Sunday, Mar 07, 2021
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संजय सिंह समेत राज्यसभा के 8 सदस्य निलंबित, नायडू ने अविश्वास प्रस्ताव नामंजूर किया

  • Updated on 9/21/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने उपसभापति हरिवंश के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव नोटिस को सोमवार को खारिज कर दिया और कहा कि यह उचित प्रारूप में नहीं था। वहीं, रविवार को सदन में अमर्यादित आचरण को लेकर तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और आप के संजय सिंह सहित विपक्ष के आठ सदस्यों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबित सदस्यों ने सदन से बाहर जाने से इनकार कर दिया। वे और कुछ अन्य सदस्य इस दौरान सदन में विरोध जताते रहे। हंगामे की वजह से सदन का कामकाज बार बार बाधित हुआ। 

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संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कल के हंगामे में असंसदीय आचरण को लेकर विपक्ष के आठ सदस्यों को मौजूदा सत्र के शेष समय के लिए निलंबित किए जाने का प्रस्ताव पेश किया। इसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी। निलंबित किए गए सदस्यों में कांगेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा, तृणमूल के ब्रायन और डोला सेन, माकपा के केके रागेश और इलामारम करीम व आप के संजय सिंह शामिल हैं। 

इससे पहले सभापति नायडू ने उपसभापति हरिवंश के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव नोटिस का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष और 46 सदस्यों का एक पत्र मिला है जिसमें आरोप लगाया गया है कि रविवार को कृषि संबंधी दो विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान स्थापित संसदीय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। सभापति ने कहा कि प्रस्ताव निर्धारित प्रारूप में भी नहीं है और इसके लिए जरूरी 14 दिनों के नोटिस का भी पालन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह सत्र एक अक्टूबर को समाप्त हो रहा है इसलिए 14 दिनों की जरूरी समयसीमा का पालन नहीं हो पा रहा है। 

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नायडू ने कहा कि उन्होंने कल की पूरी कार्यवाही पर गौर किया। उन्होंने कहा कि रिकार्ड के अनुसार उपसभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से बार-बार अपनी सीट पर जाने, चर्चा में भाग लेने और अपने संशोधन प्रस्ताव पेश करने को कहा था। शून्यकाल समाप्त होने के बाद नायडू ने कहा कि एक दिन पहले उच्च सदन में कुछ विपक्षी सदस्यों ने जो आचरण किया वह दुखद, अस्वीकार्य और निंनदनीय है तथा सदस्यों को इस संबंध में आत्मचिंतन  करना चाहिए। नायडू ने हंगामा करने वाले सदस्यों के व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि कि हरिवंश ने बाद में उन्हें सूचित किया कि उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया गया।  

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नायडू ने रविवार को हुए हंगामे का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ सदस्यों ने कोविड-19 संबंधी सामाजिक दूरी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि उपसभापति के साथ बदसलूकी की गयी, माइक उखाड़े गए और नियमों की पुस्तिका फेंकी गयी। उनके साथ अमर्यादित आचरण किया गया। नायडू ने इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन के ‘नाम का उल्लेख’’ करते हुए उन्हें सदन से बाहर जाने को कहा। हालांकि, ब्रायन सदन में ही रहे। 

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नायडू ने कहा कि कल की घटना संसद खासकर राज्यसभा की प्रतिष्ठा को भी धूमिल करने वाली थी, जिसमें सदस्य मेज पर खड़े हो गए और सदन में नृत्य तक किया। सभापति ने कहा कि कल हंगामे के दौरान सदस्यों का व्यवहार आपत्तिजनक और असंसदीय था। उन्होंने कहा कि कल का दिन राज्यसभा के लिए बहुत ही खराब दिन था।

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