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जानें कौन हैं हरिवंश, जिनके सिर सजा राज्यसभा के उपसभापति का ताज

  • Updated on 8/9/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राज्यसभा के उपसभापति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश ने जीत हासिल की और उनके नाम 125 वोट पड़े। जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी और तारीफ में कसीदे पड़े। आइये जानते हैं, कौन हैं ये हरिवंश...

बेहद साधारण परिवार से हैं हरिवंश

हरिवंश एक बेहद ही साधारण परिवार से हैं, वह बिहार के गांव सिताब दियारा के रहने वाले हैं, ये लोकनायक जयप्रकाश नारायण का भी गांव है। इसी गांव में हरिवंश के परिवार ने अपनी जमीन गंगा नदी के कटान की वजह से खो दी थी। हरिवंश ने अर्थशास्त्र से पोस्ट ग्रेजुएशन की है और पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की।

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पत्रकारिता में गुजारा लंबा वक्त

सबसे पहले 80 के दशक में हरिवंश ने एक धर्मयुग अखबार से पत्रकारिता शुरू की। इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया में सरकारी अधिकारी के तौर पर रहे। लेकिन फिर सरकारी नौकरी छोड़कर पत्रकारिता में दोबारा आए। साल 1989 में हरिवंश ने रांची से छपने वाले प्रभात खबर के साथ नौकरी की और बाद में इसी अखबार में संपादक के तौर पर भी भूमिका निभाई। पीएम मोदी ने आज उनकी तारीफ में कहा कि हरिवंश जी कलम के धनी हैं और उन्होंने चार दशक की पत्रकारिता का अनुभव है। इसके साथ उनके साधारण जीवन की तरफ इशारा करते हुए पीएम ने कहा कि उन्हें शहरों की चकाचौंध कभी नहीं भाई। हरिवंश को 2014 में जेडीयू से राज्यसभा की सद्स्यता मिली इसके लिए उन्हें अखबार में संपादक के पद से इस्तीफा देना पड़ा।

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राजनीति में यूं खास रहे हरिवंश

पीएम मोदी ने अपने भाषण में ये भी कहा कि हरिवंशजी चंद्रशेखरजी के करीबी थे। बता दें कि राज्यसभा सदस्य बनने से पहले वह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के राजनीतिक सलाहकार भी रहे। ये पद संभालने के कारण उन्होंने अखबार में संपादक के पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन चंद्रशेखर सरकार से कांग्रेस के समर्थन वापस लेने पर वह फिर अखबार में चले गए थे। इसके अलावा हरिवंश बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भी काफी करीब रहे हैं। ये भी कहा जाता है कि बिहार में नीतीश कुमार की छवि बनाने में इनकी अहम भूमिका है। राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने एक ऐसे गांव को गोद लिया जिससे उनका दूर दूर से कोई नाता न था। उन्होंने बिहार के रोहतास जिले के बहुआरा गांव को चुना।

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