Monday, Nov 30, 2020

Live Updates: Unlock 6- Day 30

Last Updated: Mon Nov 30 2020 08:39 AM

corona virus

Total Cases

9,432,075

Recovered

8,846,313

Deaths

137,177

  • INDIA9,432,075
  • MAHARASTRA1,820,059
  • ANDHRA PRADESH1,648,665
  • KARNATAKA882,608
  • TAMIL NADU779,046
  • KERALA599,601
  • NEW DELHI566,648
  • UTTAR PRADESH541,873
  • WEST BENGAL526,780
  • ARUNACHAL PRADESH325,396
  • ODISHA317,789
  • TELANGANA268,418
  • RAJASTHAN262,805
  • CHHATTISGARH234,725
  • BIHAR234,553
  • HARYANA230,713
  • ASSAM212,483
  • GUJARAT206,714
  • MADHYA PRADESH203,231
  • CHANDIGARH183,588
  • PUNJAB150,805
  • JAMMU & KASHMIR109,383
  • JHARKHAND104,940
  • UTTARAKHAND73,951
  • GOA45,389
  • HIMACHAL PRADESH38,977
  • PUDUCHERRY36,000
  • TRIPURA32,412
  • MANIPUR23,018
  • MEGHALAYA11,269
  • NAGALAND10,674
  • LADAKH7,866
  • SIKKIM4,967
  • ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS4,631
  • MIZORAM3,806
  • DADRA AND NAGAR HAVELI3,325
  • DAMAN AND DIU1,381
Central Helpline Number for CoronaVirus:+91-11-23978046 | Helpline Email Id: ncov2019 @gov.in, ncov219 @gmail.com
rajasthan political case after sc green signal all eyes on high court verdict rkdsnt

राजस्थान सियासी घमासान : SC की हरी झंडी के बाद अब हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर

  • Updated on 7/23/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के बर्खास्त उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 बागी विधायकों की याचिका पर अपना आदेश सुनाने से राज्य के उच्च न्यायालय को रोकने से बृहस्पतिवार को इंकार कर दिया, लेकिन उसने कहा कि यह व्यवस्था विधानसभा अध्यक्ष द्वारा शीर्ष अदालत में दायर याचिका पर आने वाले निर्णय के दायरे में आयेगी। शीर्ष अदालत ने राजस्थान उच्च न्यायालय में लंबित मामले पर रोक लगाने या इसे अपने यहां स्थानांतरित करने का विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी का अनुरोध अस्वीकार करते हुये कहा, ‘‘लोकतंत्र में असहमति के स्वर दबाये नहीं जा सकते।’’ 

कोरोना संकट में भी मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की बल्ले-बल्ले

जस्टिस अरूण मिश्रा, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ विधानसभा के अध्यक्ष को उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्देश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उच्च न्यायालय ने इन बागी विधायकों के खिलाफ 24 जुलाई तक अयोग्यता की कार्यवाही स्थगित रखने के लिये विधानसभा अध्यक्ष से कहा था। उच्च न्यायालय बर्खास्त उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित 19 बागी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी द्वारा अयोग्यता के मामले में दी गयी नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर 24 जुलाई को आदेश देगा।

अशोक गहलोत ने किया साफ- हमारे पास बहुमत, छापों से घबराने वाले नहीं

 शीर्ष अदालत ने जोशी की याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विचार के दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल पूछने के बाद कहा कि इन पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है क्योंकि इसमें ‘बड़ा सवाल’ लोकतंत्र से संबंधित है, और यह कैसे बचेगा। पीठ ने कहा, ‘‘चूंकि उच्च न्यायालय पहले ही इस मामले में काफी लंबी सुनवाई कर चुका है और उसका आदेश आना है, हम यह आदेश देने पर रोक नहीं लगा रहे हैं, हालांकि यह शीर्ष अदालत में लंबित याचिका (अध्यक्ष की) के निर्णय के दायरे में होगा।’’ पीठ ने इसके साथ ही अध्यक्ष की याचिका पर आगे सुनवाई 27 जुलाई के लिये सूचीबद्ध कर दी।  

Yes Bank मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजस्थान के कारोबारी रमन कांत शर्मा को तलब

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अधिकार क्षेत्र के सवाल पर निर्णय के लिये इस मामले में विस्तृत सुनवाई की जरूरत है। हालांकि, यह अनुरोध किया गया है कि उच्च न्यायलय को इसमें आदेश नहीं पारित करना चाहिए, जिसकी उसने सुनवाई की है और आदेश सुरक्षित रखा है।’’ विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने विधायकों की याचिका पर विचार करने के उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाये थे। उन्होंने कहा कि न्यायालय किसी सदस्य को सदन की सदस्यता के अयोग्य घोषित करने या निलंबित करने के अध्यक्ष के निर्णय के बाद ही इसमें हस्तक्षेप कर सकता है। 

अमित शाह का निजी सचिव बताकर मंत्रियों को फोन करने वाला युवक गिरफ्तार

सिब्बल ने उच्च न्यायालय के 21 जुलाई के उस आदेश का उल्लेख किया जिसमें अध्यक्ष से कहा गया था कि अयोग्यता की कार्यवाही शुक्रवार तक टाल दी जाये और कहा, ‘‘उच्च न्यायालय अध्यक्ष को समय बढ़ाने का निर्देश कैसे दे सकता है? यह अदालत का अधिकार क्षेत्र नहीं है।’’ सिब्बल ने इस संबंध में 1992 के बहुर्चिचत किहोतो होलोहान प्रकरण में शीर्ष अदालत के फैसले का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष द्वारा की गयी अयोग्यता की कार्यवाही में अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं। 

गुजरात सरकार का फीस नहीं लेने के आदेश, प्राइवेट स्कूलों में मची खलबली, ऑनलाइन क्लासेस बंद

उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने अभी तक कोई फैसला नहीं किया है और उन्होंने तो इन विधायकों को सिर्फ नोटिस ही जारी किया है, जिसका उन्हें जवाब देना चाहिए।      उन्होंने अयोग्यता की कार्यवाही के कारणों का जिक्र किया और कहा कि पार्टी की बैठक में शामिल नहीं होना, अपनी ही सरकार को अस्थिर करने की साजिश करना, हरियाणा जाना और होटल में संपर्क के बगैर ही ठहरना, टीवी पर बयान देना तथा अपनी ही सरकार के खिलाफ शक्ति परीक्षण की मांग करना 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 2 (1)(ए) के तहत स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता त्यागना है। 

कोरोना संकट में RBI नीतियों को लेकर हैरान-परेशान नजर आए रघुराम राजन

इस पर पीठ ने सवाल किया कि क्या इन विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है या उन्होंने त्यागपत्र दे दिया है। सिब्बल ने जब कहा, ‘‘नहीं’’, तो पीठ ने कहा, ‘‘हम यह जानने का प्रयास कर रहे है कि क्या इस मामले में अपनाई गयी इस प्रक्रिया (अयोग्यता) की अनुमति है या नहीं।’’ सिब्बल ने इस पर कहा, ‘‘इसकी अनुमति है या नहीं,न्यायालय इस समय इसमें नहीं जा सकता।’’ पीठ ने इस पर टिप्पणी की, ‘‘लोकतंत्र में असहमति के स्वर दबाये नहीं जा सकते।’’      पीठ ने कहा, ‘‘यह इतना आसान मामला नहीं है। यह वह मामला है जिसमें जनता ने इन लोगों का चुनाव किया है। ये जनता के प्रतिनिधि हैं।’’ पीठ ने कहा कि अध्यक्ष को अयोग्यता के मुद्दे पर फैसला करने का अधिकार है लेकिन इसकी वजह भी होनी चाहिए। 

क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाला : शिकायत में शेखावत की पत्नी का भी नाम

सिब्बल ने कहा कि ये विधायक पार्टी की बैठक में अपने असहमति के स्वर उठा सकते है और चूंकि अध्यक्ष ने अयोग्यता की याचिका पर उन्हें जवाब देने का अवसर दिया है, वे सारी बातों का जवाब दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अयोग्यता की कार्यवाही में वजहें आनी चाहिए और इसे टालने संबंधी उच्च न्यायालय का निर्देश इन विधायकों को ‘संरक्षण’ प्रदान करने जैसा है। कुछ बागी विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि अध्यक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता ने काफी विस्तार से उच्च न्यायालय में दलीलें पेश की हैं और अब वे वहां की कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध नहीं कर सकते। 

विकास दुबे एनकाउंटर : गठित जांच आयोग पर पूर्व IAS अफसर ने उठाए सवाल

कुछ अन्य विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान अध्यक्ष ने जब दो बार समय बढ़ाया तो अब अगर उच्च न्यायालय ऐसा कह रहा है तो इसमें दिक्कत क्या है। सुनवाई के दौरान पीठ ने सिब्बल से सवाल किया, ‘‘अगर कोई इसमें (पार्टी की बैठक) शामिल नहीं होता है तो क्या यह माना जायेगा कि वह पार्टी के खिलाफ है?’’ सिब्बल ने कहा, ‘‘कौन कहता है कि उन्हें इस आधार पर अयोग्य घोषित किया जायेगा? अध्यक्ष इस मामले में फैसला करेंगे।’’’ 

प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना कार्यवाही: योगेंद्र यादव बोले- हम देखेंगे!

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पार्टी की बैठक में शामिल नहीं होने के लिये नहीं है बल्कि इसमें और भी बहुत कुछ है। अध्यक्ष को सदन में इन सदस्यों के आचरण पर गौर करना है। पीठ ने जब यह कहा कि इस मामले में विस्तार से सुनवाई की जरूरत है तो सिब्बल ने कहा, ‘‘मैं अनुरोध करता हूं कि आप उच्च न्यायालय से मामले को अपने यहां मंगा लें।’’ पीठ के यह कहने पर कि, ‘‘अभी नहीं’’, सिब्बल ने कहा कि ऐसी स्थिति में शीर्ष अदालत को उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं पर आगे कार्यवाही पर रोक लगानी चाहिए। 

सुनवाई के दौरान कुछ हल्के फुल्के क्षण भी आये जब पीठ ने सिब्बल से पूछा, ‘‘आप इतने कष्ट में क्यों हैं? इस पर सिब्बल ने मुस्कुराते हुये जवाब दिया और कहा, ‘‘मैं तकलीफ में नहीं हूं।’’ जस्टिस मिश्रा ने कहा, ‘‘मैने सोचा आप सोचने की प्रक्रिया में है। आप एक बुजुर्ग व्यक्ति हैं और आपकी यह भावना होगी।’’      सिब्बल ने कहा, ‘‘आज कल मैं इन सबका आदी हो चुका हूं क्योंकि इस समय इतना कुछ हो रहा है।’’ 

अध्यक्ष की याचिका पर सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कहा, ‘‘हमारी शिकायत पूरी तरह संवैधानिक है और अध्यक्ष का फैसला होने तक कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक अध्यक्ष से कहा जा सकता है कि वह एक समयसीमा के अंदर इसका फैसला करें, लेकिन इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और विधायकों की अयोग्यता या निलंबन के बारे में अध्यक्ष का निर्णय होने से पहले उसके समक्ष लंबित कार्यवाही को चुनौती नहीं दी सकती।     

 

 

 

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें...

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.