बैठक से ऐन पहले पार्टी ने पायलट खेमे के निलंबित विधायक भंवरलाल शर्मा और विश्वेन्द्र सिंह को बहाल कर दिया। इसकी जानकारी पार्टी प्रभारी महासचिव अविनाश पांडेय ने ट्वीट करके दी।
 

 

 

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