Sunday, Apr 18, 2021
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राजस्थान में टिकैत की सरकार को ललकार- अब संसद की ओर होगा मार्च, आएंगे 40 लाख ट्रैक्टर

  • Updated on 2/24/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नए कृषि कानूनों (New farm Laws) के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातरा जारी है। मंगलवार को राजस्थान के सीकर जिले में हुई रैली के दौरान भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगली बार किसान संसद की ओर मार्च करेंगे। इस बार 4 लाख के स्थान पर 40 लाख ट्रैक्टर संसद की ओर कूच करेंगे। 

बता दें कि इससे पहले किसानों ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकाली थी। इस दौरान लाल किला समेत दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़की थी और 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे। वहीं इस रैली के दौरान एक किसान की मौत भी हो गई थी। अब एक बार फिर से किसान सरकार को ट्रैक्टर रैली की चेतावनी दे रहे हैं। 

वहीं दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने मंगलवार को कहा कि केंद्र की मोदी सरकार की मनमानी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को खत्म करे तो किसान बातचीत को तैयार हैं।

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'शर्तों के पूरा होने तक किसान पीछे नहीं हटेंगे'
नरेश टिकैत यहां बीबीनगर जाते वक्त कुछ देर के लिए गांव धनौरा में भाकियू के मंडल सचिव ज्ञानेश्वर त्यागी के आवास पर आए और मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पहले सरकार तीनों कानूनों को वापस ले और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून बनाए, इन शर्तों के पूरा होने तक किसान पीछे नहीं हटेंगे। 

'यह आंदोलन अनिश्चितकालीन'
नरेश टिकैत ने कहा कि यह आंदोलन अनिश्चितकालीन है, जो मरते दम तक जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि तीनों कृषि कानून किसानों के हक में नहीं है और यह बात सरकार भी जानती है, लेकिन अपनी जिद के चलते वह किसानों की बात सुनने को तैयार नहीं है। टिकैत ने दावा किया कि भाजपा में ऐसे कई नेता हैं जो इस समस्या को सुलझा सकते हैं, लेकिन उन पर भी दबाव बनाया हुआ है।  

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सरकार अपनी जिद छोड़ दे- नरेश टिकैत
उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिद छोड़ दे क्योंकि किसान बातचीत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि कानूनों को सरकार को वापस लेना ही होगा, यह शर्त माने जाने तक किसान पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा,‘‘सरकार किसानों को कई नाम दे रही है, जो किसानों के लिए अपमान की बात है, लेकिन सरकार यह भूल गई है कि किसानों का शोषण करने वाला कभी सफल नहीं हुआ है। इसका परिणाम उसे भुगतना ही पड़ेगा।’’ 

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